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HBD Ramakant Desai: कद के कारण लोग कहते थे Tiny, जिसने सचिन को बनाया कप्तान और फिर हटाया भी

HBD Ramakant Desai: पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज रमाकांत देसाई का आज जन्मदिन है. छोटे कद के कारण उन्हें लोग 'टाइनी' कहते थे. (File Photo)

HBD Ramakant Desai: पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज रमाकांत देसाई का आज जन्मदिन है. छोटे कद के कारण उन्हें लोग 'टाइनी' कहते थे. (File Photo)

Happy Birthday Ramakant Desai: पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज रमाकांत देसाई का आज यानी 20 जून को जन्मदिन है. उनका कद सिर्फ पांच फीट 4 इंच था. इसी वजह से उन्हें रमाकांत टाइनी देसाई कहा जाता था. उन्होंने भारत के लिए 28 टेस्ट में 74 विकेट लिए. उनके सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन रहते सचिन तेंदुलकर भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान बने थे.

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    नई दिल्ली. क्रिकेट में अक्सर ऐसा माना जाता है कि ऊंची कद-काठी के खिलाड़ी ही तेज गेंदबाज बन सकते हैं. लेकिन हर बार ऐसा हो, ये जरूरी भी नहीं. कम से कम पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज रमाकांत देसाई के लिए तो ऐसा नहीं कहा जा सकता है. क्योंकि उनका कद सिर्फ पांच फीट चार इंच था. इसी वजह से उन्हें रमाकांत 'टाइनी' देसाई कहा जाता था. लेकिन उन्होंने एक वक्त भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली थी. आज यानी 20 जून को उनका जन्मदिन है. वो 1939 में आज ही के दिन बॉम्बे (अब मुंबई) में पैदा हुए थे. उन्होंने भारत के लिए सिर्फ 9 साल टेस्ट क्रिकेट खेली.

    रमाकांत का कद भले ही छोटा था. लेकिन अपनी रफ्तार और बाउंसर के जरिए उन्होंने कई दिग्गज बल्लेबाजों को परेशान किया. इसका आगाज घरेलू क्रिकेट से हुआ. रमाकांत ने 1958-59 के अपने पहले रणजी ट्रॉफी सीजन में सिर्फ 11 की औसत से 50 विकेट लेकर सनसनी मचा दी थी. अगले ही साल यानी 1959 में उन्हें सिर्फ 19 साल की उम्र में वेस्टइंडीज के खिलाफ दिल्ली टेस्ट में डेब्य़ू का मौका मिला. ये टेस्ट तो ड्रॉ रहा. लेकिन रमाकांत ने मैच में अपनी गेंदबाजी से सबको प्रभावित किया. उन्होंने भारत की ओर से सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए और 49 ओवर गेंदबाजी की.

    छोटे कद के बावजूद रमाकांत घातक बाउंसर फेंकते थे
    1959 में भी भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर गई और रमाकांत ने तेज गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाली. इस दौरे पर हुए लॉर्ड्स टेस्ट की पहली पारी में इंग्लैंड के 80 रन में 6 विकेट गिर गए थे. इसमें से अकेले 5 विकेट देसाई ने लिए. तब क्रिकेट की बाइबिल माने जाने वाली मैगजीन विज्डन ने उनकी बाउंसर और आउट स्विंग फेंकने की क्षमता और साहस की तारीफ की थी. ये अलग बात है कि भारत ये मैच 8 विकेट से हार गया था. लेकिन रमाकांत ने इंग्लिश बल्लेबाजों में अपना खौफ पैदा कर दिया था.

    रमाकांत ने हनीफ मोहम्मद को काफी परेशान किया
    1960-61 में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भी रमाकांत असरदार साबित हुए. खासतौर पर पाकिस्तानी दिग्गज बल्लेबाज हनीफ मोहम्मद के खिलाफ. हनीफ उनकी बाउंसर के आगे बेबस नजर आए. तब रमाकांत ने 9 पारियों में चार बार इस दिग्गज पाकिस्तानी बल्लेबाज को अपना शिकार बनाया था. तब भारतीय फैंस मजाक में कहते थे हनीफ रमाकांत के 'बकरा' हैं, जिनका वो अक्सर शिकार कर देते हैं.

    रमाकांत ने टूटे जबड़े के साथ टेस्ट खेला था
    1964-65 में उन्‍होंने न्‍यूजीलैंड के खिलाफ बॉम्बे टेस्‍ट में अपने करियर का सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन करते हुए 56 रन देकर 6 विकेट लिए थे. दो साल बाद न्‍यूजीलैंड के खिलाफ 1967-68 की टेस्ट सीरीज में भी रमाकांत का प्रदर्शन शानदार रहा था. तब उन्होंने डुनेडिन टेस्‍ट में आखिरी विकेट के लिए बिशन सिंह बेदी के साथ 57 रन की साझेदारी की थी. ये साझेदारी इसलिए भी अहम थी, क्योंकि न्‍यूजीलैंड के गेंदबाज डिक मोत्‍ज की गेंद पर रमाकांत देसाई का जबड़ा फ्रैक्‍चर हो गया था. वो टूटे हुए जबड़े के साथ खेले थे. भारत तो वो टेस्ट जीत गया था, लेकिन देसाई फिर देश के लिए टेस्ट क्रिकेट नहीं खेले.

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    रमाकांत ने सचिन को बनाया था भारतीय टीम का कप्तान
    रमाकांत ने बॉम्बे के लिए 53 रणजी मैच में कुल 239 विकेट लिए. वहीं, भारत की ओर से खेले 28 टेस्ट में उन्होंने 74 विकेट लिए. उन्होंने 2 बार पांच विकेट और 8 बार 4 विकेट हासिल किए. रमाकांत ने 150 फर्स्ट क्लास मैच में 468 विकेट अपने नाम किए. देसाई 1996 में तब सुर्खियों में आए, जब उन्हें बीसीसीआई ने सीनियर सेलेक्शन कमेटी का चेयरमैन बनाया.

    सचिन तेंदुलकर को टीम इंडिया कप्तान बनाने में उनका सबसे बड़ा हाथ था. हालांकि, खराब फॉर्म के बाद उन्होंने ही सचिन को इस जिम्मेदारी से हटाया था. 27 अप्रैल 1998 को मुंबई के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया.

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