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U-19 WC: चैंपियन यूं ही नहीं बनते... किसी ने पिता को खोया तो किसी के भाई को ब्लड कैंसर, कोरोना भी तोड़ रहा था सपने

U-19 WC: चैंपियन यूं ही नहीं बनते... किसी ने पिता को खोया तो किसी के भाई को ब्लड कैंसर, कोरोना भी तोड़ रहा था सपने

U19 World Cup 2022 Final: यश धुल की कप्तानी में भारत ने खिताब जीता. (BCCI Twitter)

U19 World Cup 2022 Final: यश धुल की कप्तानी में भारत ने खिताब जीता. (BCCI Twitter)

Under 19 World Cup -2022 : भारतीय टीम ने अंडर-19 वर्ल्ड कप में कमाल का प्रदर्शन किया और टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं हारी. हालांकि यहां तक पहुंचने का सफर काफी चुनौतियों से भरा रहा. किसी ने अपने पिता को खोया तो किसी का भाई ब्लड कैंसर से लड़ रहा था. इतना ही नहीं, एक वक्त तो टीम 10 खिलाड़ियों तक सीमित हो गई थी.

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नई दिल्ली. अंडर-19 विश्व कप (Under-19 World Cup 2022) में भारत का दबदबा बरकरार है. भारतीय टीम ने अपने इस रिकॉर्ड को और मजबूत कर लिया जब इंग्लैंड को फाइनल में हराकर 5वीं बार अंडर-19 वर्ल्ड कप चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया. यश धुल (Yash Dhull) की कप्तानी वाली टीम ने कमाल का प्रदर्शन किया और टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं हारी. हालांकि यहां तक पहुंचने का सफर काफी चुनौतियों से भरा रहा. कोविड-19 महामारी के कारण एक वक्त ऐसा था कि प्लेइंग-XI चुनने तक में दिक्कत हो रही थी, इतना ही नहीं, उसका अभियान खतरे में नजर आने लगा था लेकिन सफलता पाने के लिए मेहनत और जज्बे की कोई कमी नहीं रही.

भारतीय अंडर-19 टीम के इन क्रिकेटरों के जीवन की कहानियां दिखाती हैं कि उन्होंने इस खिताबी जीत से पहले क्या-कुछ देखा. टीम में एक ऐसा भी खिलाड़ी है जिसने अपने पिता को कोविड-19 के कारण खो दिया, वहीं अन्य ने जूनियर क्रिकेट के शिखर तक पहुंचने के लिए मुश्किलों से भरे सफर को पार किया. बाएं हाथ के तेज गेंदबाज रवि कुमार ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘जिस तरह से लोगों ने पर्दे के पीछे काम किया, वह जबरदस्त था. किसी ने कोई शिकायत नहीं की. हमारे मैनेजर को कोविड हो गया था और वह दूसरे शहर में थे, लेकिन वह फोन पर काम करवा रहे था. हमारे फिजियो हमारे डॉक्टर बने, हमारे वीडियो एनालिस्ट मैनेजर बने. कोच टीम में अपनी भूमिका को दोगुना कर रहे थे.’

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टूर्नामेंट की सकारात्मक शुरुआत करते हुए दक्षिण अफ्रीका को 45 रनों से हराने के बाद भारतीय टीम प्लेइंग-XI तक पूरा नहीं कर पा रही थी. आयरलैंड के खिलाफ अपने मैच से कुछ घंटे पहले, कई खिलाड़ी कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए. रवि ने कहा, ‘एक समय, हम में से 10 खिलाड़ी ही आयरलैंड के खिलाफ खेलने के लिए फिट थे. चोटिल हुए 11वें खिलाड़ी को आखिरकार खेलना पड़ा. यह एक बेहद पेशेवर माहौल था.’ कप्तान यश ढुल 19 जनवरी को आयरलैंड के खिलाफ दूसरे ग्रुप मैच के लिए अनुपलब्ध 5 लोगों में से थे. उनके डिप्टी शेख रशीद, आराध्य यादव, मानव पारीख और सिद्धार्थ यादव समेत अन्य आयरलैंड और युगांडा मैच से बाहर हो गए थे.

