World Cup 2019: कैसे मिला इन 15 को वर्ल्ड कप जाने की टिकट... हम बताते हैं

World Cup 2019 (वर्ल्ड कप २०१९): बीसीसीआई ने सोमवार को 15 सदस्यीय भारतीय टीम का ऐलान किया है

News18Hindi
Updated: April 16, 2019, 12:48 PM IST
World Cup 2019:  कैसे मिला इन 15 को वर्ल्ड कप जाने की टिकट... हम बताते हैं
World Cup 2019 (वर्ल्ड कप २०१९): बीसीसीआई ने सोमवार को 15 सदस्यीय भारतीय टीम का ऐलान किया है
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Updated: April 16, 2019, 12:48 PM IST

क्रिकेट ऐसा खेल है, जहां टीम चुना जाना राष्ट्रीय मुद्दा होता है. वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया के चयन से कई रोज पहले से तमाम एक्सपर्ट और आम लोग अपनी-अपनी टीम बता रहे थे. टीम अनाउंस होने के बाद सोशल मीडिया पर यह बताने की होड़ थी कि उन्होंने जो टीम सोची थी, वही टीम चुनी गई है. हम आपको बता रहे हैं कि आखिर यह टीम क्यों चुनी गई. इसमें ज्यादातर खिलाड़ियों को लेकर कोई संदेह नहीं था. उनको लेकर संदेह क्यों नहीं था और जिन्हें लेकर संदेह था, उन्हें क्यों दूसरों पर तरजीह मिली.


विराट कोहली (कप्तान)


पहला नाम विराट कोहली है. उनके कप्तान होने और टीम में होने को लेकर कोई संदेह कर ही नहीं सकता. 30 साल के विराट कोहली 227 वनडे खेल चुके हैं. 59.57 के औसत से 10843 रन बनाए हैं


महेंद्र सिंह धोनी



2015 का वर्ल्ड कप खत्म हुआ था, तो चर्चा इसी बात की थी कि शायद माही का यह आखिरी वर्ल्ड कप है. एक साल पहले भी कुछ लोगों ने कहा था कि धोनी का वक्त खत्म हो रहा है. खासतौर पर फिनिशर के रोल में उनके कमजोर पड़ने की वजह से. लेकिन उम्र में 38 के करीब पहुंच रहे धोनी के आसपास का कोई विकेट कीपर और थिंकर टीम इंडिया के पास नहीं है. वो कम से कम फील्डिंग के दौरान रणनीति बनाने में कप्तान विराट का सबसे बड़ा सहारा हैं. धोनी ने 50.72 के औसत से 10500 रन बनाए है. इस दौरान 10 शतक और 71 अर्धशतक लगाए हैं. यह धोनी का चौथा वर्ल्‍ड कप होगा.



रोहित शर्मा (उप-कप्तान)


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एक और ऐसा नाम, जिसके चुने जाने पर कोई संदेह नहीं था. 'हिटमैन' रोहित शर्मा दुनिया के विस्फोटक ओपनर माने जाते हैं. रोहित ने अब तक 47.39 के औसत से 8010 रन बनाए हैं.


शिखर धवन


2019 का साल या 2018-19 का सीजन शिखर के लिए पिछले कुछ समय में सबसे खराब रहा है. 2011 के बाद उनका औसत इतना कमजोर कभी नहीं रहा. 2011 में भी जब उन्होंने 17.25 के औसत से रन बनाए थे, तो मैच महज चार खेले थे. इस साल यानी 2019 में 35 के औसत से 13 मैचों में 420 रन हैं. इसके बावजूद वो चुने गए हैं, क्योंकि इस वक्त प्रयोग करने की मंशा किसी की नहीं हो सकती. हालांकि अनुभवी शिखर धवन ने दस मार्च को मोहाली में 143 रन का पारी खेलकर दिखाया कि उनका होना क्यों जरूरी है. धवन 128 वनडे मैचों में 44.62 के औसत से 5355 रन बना चुके हैं.


केएल राहुल


राहुल का टीम में होने के पीछे कई वजह हैं. एक तो वह ओपनर के तौर पर खेल सकते हैं. फिर नंबर चार की जगह भी भर सकते हैं. पार्ट टाइम विकेट कीपर भी हैं. अब तक उन्‍होंने 14 वनडे मैचों में 34.30 के औसत से 343 रन बनाए हैं.


