विराट कोहली की कप्तानी पर क्यों उठते हैं बार-बार सवाल, अच्छी पहल पर भी नहीं होती तारीफ?

विराट कोहली ने युवाओं की खातिर अपना तय बैटिंग ऑर्डर छोड़ दिया. (Pic: AP)

विराट कोहली ने युवाओं की खातिर अपना तय बैटिंग ऑर्डर छोड़ दिया. (Pic: AP)

India vs England: करोड़ों क्रिकेटप्रेमी ऐसे हैं जो सौरव गांगुली की इस बात के लिए तारीफ करते हैं कि उन्होंने वीरेंद्र सहवाग को आगे बढ़ाने की खातिर उन्हें अपना स्थान दे दिया था. जब विराट कोहली (Virat Kohli) युवाओं को मौका देने के लिए खुद के नंबर से छेड़छाड़ करते हैं तो आलोचक बगलें झांकने लगते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 24, 2021, 5:11 PM IST
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कुछ-एक साल पहले की बात है. भारतीय क्रिकेट में ‘मिडास टच’ छाया हुआ था. अखबारों से लेकर टीवी चैनल तक... महेंद्र सिंह धोनी जब भी कुछ नया करते, बॉलिंग चेंज से लेकर किसी खिलाड़ी को मौका देने के फैसले तक, और यदि वह मैदान पर कामयाब होता दिखता तो कप्तान को इसका क्रेडिट जरूर मिलता. अब ऐसा नहीं होता. विराट कोहली (Virat Kohli) के पास ‘मिडास टच’ और ‘कैप्टन कूल’ वाला टैग नहीं है. अब कोहली यदि किसी खिलाड़ी को मौका देते हैं और वह परफॉर्म करता है तो भारत की बेंच स्ट्रेंथ की तारीफ की जाती है. हां, यदि कभी रोहित शर्मा या अजिंक्य रहाणे कप्तान हों और वे किसी नए खिलाड़ी को मौका दें या कोई स्ट्रेटजी बनाकर टीम को जिता दें तो बहुत सारे लोगों को धोनी वाली कप्तानी की फीलिंग आने लगती है.

विराट कोहली ना सिर्फ मौजूदा समय के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज हैं, बल्कि भारत के सबसे सफल कप्तान भी हैं. यकीनन, उन्होंने कोई वर्ल्ड कप नहीं जीता है. लेकिन 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतना किसी वर्ल्ड कप से कम भी नहीं था. बहरहाल, तब से अब तक गंगा में बहुत पानी बह चुका है. कोहली भारत-इंग्लैंड सीरीज (India vs England) में दसियों ऐसी चीजें कर चुके हैं, जिसके लिए उनकी दिल खोलकर तारीफ की जा सकती है. कुछ उसी तरह, जैसे हम दादा की दादागिरी, धोनी की कूलनेस और रहाणे की कॉमनेस की तारीफ करते हैं. लेकिन पूर्व क्रिकेटरों से लेकर मेनस्ट्रेम मीडिया तक में एक ऐसा वर्ग है, जो कोहली की कामयाबी को हजम नहीं कर पाता. इसकी अपनी वजहें भी हैं, जिनका जिक्र हम जरूर करेंगे. लेकिन पहले भारत-इंग्लैंड सीरीज की वो बातें, जिनमें कप्तान कोहली ने अंतर पैदा किया.

पहला टेस्ट हारकर भी सीरीज अपने नाम की

भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ पहला टेस्ट हारकर भी सीरीज अपने नाम की. इसके बाद जब टीम टी20 सीरीज में भी पहला मैच हार गई तो विराट कोहली ने सीनियर बल्लेबाज और अपने दोस्त शिखर धवन (Shikhar Dhawan) को प्लेइंग इलेवन से बाहर करने में देर नहीं लगाई. इतना ही नहीं, उन्होंने ओपनर धवन की जगह मध्य क्रम के बल्लेबाज ईशान किशन को दे दी. धोनी की घरेलू टीम से आने वाले ईशान किशन, कप्तान कोहली के भरोसे पर खरे उतरे और विनिंग नॉक खेली.
ईशान-सूर्यकुमार के लिए अपना नंबर बदला

