इयान चैपल ने कहा- सचिन की चेन्नई की पारी को जान-समझे लें, कोरोना से जीत जाएंगे

इयान चैपल ने कहा- सचिन की चेन्नई की पारी को जान-समझे लें, कोरोना से जीत जाएंगे
सचिन तेंदुलकर और शेन वॉर्न की मैदानी प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है.

मौजूदा वक्त दुनिया की परीक्षा ले रहा है. लोगों से कोविड-19 (Covid-19) से निपटने के लिए वही सब करने को कहा जा रहा है, जो एक कामयाब खिलाड़ी करता है.

  • News18India
  • Last Updated: April 13, 2020, 7:03 AM IST
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नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान इयान चैपल ने कोरोनावायरस (Coronavirus) प्रभावित इस वक्त को टेस्टिंग टाइम करार दिया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा वक्त दुनियाभर के लोगों की परीक्षा ले रहा है. ऐसे में खिलाड़ियों का जीवन सभी के लिए प्रेरक हो सकता है. आज कोविड-19 (Covid-19) से निपटने के लिए लोगों से वही सब करने को कहा जा रहा है, जो एक कामयाब खिलाड़ी करता है. लोगों से धैर्य व दृढ़ संकल्प बनाए रखने और थोड़ी पहल करने को कहा जा रहा है. यही तो टेस्ट क्रिकेट में कामयाब होने के गुण हैं. इस पूरी बात को समझाने के लिए दो पारियां देखी जा सकती हैं.

इयान चैपल (Ian Chappel) अंग्रेजी वेबसाइट क्रिकइंफो में अपने कॉलम में लिखते हैं कि 1998 में चेन्नई टेस्ट में सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरी पारी में 155 रन रन बनाए. उनकी शानदार पारी की बदौलत भारत टेस्ट जीता. लेकिन यह जीत सचिन की पहल के बिना नहीं मिली होती. सचिन ने इस मैच से पहले पूर्व ऑलराउंडर रवि शास्त्री से पूछा कि अगर वे शेन वॉर्न उन्हें राउंड द विकेट रफ पर गेंदबाज़ी करते तो वे क्या करते. शास्त्री का जवाब था, ‘मैं लंबा हूं. मेरे पैर आगे बढ़ाकर डिफेंस करता. छोटा कद होने के कारण आप ऐसा नहीं कर सकते. आपके पैर उतने आगे तक नहीं जा पाएंगे. इसलिए आपको तुम्हें अटैकिंग गेम खेलना चाहिए.’

इस सलाह के बाद, तेंदुलकर ने एमएआएफ एकेडमी के नेट्स में समय बिताया. वहां उन्होंने पूर्व लेग स्पिनर लक्ष्मण शिवरामाकृष्णन को बुलाकर उसी रफ पर गेंदबाजी कराई और पैडल स्वीप का अभ्यास किया. तेंदुलकर ने इसके बाद चेन्नई टेस्ट में इसी तरीके से वॉर्न की खूब पिटाई की और भारत ने मैच जीता. यह पारी तेंदुलकर के दृढ़ संकल्प और पहल की बदौलत आई थी. अपनी इन खूबियों की बदौलत उन्होंने टर्निंग पिच पर भी वॉर्न को मात दे दी थी.



इयान चैपल कहते हैं कि दूसरी पारी जो उनके लिए धैर्य और दृढ़ संकल्प को उजागर करती है, वह ऑस्ट्रेलियाई ओपनर इयान रेडपथ (Ian Redpath) ने 1976 में मेलबर्न में खेली थी. जनवरी में वेस्टइंडीज के खिलाफ जब यह मैच खेला गया तो तेज गर्मी थी. तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा था. इयान रेडपाथ का कद 184 सेमी था. साथी खिलाड़ी उनसे मजाक कर रहे थे कि कैरेबियाई गेंदबाजों के बाउंसर उनके सिर तक पहुंचेंगे ही नहीं. इसलिए वे चिंता ना करें. आराम से खेलें.
रेडपाथ जब बैटिंग करने उतरे तो सबकी तरह उन्हें भी बाउंसरों का सामना करना पड़ा. लंबा कद होने के कारण उन्हें डक करने में ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही थी. लेकिन उन्होंने आपा नहीं खोया. वे धैर्यपूर्वक खेलते रहे और पहली पारी में शतक लगाया. इसके बाद दूसरी पारी में 70 रन बनाए. ऑस्ट्रेलिया ने मैच जीता.

इयान रेडपथ ने मैन ऑफ द मैच का अवॉर्ड जीता. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह थी कि उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में अपने धैर्य और दृढ़ संकल्प से खेल का रुख बदला. सचिन की पहल व दृढ़संकल्प और रेडपथ के धैर्य व साहस को मिलाएं तो वे सारे गुण समाहित हो जाते हैं, जो कोरोना की महामारी से बचने के लिए आवश्यक हैं.

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