IND vs AUS 3rd Test: नवदीप सैनी की वो 3 बातें, जिसने उन्हें नटराजन-शार्दुल से रेस जिताई

भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन चुने जाने से पहले नवदीप सैनी, शार्दुल ठाकुर और टी नटराजन के बीच कड़ी टक्कर थी.

भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन चुने जाने से पहले नवदीप सैनी, शार्दुल ठाकुर और टी नटराजन के बीच कड़ी टक्कर थी.

भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें गुरुवार (7 जनवरी) से तीसरा टेस्ट मैच खेलेंगी. भारत की प्लेइंग इलेवन के लिए नवदीप सैनी, शार्दुल ठाकुर और टी नटराजन के बीच कड़ा मुकाबला था. अंतत: बाजी सैनी के हाथ लगी. नवदीप सैनी की कम से कम तीन बातें ऐसी रहीं, जो उनको नटराजन और शार्दुल से आगे खड़ा कर गईं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 6, 2021, 4:50 PM IST
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नई दिल्ली. भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2020-21 (Border-Gavaskar Trophy) में तीसरी बार दो-दो हाथ करने को तैयार हैं. दोनों टीमें गुरुवार (7 जनवरी) से सिडनी में टेस्ट मैच (Sydney Test) खेलेंगी. भारत और ऑस्ट्रेलिया (India vs Australia) दोनों ने ही अब तक खेली गई सीरीज में एक-एक मैच जीते हैं. ऐसे में तीसरा टेस्ट बेहद अहम हो गया है.

भारत ने सिडनी टेस्ट मैच के लिए एक दिन पहले ही अपनी प्लेइंग इलेवन जारी कर दी है. उम्मीद के मुताबिक रोहित शर्मा (Rohit Sharma) की टीम में वापसी हो गई. टी. नटराजन (T Natarajan) और शार्दुल ठाकुर (Shardul Thakur) प्लेइंग इलेवन में जगह बनाने में नाकाम रहे हैं. इन दोनों पर नवदीप सैनी (Navdeep Saini) को वरीयता दी गई है. अब सैनी सिडनी से अपने टेस्ट करियर का आगाज करेंगे.

प्लेइंग इलेवन चुने जाने से पहले ही यह साफ था कि रोहित शर्मा की वापसी होगी. लेकिन नवदीप सैनी, शार्दुल ठाकुर और टी नटराजन के बीच एक जगह के लिए मुकाबला था. तीनों में कड़ी टक्कर थी, जितने मुंह-उतनी बातें की तर्ज पर तीनों के ही पक्ष में खूब तर्क दिए गए. अंतत: बाजी सैनी के हाथ लगी.

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27 साल के नवदीप सैनी के पक्ष में कम से कम तीन बातें ऐसी रहीं, जो उनको नटराजन और शार्दुल से आगे खड़ा कर गईं. पहली बात यह कि सैनी बाकी दोनों गेंदबाजों के मुकाबले तेज हैं. उनकी गेंद ज्यादा उछाल लेती हैं. सिडनी के विकेट पर वे ज्यादा असरदार साबित हो सकते हैं. वैसे भी उनकी लाइन-लेंथ को सफेद गेंद के मुकाबले लाल गेंद में बेहतर माना जाता है.

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शार्दुल ठाकुर और टी नटराजन का हालिया प्रदर्शन भी अच्छा रहा है. लेकिन शार्दुल लगभग उसी शैली के गेंदबाज हैं जैसे मोहम्मद सिराज. शायद इसी कारण शार्दुल पर सैनी को वरीयता दी गई. नटराजन ने पिछले चार महीने में दिखाया कि उनकी सबसे बड़ी ताकत यॉर्कर है और टेस्ट मैचों में इस गेंद की जरूरत कम ही पड़ती है. सैनी ने साबित किया है कि वे एक लाइन-लेंथ पर लगातार गेंद कर सकते हैं. यही बात उनके पक्ष में गई.





नवदीप सैनी करीब डेढ़ साल से भारत-ए टीम का हिस्सा रहे हैं, वे इस दौरान कई देशों में फर्स्टक्लास मैच खेल चुके हैं. यानी, सैनी भले ही टेस्ट मैच नहीं खेले हैं, लेकिन सिर्फ रणजी ही नहीं, उनसे बेहतर मैचों का भी उन्हें अनुभव है. नटराजन यहां भी सैनी से पीछे रह गए. इसीलिए उनका टेस्ट कैप का इंतजार बढ़ गया है.
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