DDCA की कुर्सी से रजत शर्मा के लिए खुलेगा BCCI अध्‍यक्ष पद का रास्‍ता!

रजत शर्मा को 1521 वोट मिले, तो उनके विरोधी मदन लाल को 1004 वोट हासिल हुए. अगर प्रतिशत की बात की जाए तो वरिष्‍ठ पत्रकार को करीब 54.40 फीसदी वोट मिले हैं और यह बड़ी बात है.

विमल कुमार@Vimalwa | News18Hindi
Updated: July 3, 2018, 3:25 PM IST
DDCA की कुर्सी से रजत शर्मा के लिए खुलेगा BCCI अध्‍यक्ष पद का रास्‍ता!
डीडीसीए के अध्यक्ष चुने गए हैं वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा
विमल कुमार@Vimalwa | News18Hindi
Updated: July 3, 2018, 3:25 PM IST
हमेशा विवादों में रहने वाला दिल्‍ली जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) इन दिनों इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा के कारण सुर्खियों में है. दरअसल, लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के बाद डीडीसीए की कमान पूर्व न्यायाधीश विक्रमजीत सेन के हाथों में थी और हाल ही में उन्‍हीं की देखरेख में चुनाव हुए हैं.

दिल्‍ली क्रिकेट की सत्‍ता हासिल करने की इस जंग में वरिष्‍ठ पत्रकार रजत शर्मा का मुकाबला पूर्व भारतीय क्रिकेटर मदन लाल और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्‍यक्ष विकास सिंह से था. लेकिन जो आंकड़े आए हैं वो अपने आप में चौंकाने वाले हैं. जी हां, नये अध्‍यक्ष रजत शर्मा और दूसरे स्‍थान पर रहे मदन लाल के बीच 517 वोट का अंतर रहा. यह दिल्‍ली क्रिकेट की राजनीति में कोई छोटी घटना नहीं है.

आपको बता दें कि रजत शर्मा को इस प्रतिष्‍ठा की लड़ाई में 1521 वोट मिले, तो उनके विरोधी मदन लाल को 1004 वोट हासिल हुए. अगर प्रतिशत की बात की जाए तो वरिष्‍ठ पत्रकार को करीब 54.40 फीसदी वोट मिले हैं और यह इसलिए बड़ी बात है, क्‍योंकि इन चुनावों में डीडीसीए के पूर्व अध्‍यक्ष और भारत सरकार के वित्‍त मंत्री अरुण जेटली अपने मित्र शर्मा की सपोर्ट में सार्वजनिक रूप से खड़े नहीं हुए थे. लिहाजा जेटली के समर्थन को लेकर थोड़ा संदेह था, लेकिन वोटिंग के दौरान अरुण जेटली की पत्‍नी संगीता का कैमरों के समाने निसंकोच रूप से आना बताता है कि उनका (जेटली) रजत शर्मा को पूरा समर्थन था.

जीत के बाद रजत शर्मा ने कहा, ' इस जीत ने बहुत से लोगों को आशा दी कि अगर इरादा अच्‍छा है तो आप किसी को भी पराजित कर सकते हैं. इस जगह पर पिछले 35 सालों से कुछ लोगों ने कब्‍जा कर रखा था और पहली बार मेरे जैसे व्‍यक्ति की जीत बताती है कि लोग बदलाव चाहते हैं.'

सीके खन्‍ना को लगा झटका
सही मायने में देखा जाए तो यह चुनाव मदन लाल से कहीं ज्‍यादा बीसीसीआई के कार्यवाहक अध्‍यक्ष चंद्र किशोर (सीके) खन्‍ना के लिए बड़ा झटका साबित हुआ. क्‍योंकि उनकी (सीके खन्‍ना) पत्‍नी शशि उपाध्‍यक्ष पद का चुनाव हार गई. शशि को 1086 वोट मिले जबकि डीडीसीए के पूर्व अध्‍यक्ष स्‍नेह बंसल के छोटे भाई राकेश बंसल को 1364 वोट हासिल हुए. सच कहा जाए तो रजत शर्मा के गुट ने चुनावों में 12-0 से क्‍लीन स्‍वीप किया है.

