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क्या इस IPL से बनेगी भविष्य की टीम, आखिर क्यों विराट ले सकते हैं ये चौंकाने वाले फैसले?

क्या इस IPL से बनेगी भविष्य की टीम, आखिर क्यों विराट ले सकते हैं ये चौंकाने वाले फैसले?

(AFP)

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धोनी के रिटायरमेंट के बाद कोहली पर तीनों फॉर्मेंट में कप्तानी का दबाव बढ़ता जाएगा. ऐसे में उन्हें कई फैसले लेने ही होंगे.

राहुल त्रिपाठी, संजू सैमसन, रिषभ पंत, श्रैयस अय्यर, नितिश राना, इशान किशन, पवन नेगी, वाशिंगटन सुंदर, क्रुनाल पंड्या, जयदेव उनादकट, सिद्धार्थ कौल, बासिल थम्पी.अगर आईपीएल के दौरान भारतीय क्रिकेट के युवा खिलाड़ियों की बात करें तो कामयाबी के लिहाज ये 11 खिलाड़ी भविष्य की टी20 इलेवन का हिस्सा हो सकते हैं. इसमें से 4(सैमसन, पंत, नेगी और उनादकट) एक-एक मैच भारत के लिए टी20 में पहले से खेल चुके हैं, लेकिन बाकि 7 खिलाड़ी कभी भी टीम इंडिया का हिस्सा नहीं हो पाये हैं. बहरहाल, आईपीएल 2017 के बाद चयनकर्ता इन खिलाड़ियों को ध्यान में रखते हुए टी20 टीम का चयन जरूर कर सकते हैं.

बोल्ड फैसले लेने से हिचकते हैं चयनकर्ता?
आईपीएल से पहले इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में पहला मुकाबला हारने के बावजूद टीम इंडिया को सीरीज 2-1 से जीतने में कोई परेशानी नहीं हुई. आलम ये रहा है कि इस सीरीज़ के दौरान कप्तान विराट कोहली का बल्ला भी शांत रहा, इससे भी टीम इंडिया के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ा. बहरहाल, अब अगले कई महीनों तक भारत को किसी भी तरह के टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में शिरकत नहीं करनी है. और ऐसे में अहम सवाल ये है कि क्या वक्त नहीं आ गया है कि भारत इस फॉर्मेंट के लिए अपने चयन का फॉर्मूला बदले?

(BCCI)


आज भी इस टीम को महेंद्र सिंह धोनी, युवराज सिंह और सुरेश रैना की जरूरत वाकई में है क्या ? सवाल इन दिग्गजों की काबिलियत या फिर उनके अनुभव पर नहीं, बल्कि चयनकर्ताओं की दूरदर्शिता पर है. 2007 में पहली बार टीम इंडिया को वर्ल्ड कप जीताने में धोनी और युवराज की भूमिका बेहद अहम रही, लेकिन एक दशक बाद भी इन्हीं के दम पर मैच जीतने का सपना देखना अब शायद सही नहीं है.

आईपीएल क्यों बनता टी20 टीम के चयन का पैमाना?
ये हैरानी की बात है कि जिस मुल्क में टी20 फॉर्मेट के सबसे बड़ी और कामयाब लीग यानि आईपीएल का आयोजन हर साल होता है, वहां इस फॉर्मेंट के लिए तेज-तर्रार खिलाड़ी क्यों नहीं मिल पाते हैं? अगर बल्लेबाजी डिपार्टमेंट में चयनकर्ता युवी, धोनी और रैना पर ही उम्मीद टिकाए बैठें है तो गेंदबाजी में भी अमित मिश्रा और आशीष नेहरा की लगातार टीम में वापस लौटना भी ये साबित करता है कि भारत को अभी भी इस मैच में वैसे प्रतिभावान खिलाड़ी नहीं मिल पा रहे हैं. लेकिन, ये अधूरा सच है. अगर मिश्रा और नेहरा बेहतरीन गेंदबाज़ी कर रहें हैं तो उनका साथ देने के लिए युवा खिलाड़ी के तौर पर जसप्रीत बुमराह और युजुवेंद्र चाहल जैसे गेंदबाज सामने आ रहें हैं. ये दोनों युवा खिलाड़ी आईपीएल की ही देन हैं. ये सही है कि इन दोनों ने रणजी ट्रॉफी में भी लगातार अच्छा खेल दिखाया है, लेकिन टीम इंडिया में इनके आने की असली वजह आईपीएल ही रही है.

