ICC World Cup: मां की शर्त के चलते गेंदबाजी के 'अर्जुन' बने जसप्रीत बुमराह

12 साल की उम्र में चिलचिलाती धूप में बुमराह घर से बाहर जाना नहीं चाहते थे और अंदर खेलने पर मां की नींद भी खराब हो रही थी

News18Hindi
Updated: June 23, 2019, 12:10 PM IST
ICC World Cup: मां की शर्त के चलते गेंदबाजी के 'अर्जुन' बने जसप्रीत बुमराह
गुजरात के अहमदाबाद में 6 दिसंबर 1993 को जन्मे जसप्रीत बुमराह की जिंदगी आसान नहीं थी.
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Updated: June 23, 2019, 12:10 PM IST
शुरुआती ‌ओवरों में विकेट निकालने की भूमिका तो डेथ ओवरों में रन रोकने में महारथ. कुछ ऐसा ही है जसप्रीत बुमराह का परिचय. मगर कम ही लोग जानते हैं कि बुमराह ने यॉर्कर का अभ्यास दीवार और जमीन के कोने में गेंद फेंककर किया. वो भी मां द्वारा घर में खेलना जारी रखने के लिए रखी गई शर्त का तोड़ निकालने के लिए.

गुजरात के अहमदाबाद में 6 दिसंबर 1993 को जन्मे जसप्रीत बुमराह की जिंदगी आसान नहीं थी. बुमराह तब 7 साल के ही थे जब उनके पिता जसबीर सिंह की हेपेटाइटिस बी के चलते मौत हो गई. बेटी जुहिका और बेटे जसप्रीत की जिम्मेदारी मां दलजीत पर आ पड़ी, जो पेशे से टीचर थीं.

मां ने रख दी थी शर्त
बुमराह तब महज 12 साल के थे. दोपहर का वक्त था और मां दलजीत सोने की कोशिश कर रही थीं. बाहर चिलचिलाती धूप के चलते जसप्रीत घर में दीवार पर गेंद फेंककर गेंदबाजी कर रहे थे. मां की नींद में खलल पड़ रहा था तो घर में खेलना जारी रखने के लिए एक शर्त रख दी. शर्त यह थी कि अगर बुमराह गेंदबाजी करते वक्त गेंद की आवाज धीमी रखने में सफल रहे तो ही घर में खेल सकते हैं.

तब बुमराह ने सोचा कि जहां दीवार और फर्श मिलते हैं, उस हिस्से पर गेंद टकराने की आवाज बेहद कम होती है. बस फिर क्या था. बुमराह ने उसी हिस्से पर गेंद फेंकना शुरू कर दिया और इस तरह यॉर्कर गेंदों का उनका अभ्यास भी शुरू हो गया. मां दलजीत खुश थीं कि अब वे चैन की नींद सो सकती थीं और बेटा जसप्रीत इसलिए फूला नहीं समा रहा था कि अब वह घर में खेलना जारी रख सकता था.

14 साल की उम्र में मां को बताया सपना


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दो साल तक केवल मनोरंजन के लिए क्रिकेट खेलते रहे बुमराह 14 साल की उम्र में एक दिन मां के पास आए और कहा, मैं क्रिकेटर बनना चाहता हूं. मां हैरान रह गईं. बहुत समझाया कि हर कोई क्रिकेट खेल रहा है, ये आसान नहीं है. बुमराह बोले-मुझमें विश्वास रखिए. मां मना नहीं कर पाईं. आखिर एक टीचर के तौर पर स्कूल में वो भी हर अभिभावक से यही तो कहती थीं कि हर बच्चे का एक सपना होता है और हमें उन्हें पूरा करने का एक मौका देना चाहिए. इसके बाद बुमराह की मेहनत देखकर मां दलजीत भी दंग रह गईं. बुमराह तड़के प्रैक्टिस के लिए निकल जाते, फिर स्कूल पहुंचते और उसके बाद फिर प्रैक्टिस करते.

जल्द ही उन्हें गुजरात क्रिकेट संघ द्वारा आयोजित समर कैंप में चुना गया. फिर उसके बाद वे एमआरएफ पेस फाउंडेशन से भी जुड़े. कुछ वक्त बाद ही बुमराह राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के जोनल कैंप के लिए चुन लिए गए. यहां से उनके लिए आईपीएल में मुंबई इंडियंस का दरवाजा खुला और फिर बुमराह का नाम सभी की जुबां पर चढ़ गया.
First published: June 23, 2019, 9:30 AM IST
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