दिनेश कार्तिक


सबसे ज्यादा चर्चा इसी नाम पर हुई है. 2007 के बाद दो वर्ल्ड कप में उन्हें जगह नहीं मिली. अब ऋषभ पंत पर तरजीह मिली है. उन्हें चुने जाने की वजह कीपर के तौर पर पंत का प्रभावशाली प्रदर्शन न कर पाना है.



केदार जाधव


इंग्लैंड में जिस तरह के ऑलराउंडर की जरूरत होती है, जाधव उसमें फिट होते हैं. वो भी ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनका टीम में होना तय था. उन्होंने 59 वनडे मैचों में 43.48 के औसत से 1174 रन बनाए हैं.


हार्दिक पांड्या


इंग्लिश कंडीशन के लिए एक और परफेक्ट खिलाड़ी. बल्ले और गेंद दोनों से प्रभावशाली. उनकी मीडियम पेस इंग्लैंड में काफी काम आ सकती है. उन्‍होंने 45 वनडे मैचों में 29 से अधिक की औसत से 731 रन बनाने के अलावा 39.72 के औसत से 44 वनडे विकेट भी लिए हैं.


जसप्रीत बुमराह


मौजूदा दौर में वह टीम इंडिया के सबसे भरोसेमंद गेंदबाज़. उन्हें दुनिया के बेहतरीन तेज गेंदबाजों में शुमार किया जाता है, जिनकी सबसे बड़ी ताकत डेथ ओवर में गेंदबाजी है. वह 49 वनडे में 22.15 के औसत से 85 विकेट ले चुके हैं.


युजवेंद्र चहल


इंग्लैंड में समर की शुरुआत होगी, ऐसे में स्पिनर्स हो सकता है कि उतने प्रभावशाली न हों. लेकिन युजवेंद्र चहल को अनदेखा करना नामुमकिन था. वह साउथ अफ्रीका और न्‍यूजीलैंड में टीम के लिए बेहद कारगर साबित हुए थे. उन्‍होंने अब तक 41 वनडे में 24.61 के औसत से 72 विकेट लिए हैं.


कुलदीप यादव


चाइनमैन गेंदबाज़ कुलदीप यादव को 44 वनडे मुकाबलों का अनुभव है और वह अब तक 21.74 के औसत से 87 विकेट ले चुके हैं. जबकि उन्‍होंने ऑस्‍ट्रेलिया, इंग्‍लैंड और साउथ अफ्रीका में दमदार प्रदर्शन किया है. यही वजह है कि उन्हें टीम में जगह मिली है.


मोहम्मद शमी


इंग्लैंड में तेज गेंदबाजों की कामयाबी भारत की कामयाबी के लिए बेहद अहम है. शमी बड़े मौके पर बड़ा प्रदर्शन कर चुके हैं. इस बार भी यही उम्मीद है. उनका भी होना तय था. दाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ शमी ने 63 वनडे मैचों में 113 विकेट लिए हैं. औसत 26.11 रहा है.



भुवनेश्वर कुमार


इंग्लैंड के विकेटों पर भुवनेश्वर कुमार की स्विंग बेहद कारगर और मारक साबित हो सकती है. ऐसे में उन्हें नजरअंदाज कर ही नहीं सकते थे. 29 साल के भुवी ने 105 वनडे मैचों में 35.66 के औसत से 118 विकेट लिए हैं.


रवींद्र जडेजा


जडेजा ऑलराउंड क्षमता की वजह से टीम में हैं. गेंदबाजी, बल्लेबाजी और फील्डिंग, तीनों में वो मैच का रुख बदल सकते हैं. उनका होना भी तय था. 30 साल के जडेजा ने 151 वनडे मैचों में 35.89 के औसत से 174 विकेट निकालने के अलावा 2035 रन (औसत 29.92) अपने नाम किए हैं.


विजय शंकर


सबसे ज्यादा चर्चा इसी नाम पर है. अंबाति रायडू को पीछे छोड़कर उन्हें लिए जाने के पीछे बड़ी वजह विजय शंकर का ऑलराउंडर होना है. उन्हें नंबर चार पर भी खिलाया जा सकता है. गेंदबाजी भी कराई जा सकती है. विजय ने अब तक 9 वनडे मैचों में 165 रन बनाने के अलावा दो विकेट लिए हैं.

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