दिलीप वेंगसरकर; लॉर्ड्स का दबंग आर्मी से नहीं, फिर भी साथी कर्नल कहते हैं

दिलीप वेंगसरकर ने 116 टेस्ट और 129 वनडे मैच खेले.

दिलीप वेंगसरकर ने 116 टेस्ट और 129 वनडे मैच खेले.

Happy Birthday Dilip Vengsarkar: दिलीप वेंगसरकर 6 अप्रैल को अपना जन्मदिन मना रहे हैं. भारतीय क्रिकेट में 15 साल तक राज करने वाले इस क्रिकेटर के हजार रंग हैं. मैदान पर जितने रिकॉर्ड, उतने ही बाहर के किस्से. यह मौका है, जब उनके कुछ किस्से हम याद करें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 6, 2021, 10:25 AM IST
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दिलीप वेंगसरकर. भारतीय क्रिकेट में 15 साल तक राज करने वाले इस क्रिकेटर के हजार रंग हैं. क्लासिकल शॉट्स खेलने वाले वेंगसरकर कि मैदान पर जितने रिकॉर्ड हैं, उतने ही बाहर किस्से भी. स्वभाव से शांत वेंगी ने क्रिकेट की हर ऊंचाई छुई. भारत के कप्तान रहे और चयनकर्ता भी बने. किसी दौर में भारतीय टीम की ‘दीवार’ रहे दिलीप वेंगसरकर आज 6 अप्रैल को अपना जन्मदिन मना रहे हैं. यह एक मौका है, जब उनके कुछ किस्से हम याद करें.

दिलीप वेंगसरकर को कर्नल भी कहा जाता है. तो शुरुआत इसी उपनाम से. आखिर उनके नाम के साथ कर्नल कैसे जुड़ा कैसे? उन्होंने 1975 में ईरानी ट्रॉफी में शेष भारत के खिलाफ बॉम्बे की ओर से धमाकेदार शतक बनाया था. वेंगी ने इस पारी के दौरान बिशन सिंह बेदी और इरापल्ली प्रसन्ना की गेंदों की खूब पिटाई की. कहा जाता है कि मैच में कॉमेंट्री कर रहे लाला अमरनाथ ने इसी पारी को देखकर उनकी तुलना कर्नल सीके नायडू से की. तभी से वेंगी के नाम से कर्नल जुड़ गया. लेकिन ठहरिए. कर्नल का दूसरा किस्सा भी है. यह भी कहा जाता है कि किसी स्थानीय पत्रकार ने वेंगी को कर्नल उपनाम दिया था. अब सच तो वेंगी ही जानते होंगे.

दिलीप वेंगसरकर की सबसे ज्यादा चर्चा लंदन के लॉर्ड्स स्टेडियम में तीन शतक बनाने के लिए होती है. लॉर्ड्स को क्रिकेट का मक्का कहा जाता है. यहां खेलना किसी भी क्रिकेटर की चाहत होती है. दिलीप वेंगसरकर ने यहां चार टेस्ट मैच खेले हैं. उन्होंने पहले तीन टेस्ट में शतकीय पारियां खेलीं. चौथे टेस्ट में 52 और 35 रन बनाए. इस तरह उन्होंने इस मैदान पर 4 टेस्ट में 500 से ज्यादा रन बनाए हैं. डॉन ब्रैडमैन, सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली जैसे दिग्गजों के नाम भी लॉर्ड्स में 3 शतक नहीं हैं.

भारतीय क्रिकेट उन खुशकिस्मत टीमों में से एक है, जिसके पास हर दौर में एक ‘दीवार’ रही है. 1956 में जन्मे वेंगसरकर भी उन खिलाड़ियों में से एक हैं, जिन पर उनकी टीम से लेकर प्रशंसक तक भरपूर भरोसा करते थे. यह खिलाड़ी खासकर तब अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाता था, जब भारतीय टीम संकट में हुआ करती थी. वेंगसरकर के रिटायर होने के बाद राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, चेतेश्वर पुजारा अक्सर इसी भूमिका में देखे या देखे जाते हैं.
वेंगसरकर सिर्फ लॉर्ड्स के दबंग नहीं थे. मैदान के बाहर भी अक्सर उनकी दबंगई देखने को मिल जाती थी. एक किस्सा वानखेड़े स्टेडियम का है. वेंगी उन दिनों रिटायर हो चुके थे. मैदान पर मुंबई और पंजाब का मैच चल रहा था. वेंगसरकर भी मैच देख रहे थे. कुछ दर्शक उन्हें परेशान कर रहे थे. भारतीय टीम के कर्नल ने कुछ देर बर्दाश्त किया. जब ढीठ दर्शक नहीं माने वेंगसरकर स्टैंड में कूदे और उन्हें दौड़ा लिया. कुछ दूर जाकर वेंगी ने एक दर्शक को पकड़ लिया और उसे एक तमाचा रसीद कर दिया.

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विराट कोहली का भारतीय टीम में चयन दिलीप वेंगसरकर ने ही किया था. वेंगसरकर 2006 में टीम इंडिया के चीफ सेलेक्टर बने और 2008 में विराट कोहली की अगुवाई में भारत ने अंडर 19 वर्ल्ड कप जीता. वेंगसरकर ने इसके बाद विराट कोहली को श्रीलंका दौरे के लिए टीम इंडिया में जगह देने का फैसला कर लिया. हालांकि, तत्कालीन कप्तान एमएस धोनी और कोच गैरी कर्स्टन इस पक्ष में नहीं थे. धोनी और कर्स्टन पुरानी टीम के साथ ही श्रीलंका दौरे पर जाना चाहते थे. लेकिन वेंगसरकर ने कोहली का टैलेंट देखकर उन्हें मौका दिया. आज कोहली का टैलेंट सबके सामने है.

दिलीप वेंगसरकर ने 116 टेस्ट मैचों में 6868 रन बनाए और 17 शतक जड़े. वे जब रिटायर हुए, तब सुनील गावस्कर (34) के बाद सबसे ज्यादा टेस्ट शतक बनाने वाले बल्लेबाज थे. वेंगी ने 129 वनडे मैच में 3508 रन भी बनाए. वे ना सिर्फ भारतीय कप्तान बने, बल्कि चयनसमिति के अध्यक्ष भी रहे. वेंगसरकर को 1981 में अर्जुन अवॉर्ड मिला. उन्हें 1987 में विज्डन क्रिकेटर ऑफ़ द ईयर भी घोषित किया गया. वेंगी को पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है.

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