ऑस्ट्रेलिया दौरे के पहले वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलने से टीम इंडिया को होंगे ये 3 नुकसान

ऑस्ट्रेलिया दौरे के पहले वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलने से टीम इंडिया को होंगे ये 3 नुकसान
टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया दौरे के पहले फिर से वही गलती कर रही है जो इंग्लैंड दौरे के पहले की थी. इंग्लैंड सीरीज में टीम इंडिया की तकनीकी पर सवाल उठे थे.

टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया दौरे के पहले फिर से वही गलती कर रही है जो इंग्लैंड दौरे के पहले की थी. इंग्लैंड सीरीज में टीम इंडिया की तकनीकी पर सवाल उठे थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2018, 10:50 AM IST
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पिछले सालों के दौरान टीम इंडिया ने जब अपने घर पर एक के बाद एक टीम को हराया, तो लगा कि वे टेस्ट क्रिकेट में अजेय हो गए हैं. श्रीलंका के खिलाफ उनकी लगातार घरेलू और विदेशी सीरीज में जीत से लोगों को मन में एक झूठ बैठ गया कि टीम इंडिया से मुकाबला करना अब किसी भी टीम के बस की बात नहीं है. लेकिन जैसे ही टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड का दौरा किया. टीम की पोल पट्टी खुल गई. क्योंकि ये दोनों ही सीरीज टीम इंडिया हारी ही नहीं, बल्कि उनकी मजबूत बल्लेबाजी पनाह मांगती नजर आई.

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अब टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बड़े दौरे के पहले वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज खेल रही है. यह सीरीज खेलने से टीम इंडिया को 3 बड़े नुकसान हो सकते हैं, जिस पर शायद अभी तक न ही टीम मैनजमेंट का ध्यान गया है और न ही खुद कप्तान कोहली का.



भारत में सीरीज खेलना ठीक फैसला नहीं

ऑस्ट्रेलिया में भारत से अलग तेज पिचें हैं. ऐसे में अगर ऑस्ट्रेलिया सीरीज के पहले इस सीरीज को तैयारी के लिहाज से देखा जाए, तो यह बड़ी भूल ही होगी. क्योंकि यहां की गई तैयारी टीम इंडिया को बिल्कुल भी मदद नहीं करने वाली. इससे अच्छा तो ये होता कि टीम इंडिया इसी समय में ऑस्ट्रेलिया में कुछ ज्यादा प्रैक्टिस मैच खेलने की योजना बना लेती. जाहिर है प्रैक्टिस मैच खेलने से टीम इंडिया को परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती.

कमजोर टीम के खिलाफ खेलने से नहीं हो पाएगी अच्छी तैयारी


बात करें मौजूदा वेस्टइंडीज टीम की तो इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वे भारत के मुकाबले बहुत कमजोर हैं. आखिरी बार उन्होंने किसी बड़ी टीम के खिलाफ टेस्ट सीरीज साल 2012 में जीती थी. मौजूदा समय में वे टेस्ट में आठवें नंबर पर हैं. वहीं, टीम इंडिया नंबर 1 पर है. बात करें ऑस्ट्रेलिया की तो वे तीसरे नंबर पर हैं. ऐसे में टीम इंडिया के खिलाड़ियों को वे चुनौतियां नहीं मिलने वालीं जो उन्हें अपने खेल को सुधारने के लिए मजबूर करें.

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हां, रिकॉर्ड बनाने के लिहाज से यह सीरीज सही है. वेस्टइंडीज ने भले ही पिछले एक साल में अपने प्रदर्शन में थोड़ा सुधार किया हो, लेकिन उनके ज्यादातर खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट भारत में नहीं खेले हैं. आखिरी बार वेस्टइंडीज ने 2013 में भारत में टेस्ट सीरीज खेली थी. ऐसे में अनुभव की कमी उन्हें सीरीज में भारी पड़ सकती है. अगर टीम इंडिया किसी बड़ी टीम को बुलाती तो शायद उन्हें कुछ चुनौतियां मिलतीं और शायद वे चीजें ऑस्ट्रेलिया सीरीज में मददगार साबित हो सकती थीं.

खिलाड़ियों को न हो जाए खुद पर झूठा गुमान


इंग्लैंड सीरीज में टीम इंडिया की तकनीकी पर सवाल उठे थे. यह पहला मौका नहीं था जब इस तरह के सवाल उठे बल्कि दक्षिण अफ्रीका दौरे के दौरान भी इसी तरह के सवाल उठे थे. लेकिन दक्षिण अफ्रीका दौरे से लौटने के बाद टीम इंडिया ने अफगानिस्तान के खिलाफ एक टेस्ट सीरीज खेली थी और जीत हासिल करने के बाद खिलाड़ियों के दिमाग पर अच्छे प्रदर्शन का सुरूर चढ़ गया था. क्योंकि एक मैच के साथ एकाएक भारतीय ओपनर फॉर्म में नजर आने लगे थे. लेकिन इंग्लैंड में कहानी कुछ और ही नजर आई और दोनों ही ओपनर खूब जूझे. आखिरकार, सीरीज के बाद दोनों ओपनरों को टीम इंडिया से अपनी जगह गंवानी पड़ी.

ऐसे में अब टीम इंडिया के पास ओपनिंग के लिए तीन विकल्प हैं. पहले विकल्प के तौर पर केएल राहुल तो हैं ही, साथ ही दूसरे के लिए पृथ्वी शॉ और मयंक अग्रवाल में से किसी एक को चुना जाएगा. अगर इन दोनों में से कोई भी डेब्यू करने वाला खिलाड़ी इस सीरीज में अच्छा प्रदर्शन करता है और उसे इस सीरीज में प्रदर्शन के आधार पर ऑस्ट्रेलिया ले जाया जाता है तो ये ठीक नहीं होगा.
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