सहवाग की तरह गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने वाले बल्लेबाज कैसे बन गए डेविड वॉर्नर, जानिए कैसे बदला करियर?

सहवाग की तरह गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने वाले बल्लेबाज कैसे बन गए डेविड वॉर्नर, जानिए कैसे बदला करियर?
स्मिथ को अभ्यास के दौरान बल्लेबाजी करना उतना ही पसंद है जितना मैच के दौरान होता है. उन्होंने हालांकि पिछले दो महीने में अपने बल्ले को छुआ तक नही. स्मिथ ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान मिले समय में उन्होंने शारीरिक और मानसिक फिटनेस पर ध्यान केंद्रित किया.

डेविड वॉर्नर (David Warner) मौजूदा दौर के सबसे विस्फोटक ओपनर माने जाते हैं. ये कंगारू बल्लेबाज अब 43 इंटरनेशनल शतक ठोक चुका है

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नई दिल्ली. डेविड वॉर्नर...जिन्हें पॉकेट डाइनामाइट कहा जाता है. बेखौफ, निडर...ठीक उसी तरह जैसे वीरेंद्र सहवाग थे. बाएं हाथ का ये ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज (David Warner) दुनिया के किसी भी गेंदबाजी अटैक की धज्जियां उड़ाने का माद्दा रखता है. आज वर्ल्ड क्रिकेट में वॉर्नर से विस्फोटक ओपनर कोई नहीं. डेविड वॉर्नर ने अपने इंटरनेशनल करियर में 43 शतक ठोक दिये हैं. उनके नाम टेस्ट में 24 शतकों की मदद से 7244, वनडे में 18 शतकों की मदद से 5267 और टी20 में 1 शतक और 17 अर्धशतकों की मदद से 2207 रन हैं. मतलब फॉर्मेट कोई भी हो, डेविड वॉर्नर का बल्ला रनों की बारिश करना नहीं छोड़ता. अब सवाल ये है कि डेविड वॉर्नर क्या शुरुआत से ऐसी ही बल्लेबाजी करते थे? इसका जवाब हां भी है और नां भी. दरअसल वॉर्नर आज जो कुछ भी हैं उसकी वजह उनकी जिंदगी में घटित हुई 2 घटनाएं हैं. मतलब वॉर्नर की जिंदगी के वो टर्निंग प्वाइंट, जिन्होंने इस बल्लेबाज का करियर बदल दिया.

डेविड वॉर्नर ने मानी मां की बात
डेविड वॉर्नर (David Warner) का जन्म 27 अक्टूबर, 1986 को न्यू साउथ वेल्स के पैडिंग्टन में हुआ था. वॉर्नर बचपन से ही बेमिसाल क्रिकेटर थे. गजब की बात ये थी कि वॉर्नर दाएं हाथ से भी बल्लेबाजी कर सकते थे और बाएं हाथ से भी. वॉर्नर की जिंदगी में उस वक्त दुविधा पैदा हुई जब वो 13 साल के थे. दरअसल कोच ने वॉर्नर को दाएं हाथ से बल्लेबाजी करने के लिए कहा, क्योंकि वो हर गेंद को हवा में खेलते थे. वॉर्नर ने पूरा सीजन दाएं हाथ से खेला और वो कुछ खास नहीं रहा. इसके बाद उनकी मां शीला वॉर्नर ने अपने बेटे को एक बार फिर से बाएं हाथ से ही बल्लेबाजी करने की सलाह दी. मां की बात वॉर्नर ने मानी और उन्होंने सिडनी में तहलका मचा दिया. सिडनी कोस्टल क्लब के लिए वॉर्नर ने रिकॉर्ड तोड़ पारियां खेली और 15 साल की उम्र में उन्होंने ईस्टर्न सबर्ब्स के लिए फर्स्ट ग्रेड डेब्यू किया. बाद में उनका चयन ऑस्ट्रेलिया की अंडर 19 टीम में भी हुआ.

डेविड वॉर्नर के करियर का सबसे बड़ा बदलाव
डेविड वॉर्नर (David Warner) ने 5 जनवरी 2007 को न्यू साउथ वेल्स के लिए टी20 मैच में डेब्यू किया. आपको यकीन नहीं होगा कि वॉर्नर नंबर 6 पर बल्लेबाजी करने उतरे और उन्होंने 11 गेंदों में 20 रनों की पारी खेली. आपको बता दें डेविड वॉर्नर ने बतौर लेग स्पिनर डेब्यू किया था जो कि आखिर में बड़े-बड़े शॉट भी लगा लेता था. मतलब वॉर्नर को एक पार्ट टाइम बल्लेबाज समझा जाता था. हालांकि साल 2008 में उनके साथ कुछ ऐसा हुआ कि जिसे वो कभी नहीं भूल पाएंगे. साल 2008 में वो न्यू साउथ वेल्स के लिए मैच खेल रहे थे. पहली पारी खत्म हुई और वो ड्रेसिंग रूम में गेंदबाजी करने के बाद बैठ गए. अब चूंकि वॉर्नर मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज थे तो वो आराम से बैठे, लेकिन तभी अचानक उन्हें न्यूज साउथ वेल्स के कप्तान डोमिनिक थॉर्नली ने ओपनिंग के लिए कह दिया. वॉर्नर को समझ नहीं आया ये हुआ क्या लेकिन वो ओपनिंग करने चले गए.





वॉर्नर का तूफान
तस्मानिया के खिलाफ सिडनी के मैदान पर वॉर्नर (David Warner) ने सभी गेंदबाजों की जैसे धज्जियां उड़ा दी. वॉर्नर ने अपने लिस्ट ए करियर का पहला शतक ठोक दिया. वॉर्नर ने 112 गेंदों में 165 रनों की धुआंधार पारी खेली. इसके अगले ही मैच में वॉर्नर ने तस्मानिया के खिलाफ महज 54 गेंदों में 97 रन ठोक डाले. वॉर्नर की इन दो पारियों ने उन्हें पूरे ऑस्ट्रेलिया में मशहूर कर दिया. ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के चयनकर्ताओं ने भी देर नहीं की और साउथ अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए वॉर्नर का चयन कर लिया गया. वॉर्नर ने अपना इंटरनेशनल डेब्यू मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर किया जहां उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ महज 43 गेंदों में 89 रनों की पारी खेल डाली. साउथ अफ्रीका के पास एंटिनी, सोतसोबे और डेल स्टेन जैसे बड़े गेंदबाज थे लेकिन वॉर्नर के आगे किसी की नहीं चली. वॉर्नर की आक्रामकता ने उन्हें एक नई पहचान दी और बाएं हाथ का ये बल्लेबाज आज भी वर्ल्ड क्रिकेट पर राज कर रहा है.

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