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IND vs ENG: क्या रोहित शर्मा टेस्ट में ओपनिंग करने का राज जान गए? आकाश चोपड़ा ने बताई हकीकत

IND vs ENG: रोहित शर्मा टेस्ट डेब्यू में शतक लगाने वाले 15वें भारतीय बल्लेबाज हैं. हालांकि, उन्होंने टेस्ट करियर का आगाज नंबर-6 बल्लेबाज के तौर पर किया था. (PC-AFP)

IND vs ENG: रोहित शर्मा टेस्ट डेब्यू में शतक लगाने वाले 15वें भारतीय बल्लेबाज हैं. हालांकि, उन्होंने टेस्ट करियर का आगाज नंबर-6 बल्लेबाज के तौर पर किया था. (PC-AFP)

IND vs ENG: इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट की सीरीज में टीम इंडिया के अच्छे प्रदर्शन के लिए रोहित शर्मा (Rohit Sharma) का बतौर सलामी बल्लेबाज सफल होना जरूरी है. बीते कुछ सालों में वो बतौर टेस्ट ओपनर भी सफल रहे हैं. हालांकि, पहले उन्हें इस रोल के लिए उपयुक्त नहीं समझा गया था. लेकिन बाद में उनकी बल्लेबाजी में ऐसा क्या बदलाव हुआ कि उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई. पूर्व ओपनर आकाश चोपड़ा (Aakash Chopra) ने इसका खुलासा किया है.

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    नई दिल्ली. भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टेस्ट की सीरीज (IND vs ENG Test Series) का आगाज 4 अगस्त से नॉटिंघम में होगा. इस सीरीज में टीम इंडिया के अच्छे प्रदर्शन के लिए रोहित शर्मा (Rohit Sharma) का बतौर सलामी बल्लेबाज सफल होना जरूरी है. बीते कुछ सालों में रोहित वनडे के साथ ही टेस्ट क्रिकेट में भी ओपनर की भूमिका में काफी हद तक कामयाब रहे हैं. अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वो उन 15 भारतीय बल्लेबाजों में शामिल हैं, जिसने अपने डेब्यू टेस्ट में शतक ठोका है.

    रोहित का अंतरराष्ट्रीय करियर तय रास्ते से अलग शुरू हुआ है. व्हाइट बॉल क्रिकेट में एक बल्लेबाज के तौर पर स्थापित होने के बाद उन्हें टेस्ट में मौका मिला है औऱ उन्होंने इस फॉर्मेट में भी शानदार आगाज किया. पहले दो टेस्ट में दो शतक एक बल्लेबाज के तौर पर उनकी काबिलियत का बड़ा सबूत हैं. उन्होंने ये दोनों शतक 6 नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए बनाए थे. लेकिन दुर्भाग्य से उनका टेस्ट करियर ऐसा नहीं रहा. वह बार-बार टीम से अंदर-बाहर होते रहे.

    रोहित से उनका टेस्ट करियर बचाने के लिए ओपनिंग कराई गई
    हकीकत में, वनडे की तरह रोहित से टेस्ट में भी ओपनिंग कराने का विचार लंबे फॉर्मेट में उनके करियर को बचाने के इरादे से ही किया गया था. किस्मत से टीम मैनेजमेंट का यह दांव चल गया. लेकिन सवाल यह उठता है कि पहले क्यों नहीं इसका इस्तेमाल किया गया?. और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि कैसे एक बल्लेबाज को ओपनर के रूप में इस्तेमाल किया गया, जिसे इस रोल के लिए फिट नहीं माना गया. पूर्व भारतीय ओपनर और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा (Aakash Chopra) ने इसका खुलासा किया है.

    रोहित को पहले क्यों ओपनिंग के लिए मौका नहीं दिया गया?
    आकाश ने ईएसपीएन क्रिकइंफो के अपने कॉलम में इस बात को समझाया है कि पहले रोहित को क्यों टेस्ट में ओपनिंग के लिए मिस फिट माना गया और बाद में उन्हें मौका मिला. आकाश ने कहा कि रोहित की बल्लेबाजी वाकई आकर्षक और असरदार है. लेकिन उनमें कई कमियां भी नजर आती है. बल्लेबाजी के दौरान रोहित के पैर ज्यादा नहीं हिलते हैं और वो गेंद तक पहुंचने की कोशिश करते हैं. फिर भी, क्या आप उन्हें इस तरह खेलने के लिए दोषी ठहरा सकते हैं?.

