उधार लिया, गहने बेचे और फिर...अपनी जिद और जुनून से वर्ल्ड कप जीत अंग्रेजों की धरती पर लहराया तिरंगा

रवि चौहान (Ravi Chauhan) के नेतृत्व में भारतीय डिसेबल क्रिकेट टीम (Indian physical disable Team) ने इंग्लैंड (England) में जीता था वर्ल्ड कप, खराब आर्थिक परिस्थिति के बावजूद नहीं मानी हार.

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: September 2, 2019, 12:21 PM IST
उधार लिया, गहने बेचे और फिर...अपनी जिद और जुनून से वर्ल्ड कप जीत अंग्रेजों की धरती पर लहराया तिरंगा
भारतीय टीम ने इंग्लैंड को हराकर यह टूर्नामेंट अपने नाम किया था.
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: September 2, 2019, 12:21 PM IST
रवि चौहान का एक पैर खराब था. बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था, लेकिन सामान्य खिलाड़ी उन्हें दिव्यांग होने की वजह से अपने साथ नहीं खिलाते थे. उस समय उन्होंने फैसला किया कि वह दिव्यांग क्रिकेटरों के लिए अलग जगह बनाएंगे. रवि चौहान की जिद और जुनून का नतीजा है कि भारतीय डिसेबल क्रिकेट टीम ने ब्रिटेन में पहली बार हुए वर्ल्ड कप में विजेता का खिताब हासिल किया. रवि चौहान ने पूरे देश में घूमकर प्रतिभाओं को खोजा. इसके बाद पूर्व क्रिकेटरों की मदद से एक मजबूत टीम खड़ी की. जिसकी बदौलत भारत को वर्ल्ड कप में विजेता का खिताब हासिल हुआ. रवि चौहान भारतीय डिसेबल क्रिकेट एसोसिएशन के महासचिव हैं.

फरीदाबाद के सेक्टर-7 में रहने वाले रवि चौहान बचपन से ही क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन आर्थिक परिस्थितियां ठीक नहीं थीं. घर से काफी दूर क्रिकेट के मैदान पर पहुंचने के लिए कभी दोस्तों से पैसे उधार लेते. लेकिन खराब स्थिति होने के कारण वह क्रिकेटर नहीं बन सके. उस समय उन्होंने मन में ठान लिया कि वह किसी दूसरे दिव्यांग क्रिकेटर के साथ ऐसा नहीं होने देंगे.

वर्ष 2011 में किया क्रिकेट एसोसिएशन का गठन
वर्ष 2011 में पूर्व क्रिकेटरों की मदद से रवि चौहान ने डिसेबल क्रिकेट एसोसिएशन का गठन किया. इसके बाद कई जगह पर ट्रायल आयोजित करके भारतीय डिसेबल क्रिकेट टीम का गठन किया. 2012 में भारतीय क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान का दौरा किया. इस दौरे में पहली बार भारतीय क्रिकेट टीम ने सॉफ्ट बाॅल की जगह लेदर बाॅल का प्रयोग किया. रवि का मानना था कि लेदर बाॅल से खेलने पर डिसेबल क्रिकेटरों में भी जुनून पैदा होगा. इसके बाद उन्होंने दिव्यांग क्रिकेटरों के लिए स्पेशल पैड और ग्लब्स बनवाए.

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घर के आभूषण भी रखने पड़े गिरवी
रवि के अनुसार, टीम का गठन होने के बाद कोई स्पांसर नहीं मिल रहा था. जबकि सामान्य क्रिकेट टीम को स्पांसर करने के लिए कई उद्योगपति आगे आ जाते हैं. ऐसे में उन्होंने घर के आभूषण भी गिरवी रख दिए. हालात ऐसे हो गए कि बच्चों की फीस भी दोस्तों से उधार लेकर चुकानी पड़ी. इसके बाद टीम ने वर्ष 2016 में अफगानिस्तान का दौरा किया. इस दौरे के लिए भारतीय टीम को सिक्सर किंग युवराज सिंह की तरफ से शुभकामनाएं दी गईं.
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वर्ल्ड कप जीतकर सपना हुआ पूरा
विदेशी धरती पर वर्ल्ड कप जीतना रवि का सपना था जो अब पूरा हो गया है. उन्होंने कहा कि इस जीत के साथ कई दिव्यांग क्रिकेटरों की जिंदगी सुधरने की उम्मीद है. उम्मीद है कि उन्हें सरकार से नौकरी और आर्थिक मदद मिल सकेगी. रवि का कहना है कि उनका यह अभियान अभी नहीं थमेगा. वह जिंदगी भर भारतीय दिव्यांग क्रिकेटरों के लिए काम करते रहेंगे. भारतीय टीम की इस जीत पर बीसीसीआई ने भी शुभकामनाएं दी हैं.

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First published: August 21, 2019, 5:38 PM IST
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