'..तभी अहसास हुआ कि यह संन्यास लेने का सही समय है'

'..तभी अहसास हुआ कि यह संन्यास लेने का सही समय है'
Indian cricketer Zaheer Khan warms up during a training session at The Sardar Patel Stadium at Motera in Ahmedabad on November 12, 2012. India plays the first Test match against England from November 15 in Ahmedabad. AFP PHOTO/ PUNIT PARANJPE (Photo credit should read PUNIT PARANJPE/AFP/Getty Images)

भारत के तेज गेंदबाज जहीर खान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा करने का फैसला किया है और इसके साथ ही वह अपने शानदार अंतरराष्ट्रीय कॅरियर को अलविदा कहने की तैयारी में हैं।

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मुंबई। भारत के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में से एक जहीर खान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया और चोटों से तंग आ चुके इस धुरंधर गेंदबाज ने स्वीकार किया कि अब उनका शरीर खेलने का बोझ और नहीं सह सकता। जहीर ने कहा कि मैं आगामी सत्र की तैयारी कर रहा था तो मुझे लगा कि मेरा कंधा रोज 18 ओवर फेंकने का बोझ नहीं सह सकता। मुझे तभी अहसास हो गया कि यह संन्यास लेने का सही समय है।

उन्होंने कहा कि मैं तुरंत प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह रहा हूं। मैं आईपीएल नौ के साथ घरेलू क्रिकेट से भी विदा लेना चाहता हूं। भारत के लिये 92 टेस्ट, 200 वनडे और 17 टी-20 मैच खेल चुके 37 बरस के इस तेज गेंदबाज का करियर चोटों से बाधित रहा है और टीम में उनके आने और जाने का सिलसिला पिछले तीन चार साल से बना रहा है ।

आईपीएल में उनका करार दिल्ली डेयरडेविल्स से है और वह अगले साल नौवे सत्र के बाद घरेलू क्रिकेट को भी अलविदा कह देंगे। जहीर ने 92 टेस्ट में 311 विकेट लिये हैं और पांच दिनी क्रिकेट में वह अनिल कुंबले (619 ), कपिल देव (434), हरभजन सिंह (417) के बाद सर्वाधिक विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज हैं। उन्होंने 200 वनडे में 282 विकेट लिये हैं जबकि टी-20 में 17 विकेट उनके नाम हैं।



विश्व कप 2011 में 21 विकेट लेकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले जहीर ने कहा कि क्रिकेट करियर में सबसे कठिन फैसला खुद को खेल से अलग करने का होता है। आप अतिरिक्त प्रयास करके करियर को विस्तार देना चाहते हैं लेकिन दो दशक बाद शरीर जवाब देने लगा है। उन्होंने कहा कि 2011 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा होना उनके करियर का सबसे खुशनुमा पल था।
हम शीर्ष टीम की तरह खेले और यह सफर काफी संतोषजनक रहा। जहीर ने कहा कि वो खेल को वापस कुछ देना चाहेंगे लेकन अभी इस बारे में फैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ‘जाक इज बैक ’ शीषर्क फिर आपको पढ़ने को मिलेगा क्योंकि मैं इस खेल और अपने देश को कुछ वापिस देना चाहता हूं जिसने श्रीरामपूर के इस लड़के को अपने सपने सच करने का मौका दिया। अपने सफर के बारे में जहीर ने कहा कि वह अपने तमाम कोचों और कप्तानों के शुक्रगुजार हैं जिन्होंने उनकी क्षमता पर भरोसा किया।

उन्होंने कहा कि 2000 में भारत के लिये पदार्पण करने के बाद से मुझे अहम मौके मिले और लोगों ने अलग अलग चरण में मेरी हौसला अफजाई की। मैं इसके बूते भारतीय क्रिकेट में योगदान दे सका और बहुत कुछ सीखा। जहीर ने कहा कि बीसीसीआई, बड़ौदा क्रिकेट संघ और मुंबई क्रिकेट संघ में मेरा समर्थन करने वालों का मैं शुक्रगुजार हूं। भारतीय क्रिकेट टीम, बड़ौदा, मुंबई , वोर्सेस्टरशर, मुंबई इंडियंस, रायल चैलेंजर्स बेंगलूर और दिल्ली डेयरडेविल्स टीमों का हिस्सा रहना गर्व की बात रही।

उन्होंने कहा कि मुझे कई लोगों को धन्यवाद देना है मेरे फिजियो, ट्रेनर, सहयोगी स्टाफ, साथी खिलाड़ी, कप्तान, कोच, चयनकर्ता, सीनियर अधिकारी, प्रशासक, मैदानकर्मी, टीम प्रबंधन और टीम मालिक। मैं हर किसी का नाम नहीं ले सकता जिसके लिये क्षमाप्रार्थी हूं लेकिन मैं उनका शुक्रगुजार हूं क्योंकि उनके सहयोग से ही मैं अपना सपना सच कर सका। जहीर ने अपने परिवार, साथी खिलाड़ियों और प्रशंसकों को भी धन्यवाद दिया । उन्होंने कहा कि ड्रेसिंग रूम में अपने साथियों के साथ मैंने शरारतें भी की जो मेरे सबसे करीबी दोस्त भी बने। मैं उनकी बातें चाव से सुनता था।

जहीर ने कहा कि मैं अपने माता पिता को भी धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने मेरा सपना पूरा करने में मदद की। मेरे बड़े भाई जीशान ने मुझे याद दिलाया कि भारतीय टीम में चुने जाने से मेरा काम पूरा नहीं हुआ बल्कि मुझे हर मैच में अच्छा प्रदर्शन करना है। मेरे छोटे भाई अनीस ने मुझ पर से काफी दबाव कम किया। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट के लाखों समर्थकों को मैं धन्यवाद देना चाहता हूं। क्रिकेट पिछले दो दशक में मेरी जिंदगी रहा है और मुझे बस यही आता है। क्रिकेट ने मुझे जीवन में सब कुछ दिया। मेरी सुनहरी यादें इससे जुड़ी हैं। मेरी मां ने संन्यास के मेरे फैसले का बेहतरीन लब्बोलुआब निकाला ठीक है बहुत अच्छा सफर था हमारा।
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