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India vs England: विदेश में भारत की हार की बड़ी वजह हैं पुछल्ले बल्लेबाज, औसत में अफगानिस्तान से भी फिसड्डी

India vs England: भारत को इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट की सीरीज में अपनी बरसों पुरानी समस्या का सामना करना पड़ सकता है. विदेश में टीम इंडिया की हार की भी यही वजह है. (PC-AFP)

India vs England: भारत को इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट की सीरीज में अपनी बरसों पुरानी समस्या का सामना करना पड़ सकता है. विदेश में टीम इंडिया की हार की भी यही वजह है. (PC-AFP)

India vs England: भारत को इंग्लैंड के खिलाफ 4 अगस्त से पांच टेस्ट की सीरीज (IND vs ENG Test 2021) खेलनी है. इस सीरीज में पुछल्ले बल्लेबाज टीम इंडिया के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकते हैं. विदेश में भारत की टेस्ट में पिछली सात में से 5 हार देखें तो इसमें पुछल्ले बल्लेबाजों का ही बड़ा रोल था. बीते तीन साल में पुछल्ले बल्लेबाजों का औसत भी इसी परेशानी की तरफ इशारा कर रहा हैं. क्योंकि टीम इंडिया के निचले क्रम के बल्लेबाजों का औसत जिम्बाब्वे, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों से भी काफी कम है.

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    नई दिल्ली. भारत को इंग्लैंड के खिलाफ 4 अगस्त से पांच टेस्ट की सीरीज (IND vs ENG Test 2021) खेलनी है. इस मैच से पहले टीम इंडिया को साउथैम्पटन में विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल (WTC Final) में न्यूजीलैंड के हाथों हार 8 विकेट से हार झेलनी पड़ी थी. उस मैच की दोनों पारियों में भारत के पुछल्ले बल्लेबाजों ने न्यूजीलैंड के मुकाबले कम रन बनाए थे. डब्ल्यूटीसी फाइनल की पहली पारी में भारत के आखिरी पांच बल्लेबाजों ने 45 और दूसरी में 37 रन बनाए थे. दूसरी ओर, कीवी टीम के आखिरी पांच बल्लेबाजों ने पहली पारी में 71 रन जोड़े थे और यही जीत-हार के बीच का बड़ा अंतर साबित हुआ. ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ पुछल्ले बल्लेबाज टीम इंडिया का सिरदर्द बढ़ा सकते हैं.

    अगर घर से दूर टेस्ट क्रिकेट में भारत की पिछली सात में से पांच हार को देखें, तो यह साफ हो जाता है कि पुछल्ले बल्लेबाज टीम की कमजोर कड़ी साबित हो रहे हैं. इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खिलाफ हुए 2018 के साउथैम्पटन और पर्थ टेस्ट. 2020 के क्राइस्टचर्च और एडिलेड टेस्ट और इसी साल साउथैम्प्टन में हुए विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं.

    इन पांचों टेस्ट की पहली पारी में 6 विकेट पर भारत का स्कोर विपक्षी टीम से बेहतर या बराबर था ( 2018 के पर्थ टेस्ट में स्कोर बराबर था). लेकिन इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिय़ा और न्यूजीलैंड के निचले क्रम के बल्लेबाजों ने उन्हीं पांचों पारियों में 160, 75, 82, 80 और 87 रन जोड़े थे. वहीं, भारत के आखिरी चार बल्लेबाज इसी दौरान 84, 32, 45, 38 और 35 रन जोड़ पाए. यही भारत की हार की बड़ी वजह भी साबित हुई.

    इंग्लैंड के पुछल्ले बल्लेबाजों का औसत भारत से काफी बेहतर
    इससे साफ हो जाता है कि भारत बीते कुछ सालों से टेस्ट क्रिकेट में निचले क्रम की बल्लेबाजी की समस्या से जूझ रहा है और यह वाकई टीम मैनेजमेंट की चिंता बढ़ाने वाला है. कम से कम पिछले तीन साल का रिकॉर्ड तो इसी तरफ इशारा कर रहा है. 2018 की शुरुआत के बाद से, भारत के निचले क्रम के बल्लेबाजों (नंबर 8 और नीचे) का कुल बल्लेबाजी औसत 13.39 है, जो टेस्ट क्रिकेट में केवल दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, जिम्बाब्वे और अफगानिस्तान से बेहतर है.

    अगर आप इसे केवल (नंबर 9 से 11) तक सीमित रखते हैं, तो टीम इंडिया की स्थिति और खराब नजर आती है. क्योंकि भारत टेस्ट खेलने वाले 12 देशों में आखिरी पायदान पर है. उसका बल्लेबाजी औसत 7.89 है. जो अफगानिस्तान (7.90), जिम्बाब्वे (9.00) और बांग्लादेश (9.48) से भी कम है.

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    भारत पुछल्ले बल्लेबाजों के औसत के मामले में आयरलैंड से भी फिसड्डी
    दिलचस्प बात यह है कि 2018 से टेस्ट में नंबर 9 से 11 के बल्लेबाजों के औसत के मामले में आयरलैंड (18.84) पहले स्थान पर है. जो मौजूदा टेस्ट रैंकिंग के शीर्ष-10 देशों में भी शामिल नहीं है और भारत टेस्ट रैंकिंग में दूसरे स्थान पर है. इस लिस्ट में ऑस्ट्रेलिया (15.60), न्यूजीलैंड (15.32) के बाद इंग्लैंड (12.86) के औसत के साथ चौथे स्थान पर है. पाकिस्तान का औसत 10.60 है, भारत (7.89) से काफी बेहतर है.