    उनके मुताबिक, व्हाइट बॉल क्रिकेट में आप तभी तेजी से रन बना सकते हैं, जब आप गेंद को दूर से खेलते हैं और आपको बल्ले को घुमाने का पूरा मौका मिलता है. वनडे में बहुत ज्यादा फुटवर्क का इस्तेमाल आपको धीमा कर देता है और अगर आप स्लो हैं तो फिर वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक नहीं लगा सकते हैं.

    रोहित को लंबे फॉर्मेट में ओपनिंग का अनुभव नहीं था: आकाश
    रोहित के वनडे में आउट होने के तरीके पर हमेशा ही सवाल खड़े होते रहे और इसका इस्तेमाल इस बात को साबित करने में हुआ कि रोहित की मानसिकता टेस्ट क्रिकेट लायक नहीं है और अगर मैं ईमानदारी से कहूं तो उस समय यह बात पूरी तरह गलत भी नहीं थी. इसी वजह से सेलेक्टर्स और टीम मैनेजमेंट उनसे टेस्ट में ओपिनिंग कराने से कतरा रही थी. इसकी एक वजह यह भी थी कि रोहित लगातार व्हाइट बॉल क्रिकेट खेल रहे थे और उनके पास फर्स्ट क्लास क्रिकेट में खेलने का समय ही नहीं था.

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    अब रोहित की बल्लेबाजी में क्या बदलाव आया?
    आकाश ने लिखा कि जब से रोहित ने टेस्ट क्रिकेट में ओपनिंग शुरू की है, तब से उनकी बल्लेबाजी में बड़ा बदलाव आया है. वो अब पैर ज्यादा आगे निकालकर बल्लेबाजी कर रहे हैं और शॉट खेलते वक्त उनके हाथ शरीर के करीब ही रहते हैं. यह अलग बात है कि वो विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में बड़ा स्कोर नहीं बना पाए थे. लेकिन उन्होंने दोनों पारियों में हालात के मुताबिक, अपने खेल में बदलाव लाने की ईमानदार कोशिश की.

    वो भले ही फ्रंट फुट काफी आगे निकालकर बल्लेबाजी कर रहे थे. लेकिन उन्होंने गेंद बाहर जाती गेंदों को छेड़ने की कोशिश नहीं की. उन्होंने फुल और शॉर्ट गेंद का इंतजार किया और उन्हीं गेंदों पर ही शॉट्स खेले.

    पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज के मुताबिक, विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप का फाइनल बतौर टेस्ट बल्लेबाज रोहित की सोच में हुए बदलाव से जुड़ी कोई अकेली घटना नहीं थी. इसी साल इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई टेस्ट में शतक और अहमदाबाद में फिफ्टी और 2019 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रांची टेस्ट में उनका दोहरा शतक भी उनके नजरिए में आए बदलाव से जुड़ा है.

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    रोहित का इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में होगा इम्तिहान
    उन्होंने आगे लिखा कि मैंने वास्तव में चेन्नई में रोहित की बल्लेबाजी का मजा उठाया था. यकीनन, चेपक की पिच पहले दिन के लिहाज से बल्लेबाजी के लिए काफी मुश्किल थी. रोहित जैसे टैलेंटेड बल्लेबाज के लिए इस मुश्किल से निकलने का अपना एक तरीका था और यह व्हाइट बॉल क्रिकेट में काफी असरदार भी रहा है. क्योंकि अगर गेंदबाज के खिलाफ वो छोटी सी लड़ाई जीत जाते तो युद्ध में आपकी जीत हो जाती.

    मुझे लगता है कि रोहित को टेस्ट क्रिकेट में खेलने का तरीका अब समझ आ गया है और इंग्लैंड के खिलाफ पांच और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन टेस्ट की सीरीज उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा होगी और अगर वो इस मिशन को पूरा करने में सफल होते हैं तो टेस्ट के पूरी तरह स्थापित बल्लेबाज हो जाएंगे.

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