नस्‍लवाद पर बोले चैपल, कहा- मैंने कोई भेदभाव नहीं देखा, पहले विदेश दौरे पर खुली थी आंखें

नस्‍लवाद पर बोले चैपल, कहा- मैंने कोई भेदभाव नहीं देखा, पहले विदेश दौरे पर खुली थी आंखें
इयान चैपल ने कहा कि जब वह कप्तान थे तो उन्होंने उस तरह के वाक्यों पर रोक लगा दी थी

चैपल ने कहा कि वह एक ऐसे परिवार में बड़े हुए, जहां उन्‍होंने कोई भेदभाव नहीं देखा था और केपटाउन के उन्‍हें इस गंदी चीज का पता चला

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मेलबर्न. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान इयान चैपल (Ian Chappell) ने नस्लवाद के मुद्दे पर अपने अनुभवों को याद किया और ऐसे समय के बारे में बताया जब उनके साथी खिलाड़ियों के साथ भेदभाव और दुर्व्यवहार किया जाता था. अमेरिका में अफ्रीकी-अमेरिकी जार्ज फ्लॉयड की श्वेत पुलिस अधिकारी के हाथों हुई मौत के बाद नस्लवाद इस समय वैश्विक मुद्दा बना हुआ है. कई क्रिकटर्स जैसे वेस्टइंडीज के स्टार क्रिस गेल और डेरेन सैमी ने अपने अनुभवों का खुलासा किया और वे ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ अभियान का समर्थन कर रहे हैं.
चैपल ने क्रिकइंफों में लिखे अपने एक आर्टिकल में कहा कि मौजूदा समय में नस्लवाद काफी अहम भूमिका निभा रहा है, क्रिकेट के अंदर और बाहर इस पक्षपात के मेरे अनुभव को बताना सही है. चैपल नस्लवाद से तब वाकिफ हुए जब उन्होंने क्रिकेट के लिए यात्रा करना शुरू किया. उन्होंने कहा कि मैं ऐसे परिवार में बड़ा हो रहा था जहां बतौर युवा मैंने कोई भेदभाव नहीं देखा था, जबकि वह श्वेत ऑस्ट्रेलियाई नीति का युग था. मैं सचमुच नस्लवाद के बारे में वाकिफ नहीं था.

चैपल ने लिखा कि मेरा पहला विदेशी दौरा 1966-67 में था और यह मेरे लिए आंखे खोलने वाला था. तब सत्ता में रंगभेद करने वाला शासन था और केप टाउन में दूसरा टेस्ट जीतने के बाद ही हमें इस घिनौनी चीज का पता चला. उन्होंने कहा कि आपने गैरी सोबर्स को क्यों नहीं चुना? पूरी टीम अश्वेत खिलाड़ियों से भरी थी और ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ग्राहम थॉमस पर टीम होटल में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई. थॉमस की अमेरिकी वंशावली उस समय की है जब गुलामी के दिन हुआ करते थे.

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अश्‍वेत शब्‍द पर ही लगा दी रोक
चैपल ने कहा कि जब वह कप्तान थे तो उन्होंने उस तरह के वाक्यों पर रोक लगा दी थी, जिसमें अश्वेत होता. उन्होंने कहा कि 1972-73 में मैंने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों से बात की, जब हमें पाकिस्तान के खिलाफ घरेलू श्रृंखला के बाद कैरेबियाई सरजमीं का दौरा करना था. मैंने उन्हें चेताया कि अगर अश्वेत शब्द का कोई भी वाक्य इस्तेमाल किया गया तो परेशानी होगी. चैपल ने कहा कि मैंने उन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों से इस तरह की कोई भी टिप्पणी नहीं सुनी. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वेस्टइंडीज के महान खिलाड़ी विव रिचर्ड्स ने एक बार ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के नस्लीय टिप्पणी करने की बात बताई थी, लेकिन बाद में आश्वस्त किया था कि यह मामला सुलझ गया था. उन्होंने कहा कि यह घटना 1975-76 में हुई श्रृंखला में हुई थी.
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