स्‍कूल में हुए एक संयोग से गोलकीपर से महान क्रिकेटर बने एमएस धोनी, इतिहास में दर्ज करवाया नाम

स्‍कूल में हुए एक संयोग से गोलकीपर से महान क्रिकेटर बने एमएस धोनी, इतिहास में दर्ज करवाया नाम
एमएस धोनी की गोलकीपर से विकेटकीपर बनने की कहानी काफी दिलचस्‍प है

आज भले ही एमएस धोनी (MS Dhoni) की गिनती दुनिया के महान विकेटकीपर्स में होती है, मगर उन्‍होंने खेल की दुनिया में कदम गोलकीपर में रूप में रखा था

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नई दिल्‍ली. भारत को दो बार वर्ल्‍ड कप दिलाने वाले दुनिया के दिग्‍गज विकेटकीपर बल्‍लेबाज एमएस धोनी (MS Dhoni) सात जुलाई को अपना 39वां जन्‍मदिन मनाएंगे. पिछले साल हुए वर्ल्‍ड कप के बाद से ही धोनी क्रिकेट से दूर हैं, हालांकि इस साल वह मैदान पर वापसी करने वाले थे, मगर कोरोना वायरस के कारण उनकी वापसी टल गई है. उम्‍मीद की जा रही है कि धोनी ऑस्‍ट्रेलिया में होने वाले टी20 वर्ल्‍ड कप में खेलते नजर आएंगे. धोनी अगर टी20 क्रिकेट से वापसी करके और यही से मैदान अलविदा कहते हैं तो यह पल अपने आप में ऐतिहासिक होगा. वैसे स्कूल टीम के गोलकीपर से भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान बनने तक का उनका सफर हमेशा यादगार रहेगा.

स्कूल में पहली बार पकड़ा बल्ला

महेन्द्र सिंह धोनी का जन्म झारखंड के रांची में हुआ. उन्होंने रांची के जवाहर विद्यालय मंदिर, श्यामली से स्कूली पढ़ाई की. इसी स्कूल में सबसे पहले धोनी ने क्रिकेट का बल्ला पकड़ा. साल 1992 की बात है. तब धोनी छठी क्लास में पढ़ते थे. स्कूल की क्रिकेट टीम को एक विकेटकीपर की जरूरत पड़ी. उस समय धोनी स्कूल की फुटबॉल टीम के गोलकीपर हुआ करते थे. संयोग ऐसा बना कि उन्हें गोलकीपर से विकेटकीपर बना दिया गया. स्कूल के बाद धोनी जिलास्तरीय कमांडो क्रिकेट क्लब की ओर से खेलने लगे. फिर सेंट्रल कोल फील्ड लिमिटेड की टीम से क्रिकेट खेला.



क्रिकेट के लिए छोड़ दी रेलवे की नौकरी
18 साल की उम्र में धोनी ने पहली बार रणजी मैच खेला. वह उस समय बिहार रणजी टीम की तरफ से खेलते थे. इसी दौरान धोनी की नौकरी रेलवे में टिकट कलेक्टर के रूप में लगी. उनकी पहली पोस्टिंग पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में हुई. 2001 से 2003 तक धोनी खड़गपुर के स्टेडियम में क्रिकेट खेलते रहे. हालांकि धोनी को ये नौकरी रास नहीं आई. उनका इरादा तो कुछ और ही था. धोनी रेलवे की टीम के लिए खेलने लगे.

2004 में मिली टीम इंडिया में जगह

धोनी को 2003- 04 में जिंबाब्वे और केन्या दौरे के लिए भारतीय ‘ए’ टीम में चुना गया. इस दौरे पर उन्होंने विकेट कीपर के तौर पर 7 कैच और 4 स्टंपिंग की. बल्लेबाजी करते हुए धोनी ने 7 मैचों में 362 रन बनाए. धोनी के इस शानदार प्रदर्शन को देखते हुए तत्कालीन भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने उन्हें टीम में लेने की सलाह दी. 2004 में धोनी को पहली बार भारतीय टीम में जगह मिली. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. रोज नए कीर्तिमान गढ़ते चले गए.

कप्तान के तौर पर जीता विश्व कप

सितंबर 2007 में धोनी पहली बार भारत की ट्वेंटी-20 टीम के कप्तान बने. फिर उसी साल वनडे टीम की भी कप्तानी मिली. साल 2008 में धोनी टेस्ट टीम के भी कप्तान बने. धोनी की कप्तानी में भारत ने 2007 में 20-20 विश्व कप, साल 2011 में वनडे विश्व कप का खिताब जीता. आईपीएल में उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स को साल 2010, 2011 और 2018 में खिताब दिलाया.

 

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2014 में लिया टेस्ट मैच से संन्यास

30 दिसंबर 2014 को ऑस्ट्रेलिया के साथ ड्रॉ हुए तीसरे टेस्ट मैच के बाद धोनी ने टेस्ट मैच से संन्यास की घोषणा कर दी. धोनी ने 90 टेस्ट मैचों में 4,876 रन बनाए. 60 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी करते हुए उन्होंने 27 में जीत दिलाई. धोनी के नेतृत्व में विदेश में खेले गए 30 टेस्ट में भारतीय टीम को केवल छह जीतें मिलीं. 15 में उसे हार मिली. अब धोनी क्रिकेट को पूरी तरह अलविदा कहने वाले हैं.
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