पाक खिलाड़ी ने कहा- डेविड वॉर्नर अगर पाकिस्तान में हाेते तो टेस्ट टीम से बाहर होते, वजह रोचक

डेविड वॉर्नर ने टेस्ट में तिहरा शतक भी लगाया है. (PTI)

डेविड वॉर्नर ने टेस्ट में तिहरा शतक भी लगाया है. (PTI)

पाकिस्तान के बल्लेबाज शोएब मकसूद (Sohaib Maqsood) ने टीम मैनेजमेंट को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब तेज रन बनाने वाले खिलाड़ी को टेस्ट लायक नहीं समझा जाता था.

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नई दिल्ली. डेविड वॉर्नर ऑस्ट्रेलियाई टीम के मुख्य खिलाड़ियों में से एक हैं. वे बतौर ओपनर कई बार टेस्ट में विजयी पारी भी खेल चुके हैं. लेकिन पाकिस्तान के बल्लेबाज शोएब मकसूद का मानना है कि डेविड वॉर्नर अगर पाकिस्तान में होते तो उनको टेस्ट खेलने के लिए टीम में शामिल नहीं किया जाता. उन्होंने कहा कि पाक में तेज रन बनाने वाले खिलाड़ी को टेस्ट क्रिकेट के लायक नहीं समझा जाता था.

शोएब मकसूद ने पाकिस्तान टीम मैनेजमेंट की मानसिकता पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट इतिहास में एक समय ऐसा था, जब तेज स्कोर करने वाले बल्लेबाजों को टेस्ट के लिए योग्य नहीं माना जाता था. 34 वर्षीय शोएब ने खुलासा किया कि उनका टेस्ट करियर कभी आगे नहीं, बढ़ा क्योंकि पाकिस्तान में एक मानसिकता थी कि तेज स्कोर करने वाले बल्लेबाजों को उन्हें केवल वनडे और टी20 क्रिकेट तक ही सीमित रखना चाहिए.

लिस्ट ए में मेरा औसत 50 के आस-पास था

पाकिस्तान के शोएब मकसूद ने कहा कि मैं चार दिवसीय क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाला खिलाड़ी था. उस समय फर्स्ट क्लास और लिस्ट ए क्रिकेट में मेरा औसत 50 के आस-पास था. जैसा कि मैंने कहा कि पाकिस्तान में एक समय में एक संस्कृति थी कि अगर कोई खिलाड़ी जल्दी स्कोर करता है, तो वह केवल वनडे और टी20 के लिए उपयुक्त है. वीरेंद्र सहवाग एक उदाहरण हैं. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि अगर डेविड वॉर्नर यहां पाकिस्तान में होते, तो उस समय टेस्ट क्रिकेट के लिए उनके नाम पर विचार नहीं किया जाता.
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पोलार्ड और रसेल बनने के कारण सफल नहीं हुआ

अपने करियर को लेकर उन्होंने कहा कि जब मैं 2013 में आया था, तब वनडे और टेस्ट क्रिकेट दिमाग में था. लेकिन अब ऐसा नहीं है. उस समय मैंने खुद को टी20 खिलाड़ी के तौर पर नहीं देखा था. उल्लेखनीय है कि मकसूद ने 26 वनडे और 20 टी20 मैचों में 735 और 221 रन बनाए. दाएं हाथ के इस खिलाड़ी ने खुलासा किया कि टेस्ट में तेज स्कोर वाले खिलाड़ियों को नहीं चुनने की मानसिकता ने उनके करियर में बाधा डाली, क्योंकि वह 2012-13 में घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे. उन्होंने कहा कि अगर मैं टेस्ट खेलता तो जैसा था, वैसा ही रहता है. लेकिन लिमिटेड ओवर क्रिकेट के कारण मैं कायरन पोलार्ड और आंद्रे रसेल बनने चला. लेकिन सफल नहीं हुआ. उन्होंने 2016 के बाद से कोई इंटरनेशनल मैच नहीं खेला है.

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