IND vs ENG: जब अजित वाडेकर की कप्तानी में भारत ने इंग्लैंड में जीती पहली टेस्ट सीरीज, 39 साल करना पड़ा था इंतजार

IND vs ENG: भारत ने इंग्लैंड के घर में पहली टेस्ट सीरीज 1971 में जीती थी. तब अजित वाडेकर की कप्तानी में भारत को ये सफलता मिली थी. वाडेकर ने सीरीज में भारत की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाए थे. (File Photo)

IND vs ENG: भारत का इंग्लैंड में टेस्ट में प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा है. अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत को इंग्लैंड की जमीन पर पहली टेस्ट सीरीज जीत के लिए 39 साल का इंतजार करना पड़ा था. 1971 में भारत ने पहली बार इंग्लैंड को उसी के घर में टेस्ट में हराया था. तब अजित वाडेकर(Ajit Wadekar) की अगुवाई में भारत ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. इस सीरीज में बीएस चंद्रशेखर (BS Chandrashekhar), एस वेंकटराघवन (S Venkataraghavan) और बिशन सिंह बेदी (Bishan Singh Bedi) की स्पिन तिकड़ी ने कुल 37 विकेट झटके थे.

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    नई दिल्ली. भारत और इंग्लैंड( IND vs ENG 2021) के बीच 4 अगस्त से 5 टेस्ट की सीरीज खेली जाएगी. विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप का ताज गंवाने के बाद टीम इंडिया के पास अपनी खोई साख हासिल करने का ये बड़ा मौका है. इंग्लैंड में भारत का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं रहा है. टीम इंडिया(Team India) ने पिछली बार 2007 में यहां टेस्ट सीरीज जीती थी. इसके बाद भारत ने यहां तीनी सीरीज खेली और तीनों में ही उसे हार झेलनी पड़ी. ऐसे में अगले महीने होने वाली टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया के पास पिछली हार का हिसाब चुकता करने का मौका होगा. भारत ने इंग्लैंड में अब तक सिर्फ तीन ही टेस्ट सीरीज जीती है. इसका आगाज 1971 में हुआ था. तब अजित वाडेकर(Ajit Wadekar) की कप्तानी में भारत ने 39 साल बाद इंग्लैंड में सीरीज जीती थी.

    इंग्लैंड के खिलाफ ये टेस्ट सीरीज कई मायनों में खास थी. क्योंकि जून 1968 के बाद से 28 टेस्ट में यह पहला मौका था, जब इंग्लैंड को शिकस्त झेलनी पड़ी थी और यह भी पहली बार हुआ था कि भारत ने एक साल में दो सीरीज जीती थी. इससे पहले भारत ने वेस्टइंडीज को उसी के घर में पांच टेस्ट की सीरीज में हराया था. ये इंग्लैंड की 1971 में 14 टेस्ट के बाद पहली हार थी. इससे पहले उसने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 6, न्यूजीलैंड के खिलाफ 2 और पाकिस्तान-भारत से तीन-तीन टेस्ट की सीरीज खेली थी. तब इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को 2-0, न्यूजीलैंड को 1-0 और पाकिस्तान को भी इतने ही अंतर से सीरीज हराई थी. लेकिन भारत के हाथों उसे हार झेलनी पड़ी थी.

    भारतीय स्पिन तिकड़ी ने सीरीज में 37 विकेट झटके थे
    भारत को इंग्लैंड में पहली टेस्ट सीरीज जीत किसी एक खिलाड़ी के प्रदर्शन के दम पर नहीं मिली थी. इस सीरीज में हर खिलाड़ी ने अपना योगदान दिया था. वाडेकर कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों रोल में हिट साबित हुए थे. वो सीरीज में भारत की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज थे. उन्होंने तीन मैच में 4 के औसत से 204 रन बनाए थे. तो वेंकटराघवन, बिशन सिंह बेदी और बीएस चंद्रशेखर की स्पिन तिकड़ी ने भी जीत में अहम रोल निभाया था. इन तीनों स्पिन गेंदबाजों ने सीरीज के तीन टेस्ट में कुल 37 विकेट झटके थे.

    सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले शीर्ष-तीन गेंदबाजों में ये तीनों शामिल थे. वेंकटराघवन और चंद्रशेखर ने सीरीज में 13-13 विकेट झटके थे, जबकि बेदी के खाते में 11 विकेट आए थे. पूरी सीरीज में इंग्लिश बल्लेबाज भारतीय स्पिन तिकड़ी का तोड़ नहीं निकाल पाए.

    सीरीज के पहले दो टेस्ट ड्रॉ रहे थे
    भारत-इंग्लैंड के बीच हुई तीन टेस्ट की इस सीरीज की शुरुआत लॉर्ड्स से हुई थी. पहले टेस्ट में कप्तान अजित वाडेकर, गुंडप्पा विश्वनाथ और एकनाथ सोलकर ने बल्ले से कमाल दिखाया था तो वहीं बेदी, वेंकटराघवन और चंद्रशेखर की तिकड़ी ने गेंद से छाप छोड़ी. इन तीनों ने मैच में इंग्लैंड के कुल 17 विकेट झटके. भारत ये मुकाबला ड्रॉ कराने में सफल रहा. मैनचेस्टर में हुआ दूसरा टेस्ट भी ड्रॉ रहा. अब सबकी नजरें ओवल में होने वाले तीसरे टेस्ट पर थीं. इंग्लैंड के पहली पारी में 355 रन के जवाब में भारत ने 284 रन बनाए. अजित वाडेकर(48) और दिलीप सरदेसाई(54) के अलावा टॉप ऑर्डर का कोई बल्लेबाज नहीं चला. निचले क्रम में एकनाथ सोलकर और फारुक इंजीनियर ने शानदार बल्लेबाजी कर टीम को इस स्कोर तक पहुंचाया.

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    चंद्रशेखर ने दूसरी पारी में 6 विकेट झटके थे
    बीएस चंद्रशेखर की घातक गेंदबाजी के कारण इंग्लैंड दूसरी पारी में सिर्फ 101 रन पर सिमट गया. चंद्रशेखर ने 38 रन देकर 6 विकेट झटके थे. भारत इंग्लैंड में पहली सीरीज जीत से 173 रन दूर था. सुनील गावस्कर पहली पारी की तरह दूसरी में भी फ्लॉप रहे. आखिरी दिन अंडरवुड और इलिंगवर्थ की स्पिन गेंदबाजी के आगे रन बनाना बहुत मुश्किल था. अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि भारत ने 20 ओवर में सिर्फ 22 रन बनाए थे.भारत ने 76 पर तीन विकेट गंवा दिए थे. लेकिन दिलीप सरदेसाई(40), गुंडप्पा विश्वनाथ (33) की पारी के बदौलत भारत जीत के करीब पहुंचा.

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    सरदेसाई और विश्वनाथ ने आखिरी दिन 3 घंटे बल्लेबाजी की
    सरदेसाई ने 155 मिनट बल्लेबाजी की, जबकि विश्वनाथ 170 मिनट तक क्रीज पर जमे रहे. भारत की जीत तय दिख रही थी. तभी एक के बाद एक सरदेसाई और एकनाथ सोलकर के विकेट गिर गए. 134 पर भारत 5 विकेट गंवा चुका था. उसे अब भी जीतने के लिए 40 से ज्यादा रन चाहिए थे. इस नाजुक मौके पर आबिद अली और फारुक इंजीनियर ने संयम नहीं खोया और आखिरी तक क्रीज पर डटे रहे. अली ने लकहर्स्ट की गेंद पर चौका जड़ टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई.

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