क्या पंटर ने पलट दी मुंबई की किस्मत?

मुंबई इंडियंस की टीम ने सिर्फ 2 हफ्ते के भीतर ऐसा तख्ता पलट किया जिसकी उम्मीद उनके बड़े से बड़े फैंस को भी नहीं रही होगी।

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नई दिल्ली। मुंबई इंडियंस की टीम ने सिर्फ 2 हफ्ते के भीतर ऐसा तख्ता पलट किया जिसकी उम्मीद उनके बड़े से बड़े फैंस को भी नहीं रही होगी। अप्रैल का महीना जब खत्म हुआ तो आईपीएल में आधे मैच पूरे हो चुके थे। मुंबई की टीम और पंजाब की टीम में सिर्फ एक पायदान का अंतर था। चेन्नई और राजस्थान नंबर 1 और 2 पर काबिज थे। और नीचे से पंजाब और मुंबई की टीमों की उम्मीदें टूर्नामेंट से लगभग खत्म हो चुकी थी। विशेषज्ञ भी हैरान है कि जिस टीम के लिए रविवार से पहले तक प्ले ऑप में खेलना मुमकिन नहीं दिख रहा था वह टीम टॉप 2 में जगह बनाने में आखिर कैसे कामयाब हो गई ?



मुंबई के पास हमेशा से ही एक से बढ़कर एक धुरंधर ओपनर रहें हैं लेकिन इतिहास गवाह है कि रिकी पोटिंग, सनथ जयसूर्या, हर्शेल गिब्स और यहां तक की सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज होने के बावजूद यह टीम एक भी कामयाब ओपनिंग जोड़ी बनाने में नाकामयाब रही हैं। इस सीज़न भी मुंबई ने एक बार फिर से वही गलती की। रोहित शर्मा को कभी ओपनर तो कभी मिड्ल ऑर्डर में भेजने की हिचकिचाहट ने टीम की रणनीति पर बुरा असर डाला। लेकिन, कोच रिकी पोटिंग ने जल्द ही समझ लिया कि लेडिंल सिमंस और पार्थिव पटेल ही इस भूमिका के लिए सबसे बेहतरीन थे।



जगदीश सुचित और हार्दिक पंड्या, ये दो नाम ऐसे हैं जिसे आईपीएल तो दूर, फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी शायद ही किसी ने इससे पहले सुना हो। मैसूर के 21 साल के सुचित ने अब तक एक भी फर्स्ट क्लास मैच नहीं खेला है। लेकिन लेफ्ट ऑर्म स्पिनर के तौर पर उन्होंने इस बार प्रज्ञान ओझा जैसे अनुभवी खिलाड़ी को मुंबई इंडियंस की प्लेइंग इलेवन से लगातार बाहर रखा।





टीम इंडिया का भविष्य माने जाने वाले दिल्ली के उन्मुक्त चंद आधे दर्जन मैचों के बाद भी छाप छोड़ने में नाकाम रहे तो पोटिंग ने उस खिलाड़ी पर दांव खेला जिसे पहली बार देखकर ही वो उनके मुरीद बन गये। वडोदरा के हार्दिक पांड्या ने सिर्फ 6 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं। लेकिन उनकी दिलेरी ने मुंबई इंडियंस की टीम में एक नया आत्मविश्वास भरा। पांड्या की एक बेहतरीन पारी के चलते चेन्नई जैसी टीम को अपने ही घर में 2 साल में पहली बार हार का सामना करना पड़ा।
हरभजन सिंह और लासिथ मलिंगा अपने करियर के ढलान पर है और शुरुआती मैचों में ये दोनों दिग्गज अपनी साख़ के साथ न्याय करने में नाकाम भी रहे। लेकिन, सचिन तेंदुलकर और अनिल कुंबले की सलाह ने टीम मैनेजमेंट को भरोसा दिया कि ये दोनों खिलाड़ी मुंबई की किस्मत बदलेंगे और वाकई ऐसा ही हुआ।
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