जब तीसरे टी20 मैच में रोहित शर्मा की वापसी हुई, तो ईशान को ओपनिंग स्लॉट से हटाना पड़ा. इस बार कोहली ने उन्हें अपने नंबर पर भेजा. नंबर-3 पर. हालांकि, ईशान इस मुकाबले में चार रन ही बना सके. भारत यह मैच हार गया और एक बार फिर कप्तान कोहली आलोचकों के निशाने पर आ चुके थे. हमेशा की तरह कोहली ने अपनी आलोचनाओं को नजरअंदाज किया और चौथे मैच में फिर बदलाव के साथ सामने आए. इस बार प्लेइंग इलेवन में सूर्यकुमार यादव थे और वे विराट की जगह तीसरे नंबर पर बैटिंग कर रहे थे. सूर्यकुमार ने फिफ्टी जमाई. भारत ने मैच जीता. लेकिन विराट की कप्तानी की तारीफ अब भी अब भी दूर रही. लोग इसकी बजाय टीम स्ट्रेंथ के गुण गाने लगे.

विराट और रोहित ने पांचवें टी20 मैच में ओपनिंग की.
विराट और रोहित ने पांचवें टी20 मैच में ओपनिंग की.




रोहित के साथ ओपनिंग की कमान संभाली

जब पूरे समर्थन के बावजूद ओपनर केएल राहुल पहले चार टी20 मैच में फ्लॉप रहे तो विराट ने उन्हें ब्रेक दे दिया. लेकिन ऐसा करते वक्त एक बड़ा सवाल आया कि रोहित के साथ ओपनिंग कौन करे. विराट ने इसका जवाब खुद को आगे करके दिया. उन्होंने रोहित के साथ ओपनिंग की कमान संभाली और 80 रन की शानदार पारी खेली. इस तरह भारत टी20 सीरीज दो बार पिछड़ने के बावजूद 3-2 से जीतने में सफल रहा. इस जीत में भारत की ओर से सबसे अधिक रन विराट कोहली ने बनाए. वह भी अलग-अलग नंबरों पर बैटिंग करते हुए. उन्होंने सीरीज में तीसरे और चौथे नंबर के अलावा ओपनिंग करते हुए भी अर्धशतक जमाया.

करोड़ों क्रिकेटप्रेमी ऐसे हैं जो सौरव गांगुली की इस बात के लिए तारीफ करते हैं कि उन्होंने वीरेंद्र सहवाग को आगे बढ़ाने की खातिर उन्हें अपना स्थान दे दिया था. इसके बाद ही सचिन-सहवाग की जोड़ी सामने आई थी. लेकिन जब विराट युवाओं को मौका देने के लिए खुद के नंबर से छेड़छाड़ करते हैं तो आलोचक बगलें झांकते हैं और बेंच स्ट्रेंथ का राग अलापने लगते हैं.


विराट अपनी कप्तानी की छाप पहले वनडे में भी छोड़ते हैं, जब वे ओपनिंग में शिखर धवन को वापस लाते हैं और आउट ऑफ फॉर्म केएल राहुल (KL Rahul) को मिडिल ऑर्डर में उनका स्थान देते हैं. राहुल को प्लेइंग इलेवन में लाने के कारण ऋषभ पंत को बाहर बैठना पड़ता है, लेकिन कठोर फैसले लेने वाले विराट पीछे नहीं हटते. आलोचकों के लिए यह कोहली की निंदा करने का सुनहरा मौका हो सकता था लेकिन राहुल बीच में आ गए. उन्होंने फिफ्टी मारकर आलोचकों के हाथों से यह मौका छीन लिया.