आयरलैंड का सामना करने के लिए स्टेडियम के लिए रवाना होने से 30 मिनट पहले ऑलराउंडर निशांत सिंधु को बताया गया कि वह टीम का नेतृत्व करेंगे. निशांत ने कहा, ‘मैं अपने गेंदबाजी हाथ पर टेप लगा रहा था, जब मैंने (विकेटकीपर दिनेश) बाना को मेरे कमरे में भागते हुए देखा. उन्होंने कहा, ‘तू आज कप्तान है (आप आज कप्तान हो)’. मुझे लगा कि वह मेरी टांग खींच रहा है. मैं लॉबी में गया और (राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के प्रमुख) वीवीएस लक्ष्मण सर और (कोच) ऋषिकेश कानिटकर सर ने कहा कि धुल और रशीद दोनों कोविड-पॉजिटिव हैं और मैं कप्तान बनूंगा.’

सिंधु ने आयरलैंड और युगांडा के खिलाफ भारत का शानदार नेतृत्व किया, लेकिन बांग्लादेश के खिलाफ क्वार्टर फाइनल से एक दिन पहले वह भी कोविड पॉजिटिव हो गए. कप्तान धुल, जिन्होंने गंभीर कोविड प्रभावों का सामना किया, ने सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच जिताऊ पारी खेली और शानदार शतक जड़ा. उप-कप्तान शेख रशीद तो एक वक्त अपने कोच जे कृष्णा राव से बात करते हुए टूट गए. उनके शब्द थे- सर, मुझे लगता है कि मेरा विश्व कप खत्म हो गया है. हो सकता है कि मैं नॉकआउट से पहले उबर ना सकूं.

तब राव ने इस डर को दूर करने के लिए रशीद को उनके माता-पिता के संघर्षों को याद दिलाया. रशीद के पिता बलिशा ने एक वक्त नौकरी खो दी, परिवार का भरण-पोषण तक मुश्किल से हो पा रहा था और उन्हें दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अपने बेटे के क्रिकेट के सपने को जीवित रखा. रशीद ने दमदार वापसी की और सेमीफाइनल मैच में 94 और फाइनल में 50 रन बनाए.

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12 विकेट लेकर टीम के सबसे सफल गेंदबाज विक्की ओस्तवाल सभी मैच खेलने वालों में से एक थे लेकिन बाएं हाथ के इस स्पिनर को काफी मशक्कत के बाद सफलता की खुशी मिली. नौ साल की उम्र में, ओस्तवाल अपने पिता कन्हैया के साथ क्रिकेट खेलने के लिए हर दिन लोनावाला से मुंबई की यात्रा करते थे. उनके बचपन के कोच मोहन जाधव ने कहा, ‘मैंने उन्हें कभी देर से, कभी बहुत जल्दी आते देखा है. एक दिन मैंने पूछा कि वे कहाँ रहते हैं, और विक्की ने उत्तर दिया कि वह लोनावाला से आया है. वह एक मेहनती लड़का है.’

विलक्षण प्रतिभा से भरे राजवर्धन हैंगरगेकर ने टूर्नामेंट में अपने छक्कों से सबका ध्यान खींचा. उन्होंने जून-2020 में अपने पिता को कोविड से खो दिया. फाइनल के प्लेयर ऑफ द मैच राज अंगद बावा को उनके पिता सुखविंदर ने कोचिंग दी. सुखविंदर बावा ने राज को तेज गेंदबाजी करने से बैन कर दिया था. सुखविंदर चाहते थे कि राज एक ऑलराउंडर बने, ना कि एक टेलैंडर. उन्होंने सुनिश्चित किया कि उनका बेटा कभी अभ्यास से न चूके. दिल्ली में जन्मे अंगक्रिश रघुवंशी ने 11 साल की उम्र में गुरुग्राम छोड़ दिया और अपने कौशल को सुधारने के लिए मुंबई चले गए. उनके भाई कृष्ण, जो अब एक टेनिस खिलाड़ी हैं, को बचपन में ब्लड कैंसर का पता चला था. मां मल्लिका कहती हैं- अंगक्रिश हमारे साथ अस्पतालों में सोता था. वे पांच साल सबसे भयानक थे. वह अपने भाई को कभी अकेला नहीं छोड़ेगा. हमने अंगक्रिश को सब कुछ देने की कोशिश की लेकिन कृष्ण के इलाज की प्रक्रिया ने उसे मानसिक रूप से मजबूत बना दिया.’

Tags: Cricket news, Raj Bawa, U-19 WC, Under 19 World Cup, Yash Dhull

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