    विदेश में भारत की हार की बड़ी वजह पुछल्ले बल्लेबाज
    टीम इंडिया के लिए अच्छी बात यह है कि निचले क्रम के बल्लेबाजों से जुड़ी यह परेशानी घरेलू टेस्ट सीरीज में ज्यादा प्रभावित नहीं करती है. यह इंग्लैंड के खिलाफ इस साल फरवरी-मार्च में हुई टेस्ट सीरीज में हम देख चुके हैं. क्योंकि तब निचले क्रम में भारत के स्पिन ऑलराउंडर्स ने कई मौकों पर अच्छी बल्लेबाजी की थी. हालांकि, विदेशों में टेस्ट खेलते वक्त हम प्लेइंग-11 में ज्यादा स्पिनर्स नहीं खिला सकते हैं. हमारे तेज गेंदबाज विदेश में अपनी गेंदबाजी का हुनर तो दिखा देते हैं. लेकिन बल्लेबाजी के मामले में उनके हाथ तंग हैं और यही समस्या इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट की सीरीज में और उभरकर सामने आ सकती है.

    भुवनेश्वर कुमार भी फिटनेस की फांस में फंसे
    यही वजह है कि इंग्लैंड में भारत का टीम मैनेजमेंट श्रीलंका और टीम इंडिया (IND vs SL) के बीच हाल ही में दूसरे वनडे के नतीजे के बाद खुश हुआ होगा. क्योंकि उस मैच में दीपक चाहर (Deepak Chahar) और भुवनेश्वर कुमार (Bhuvneshwar Kumar) ने हारी बाजी पलटते हुए टीम इंडिया को न सिर्फ मैच जिताया था, बल्कि सीरीज भी भारत की झोली में आई थी. हालांकि, घरेलू क्रिकेट में 35.10 का गेंदबाजी औसत होने के बाद भी चाहर को टेस्ट में अब तक मौका नहीं मिला है. वहीं, फिटनेस के कारण भुवनेश्वर तीन साल से टेस्ट नहीं खेल पाए.

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    शार्दुल ठाकुर नंबर-8 पर अच्छा विकल्प
    हार्दिक पंड्या (Hardik Pandya) भी इंग्लैंड में पुछल्ले बल्लेबाजों से जुड़ी परेशानी को दूर कर सकते थे. लेकिन पीठ की सर्जरी के बाद से वो ज्यादा गेंदबाजी नहीं कर रहे हैं. ऐसे में इंग्लैंड दौरे पर गई टेस्ट टीम में सिर्फ शार्दुल ठाकुर (Shardul Thakur) ही ऐसे गेंदबाज हैं, जो थोड़ी बहुत बल्लेबाजी कर सकते हैं. उनका फर्स्ट क्लास क्रिकेट में बल्लेबाजी औसत 16.58 का है. लेकिन ऐसा इसलिए है, क्योंकि उन्होंने देर से अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान देना शुरू किया.

    भारत के लिए, शार्दुल सभी फॉर्मेट की 16 पारियों में केवल चार बार 10 से कम रन के स्कोर पर आउट हुए हैं. इस साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ब्रिसबेन टेस्ट में शार्दुल ने आठवें नंबर पर 67 रन की पारी खेली थी. उनकी इस पारी से यह समझ आ जाता है कि उनके पास टेस्ट में बल्लेबाजी के लिए जरूरी तकनीक है और 8 नंबर पर बल्लेबाजी कर सकते हैं. उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में मौका मिले. ऐसा कम ही दिखता है. क्योंकि वो टीम मैनेजमेंट की पसंद के पहले तीन गेंदबाजों में शामिल नहीं है.
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    इंग्लैंड सीरीज में पुछल्ले बल्लेबाज भारत का सिरदर्द बनेंगे
    ऐसे में टीम इंडिया इंग्लैंड के खिलाफ नॉटिंघम में होने वाले पहले टेस्ट (IND vs ENG Nottingham Test) में भी इसी सिरदर्द के साथ ही उतरेगी. भारत विदेश में अपने पिछले चार टेस्ट में पांच गेंदबाजों के साथ उतरा है. इसमें तीन तेज गेंदबाज और स्पिन ऑलराउंडर के रूप में आर अश्विन और रवींद्र जडेजा खेले हैं, जो टीम को बल्लेबाजी में नंबर-8 गहराई देते हैं. लेकिन तीन तेज गेंदबाज और दो स्पिनर का यह कॉम्बिनेशन जैसा कि साउथैम्पटन में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में देखा गया. वो इंग्लिश कंडीशंस में आदर्श नहीं होगा.

    इंग्लैंड के पास नंबर-9 तक बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी
    अगर भारत के खिलाफ पहले दो टेस्ट के लिए इंग्लिश टीम को देखें तो उसके पास तीन सीम बॉलर ऑलराउंड हैं. इसमें बेन स्टोक्स, ओली रॉबिन्सन और सैम करेन शामिल हैं. डॉम बेस के रूप में एक स्पिन ऑलराउंडर है और निचले क्रम में मार्क वुड भी रन बना सकते हैं. ऐसे में इंग्लैंड कैसा भी प्लेइंग-11 चुने, उसके पास चार तेज गेंदबाजों का विकल्प होगा और नंबर-9 तक बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी. बीते तीन साल में पुछल्ले बल्लेबाजों का टेस्ट औसत भी इंग्लिश टीम के पक्ष में है.

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