गनीमत है कि कोहली 'दिग्गजों' की नहीं सुनते 

अगर आप पूर्व क्रिकेटरों को सुनते हैं तो आपने एक विचित्र बात सुनी होगी. आपने कई पूर्व क्रिकेटर को यह कहते हुए सुना होगा कि टीम मैनेजमेंट को लोकेश राहुल, शिखर धवन के साथ-साथ, ईशान किशन और सूर्यकुमार यादव को भी पूरा मौका मिलना चाहिए. यही दिग्गज यह भी कहते हैं कि रोहित शर्मा को रेस्ट नहीं दिया जाना चाहिए. गनीमत है कि विराट कोहली इन दिग्गजों को सुनकर भी नहीं सुनते. अगर कोहली इनकी सुन लें तो उनके सामने खुद को ही प्लेइंग इलेवन से बाहर करने की नौबत बन आएगी क्योंकि दिल्ली-मुंबई के एसी रूम में बैठे पूर्व क्रिकेटरों की चले तो वे प्लेइंग इलेवन में 14-15 खिलाड़ी उतार दें.

कोहली और रोहित के बीच दरार की बातें...

चौथे और पांचवें टी20 मैच में विराट कोहली और रोहित शर्मा को कई बार हंस-हंसकर बात करते हुए देखा गया. यह भारतीय क्रिकेट की उन खूबसूरत तस्वीरों में से एक थी, जो करोड़ों क्रिकेटप्रेमी देखना चाहते थे. वे क्रिकेटप्रेमी, जिनके कान लगातार भरे गए हैं कि कोहली और रोहित के बीच अनकही दुश्मनी चल रही है. कि रोहित शर्मा को कोहली जबरन रेस्ट देकर बाहर बैठा देते हैं... ऐसी ही और ना जानें कितनी बातें. लेकिन इन तस्वीरों ने सबकुछ साफ कर दिया है. भारतीय क्रिकेट के दोनों शूरवीर टीम को जीत दिलाने के लिए एक हैं और अफवाह पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है.

विराट कोहली और जानी बेयरस्टो.
विराट कोहली और जानी बेयरस्टो.


आंखें तरेरने वाला कप्तान पसंद नहीं

दरअसल, भारत में कोहली को पसंद ना करने वाला बड़ा वर्ग है. उसे यह पसंद नहीं है कि कप्तान मैदान पर अन्य खिलाड़ियों की तरह मस्ती करता है. उसे खुशी से उछलने वाला कप्तान पसंद नहीं है. उसे आंखें तरेरने वाला कप्तान पसंद नहीं है. उसे विदेश टूर पर पत्नी को साथ ले जाने वाला कप्तान पसंद नहीं है. उसे पैटरनिटी लीव वाला कप्तान पसंद नहीं है. उसे छक्के मारकर खिलखिलाने वाला कप्तान पसंद नहीं है. उसे ऐसा कप्तान पसंद नहीं है, जो सॉफ्ट सिग्नल जैसे विवादित नियम पर आपत्ति जताए. कुल मिलाकर कई पूर्व क्रिकेटरों से लेकर खुद को शालीन मानने वाले क्रिकेटप्रेमियों के बड़े वर्ग को कोहली के आजाद खयाल पसंद नहीं हैं. वे धोनी, कुंबले, द्रविड़, रहाणे जैसे शांत कप्तान तो चाहते हैं, लेकिन बागी लीडर नहीं. क्यों भला? आखिर यह किस किताब में लिखा है कि कप्तान मुस्कुरा तो सकता है, पर चिल्ला नहीं सकता.

यकीनन, कोहली की तमाम कामयाबी के बावजूद उन्हें शातिर कप्तान नहीं कहा जा सकता. लेकिन भारत-इंग्लैंड ऐसी सीरीज है, जिसमें भारतीय कप्तान ने कई प्रेरक चीजें कीं, युवाओं को मौका दिया, टीम के लिए खुद को पीछे रखा, विवादित नियम पर सवाल उठाए. कोहली की इन बातों के लिए तो जमकर तारीफ हो ही सकती है. लेकिन कोहली को पसंद ना करने वाले बड़े वर्ग की ऐसी तारीफ करने में सांसें फूलने लगती हैं. वे ऐसा करते भी हैं, तो उनका वाक्य लेकिन के साथ खत्म होता है. शायद उन्हें छुईमुई कप्तान चाहिए, जो रिटायर्ड क्रिकेटरों की हां में हां मिलाए. लेकिन यह तय मानिए कि विराट ऐसा नहीं करने वाले. (यह लेखक के निजी विचार हैं.)
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