हर कोई जानता है कि प्रॉक्‍सी वोटिंग सिस्‍टम के चलते सीके खन्‍ना गुट ने तीन से अधिक दशक तक डीडीसीए में एकछत्र राज किया है.
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यही नहीं, रजत शर्मा की जीत के बाद पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने इंडिया टीवी से फोन पर कहा,' जब मुझे पता चला कि डीडीसीए में प्रॉक्‍सी वोटिंग सिस्‍टम खत्‍म गया है, तो मुझे यकीन था कि यह चुनाव रजत शर्मा के लिए औपचारिकता होगी.'

देखा जाए तो ये चुनाव कई मायनों में बेहद ख़ास था क्‍योंकि डीडीसीए के 88 साल के इतिहास में पहली बार चुनावों में सभी लोगों को व्‍यक्तिगत रूप से वोट करने को कहा गया था. और ऐसा संभव हुआ लोढा समिति की सिफारिशों के कारण.

इन बहुप्रतीक्षित चुनावों में बिशन सिंह बेदी, वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, दिल्‍ली रणजी टीम के कप्‍तान ईशांत शर्मा आदि ने वोट किया. जबकि चुनावों के दौरान मदन लाल के पक्ष में माहौल बनाने वाले 1983 वर्ल्‍ड कप विजेता टीम के कप्‍तान कपिल देव और मोहिंदर अमरनाथ व्‍यक्तिगत कारणों की वजह से वो‍ट डालने नहीं पहुंचे. हालांकि बीसीसीआई के कार्यवाहक कोषाध्‍यक्ष अनिरूद्ध चौधरी और आईपीएल चेयरमैन राजीव शुक्‍ला ने अपने वोट डाले.

जबकि रजत शर्मा की जीत से गदगद इंडिया टीवी के एक्‍सपर्ट यशपाल शर्मा और चेतन शर्मा फिरोजशाह कोटला लाइव पर कमेंट्री करते नजर आये.

हालांकि इस जीत के बाद कुछ लोग सवाल कह रहे हैं कि अरुण जेटली के लिए रजत शर्मा 'प्रॉक्‍सी' अध्‍यक्ष होंगे. जबकि कुछ इस बात से असहमत हैं. सच कहा जाए तो शर्मा को अभी से घेरने की शुरुआत हो गई है. हालांकि उनकी डीडीसीए में जीत आने वाले समय में बीसीसीआई में उनका रूतबा बढ़ा सकती है. शायद अध्‍यक्ष पद?

जबकि टीवी टुडे ग्रुप के साथ अपना करार बढ़ाने के बजाए सौरव गांगुली ने इंडिया टीवी का एक्‍सपर्ट बनना स्‍वीकार कर लिया है तो सहवाग और गंभीर ने अन्‍य गुटों द्वारा चुनाव लड़ने के लिए संपर्क करने पर इनकार कर दिया था. ऐसा लगता है कि डीडीसीए में मिली जीत रजत शर्मा के लिए प्रशासनिक करियर का पहला विकेट है.

बहरहाल, स्‍वच्‍छ छवि, पारदर्शिता और ईमानदारी की पहचान रखने वाले नये अध्‍यक्ष रजत शर्मा के लिए डीडीसीए के पूर्व अधिकारियों के काबिज दर्जनों रिश्‍तेदारों को मैनेज करना मुश्किल काम होगा. इसमें राकेश बंसल सबसे अहम नाम है, जो कि पूर्व डीडीसीए अध्‍यक्ष स्‍नेह बंसल के भाई हैं. आपको बता दें कि स्‍नेह बंसल को 1.55 करोड़ रूपए का फंड गलत तरीके से ट्रांसफर करने का दोषी पाए जाने के बाद डीडीसीए अध्‍यक्ष पद से बर्खास्‍त कर दिया गया था.

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First published: July 2, 2018, 7:56 PM IST
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