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BCCI अध्यक्ष बनते ही सौरव गांगुली के सामने हैं ये 5 बड़ी चुनौतियां

News18Hindi
Updated: October 24, 2019, 6:37 AM IST
BCCI अध्यक्ष बनते ही सौरव गांगुली के सामने हैं ये 5 बड़ी चुनौतियां
सौरव गांगुली नौ महीने तक बीसीसीआई के अध्यक्ष पद पर रहेंगे

सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) के सामने खिलाड़ियों के हितों के साथ ही बीसीसीआई की छवि सुधारने की भी चुनौती है

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  • Last Updated: October 24, 2019, 6:37 AM IST
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नई दिल्ली. बीसीसीआई (BCCI) को आखिरकार लंबे इंतजार के बाद बॉस मिल ही गया. पूर्व दिग्गज कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने बुधवार को बीसीसीआई अध्यक्ष पद संभाल लिया. क्रिकेट जगत में दादा के नाम से मशहूर गांगुली के सामने वैसे तो बीसीसीआई ‌की छवि सुधारने सहित कई चुनौतियां हैं, जिसे नौ माह के कार्यकाल में उन्हें पार करना होगा. इनमें से पांच चुनौती उनके सामने सबसे बड़ी हैं.

आईसीसी में भारत की स्थिति : यह किसी से छिपा नहीं है कि आईसीसी (ICC) में भारत का रुतबा घटा है और आईसीसी के नए कार्यसमूह में बीसीसीआई का कोई प्रतिनिधि नहीं है. बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन (N Srinivasan) के विश्वासपात्र सुंदर रमन द्वारा तैयार किए गए ‘बिग थ्री मॉडल’ (इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और भारत) के तहत भारत को आईसीसी के राजस्व आवंटन मॉडल में से 57 करोड़ डॉलर मिलने थे.

शशांक मनोहर (Shashank Manohar) के आने के बाद हालांकि भारत बिग थ्री मॉडल पर सहमति नहीं बना सका और उसे 2016- 2023 सत्र के लिए 29 करोड़ 30 लाख डॉलर से ही संतोष करना पड़ा जो इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड से 15 करोड़ अधिक है. सौरव गांगुली को बीसीसीआई प्रतिनिधि के तौर पर आईसीसी से बात करनी होगी. गांगुली ने प्रेस कांफ्रेंस में भी 37 करोड़ 20 लाख डॉलर मिलने की बात कही. वैसे अगर एन श्रीनिवासन या सुंदर रमन बीसीसीआई प्रतिनिधि के तौर पर आईसीसी में जाते हैं और बीसीसीआई के पास मत नहीं होते तो टकराव की स्थिति बन सकती है.

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सौरव गांगुली बीसीसीआई अध्यक्ष तो अमित शाह के बेटे जय शाह सचिव बने.


आईसीसी टूर्नामेंटों को भारत में कर छूट : गांगुली को बीसीसीआई  (BCCI)  की कानूनी और वित्तीय टीमों से पूरा सहयोग चाहिए होगा, क्योंकि आईसीसी भारत में सभी टूर्नामेंटों के लिए कर में छूट चाहती है. मनोहर ने यह भी चेतावनी दी है कि करों का सारा बोझ बीसीसीआई के सालाना राजस्व पर पड़ेगा. इसका हल यह निकल सकता है कि आईसीसी के प्रसारक स्टार स्पोटर्स को कर का बोझ वहन करने को कहा जाएगा, जिसका भारत में पूरा बुनियादी ढांचा है और उसे प्रोडक्शन उपकरण आयात नहीं करने होंगे.

घरेलू क्रिकेटरों को भुगतान : भारतीय क्रिकेट के बरसों पुराने इस मसले को गांगुली ने प्राथमिकता बताया है. फिलहाल प्रथम श्रेणी क्रिकेटर को एक लाख 40 हजार रुपये प्रति मैच मिलता है. सत्र के आखिर में बीसीसीआई (BCCI) अपने सालाना सकल राजस्व का 13 प्रतिशत ही उन्हें बांटता है. एक सत्र में एक घरेलू क्रिकेटर को 25 लाख रुपये मिल जाते हैं जो चार दिवसीय, लिस्ट ए और टी20 मैच खेलता है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों की कमाई कहीं ज्यादा है. उन्हें एक टेस्ट के 15 लाख रुपये, वनडे के आठ लाख और टी20 के चार लाख रुपये मिलते हैं. इसके अलावा 20 क्रिकेटरों के सालाना केंद्रीय अनुबंध भी हैं.

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सौरव गांगुली के सामने सबसे बड़ी चुनौती आईसीसी में भारत का रुतबे बढ़ाने पर है

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घरेलू ढांचा : देवधर ट्रॉफी, रणजी ट्रॉफी का ढांचा और अंपायरिंग का स्तर. टूर्नामेंटों की संख्या में कटौती और प्रथम श्रेणी क्रिकेट के लिए बेहतर पिचें भी बीसीसीआई के नए अध्यक्ष के सामने चुनौती होंगी.

हितों का टकराव : गांगुली खुद इसे भुगत चुके हैं और अपने साथी सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) और वीवीएस लक्ष्मण को भी इस विवाद का सामना करते देखा है. इस नियम के तहत एक व्यक्ति एक ही पद संभाल सकता है. इससे क्रिकेट सलाहकार समिति और राष्ट्रीय चयन समिति में अच्छे क्रिकेटरों को लाने के विकल्प कम हो जाएंगे. (PTI इनपुट के साथ)

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First published: October 24, 2019, 5:45 AM IST
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