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पंत जैसे खिलाड़ी को क्यों करना पड़े इंतज़ार?
अब सवाल उठता है तो बाकि खिलाड़ियों के लिए ऐसे विकल्प क्यों नहीं तैयार हो रहे हैं? इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के लिए दिल्ली के रिषभ पंत का चयन हुआ तो हर किसी को लगा कप्तान कोहली बोल्ड फैसेल लेते हुए पंत से पारी की शुरुआत कराएंगे. लेकिन, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. दिल्ली के इस धाकड़ बल्लेबाज ने रणजी ट्रॉफी में अपनी आतिशी बल्लेबाजी से हर किसी को मंत्र-मग्ध किया था, लेकिन पूरे सीजन में 49 छक्के लगाने वाले पंत पर दिल्ली के ही उनके साथी खिलाड़ी और कप्तान कोहली को भरोसा दिखाने में वक्त लग गया. और जब उन्होंने पंत को मौका भी दिया तो उनसे पारी की शुरुआत नहीं करवाई, बल्कि 6ठे नंबर पर बल्लेबाज़ी के लिए भेजा. ऐसे में पंत के बारे में हमें क्या पता चला. कुछ भी नहीं. इसे अजीब इत्तेफाक ही कहा जायेगा कि कोहली मौका देने के मामले में खुद का ही उदाहरण भूल गए. आखिर ये बात हर किसी को पता है कि कैसे कोहली को पहली बार अंडर 19 टीम के साथ कामयाबी के बाद 2008 में टीम इंडिया के लिए मौका दिया गया. वो भी ओपनर के तौर पर. कोहली ने हर मौके पर चौका लगाते हुए 2011 की वर्ल्ड कप टीम में ना सिर्फ अपनी जगह बनायी, बल्कि प्लेंइंग इलेवन में भी सुरेश रैना और यूसुफ पठान जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को पीछे धकेल गए. आखिर, कोहली भी तो ऐसा दांव पंत के लिए खेल सकते थे जो कभी धोनी ने उनके लिए खेला था.

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हार्दिक के उदाहरण से सीखने का है मौका
पंत के अलावा टीम इंडिया को इस फॉर्मेट में कोहली को एक से बढ़कर एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी मिल सकते हैं. कोहली ने खुद देखा है कि लोकेश राहुल को मौका देने पर कैसे उन्होंने ना सिर्फ टी20, बल्कि टेस्ट और वन-डे में भी अपनी जगह बनाई है. कुछ ऐसा ही हाल ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या का है. पंड्या को भी सिर्फ टी20 फॉर्मेंट का खिलाड़ी माना जाता था, लेकिन सिर्फ एक साल के भीतर पंड्या ने ये दिखाया है कि वो तीनों फॉर्मेंट के लायक है. और अब बड़े भाई क्रुनाल भी अपने छोटे भाई की राह पर चलते दिख रहे हैं.

तमाम देश अपना रहें हैं चयन का नया फॉर्मूला
एक ज़माना था जब टेस्ट मैच और वन-डे क्रिकेट के लिए टीमें लगभग एक जैसी हुआ करती थी. लेकिन, धीरे-धीरे वन-डे क्रिकेट के लिए स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों का भी दौर आया. आलम ये रहा कि कई मुल्कों की वन-डे टीमें अपनी टेस्ट टीमों से बिल्कुल जुदा दिखने लगी. हां, दिग्गज खिलाड़ी लगभग दोनों फॉर्मेंट में खेलते रहे. कुछ ऐसा ही ट्रैंड अब टी20 फॉर्मेंट के साथ हो रहा है. इंग्लैंड की टीम भले ही सीरीज़ हार गयी हो, लेकिन हमें नहीं भूलना चाहिए कि 2016 में ये टीम ना सिर्फ टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंची बल्क ख़िताब जीतने के भी बेहद करीब थी. सिर्फ औऱ सिर्फ ब्रैथवेट की एक हैरतअंगेज पारी ने उनका कप छीन लिया. इंग्लैंड की तरह ऑस्ट्रेलिया की टीम भी टी20 फॉर्मेंट के लिए लिए बिल्कुल अलग है. आलम ये रहा कि 23 फरवरी से भारत में कंगारुओं की एक टीम स्टीवन स्मिथ की अगुआई में टेस्ट मैच खेलेंगी, जबकि उससे 1 दिन पहले ऑस्ट्रेलिया में एरॉन फिंच की अगुवाई में राष्ट्रीय टीम टी20 फॉर्मेंट में श्रीलंका के साथ भिड़ी.

टी20 फॉर्मेंट को अब भी भविष्य के लिए नई टीम तैयार करने की दिशा में ही एक अहम कदम की तरफ देखा जाता है. वेस्टइंडीज़ की टेस्ट और टी20 टीम तो बिलकुल अलग ही है. ये दिलचस्प है कि ऑस्ट्रेलिया के विपरीत कैरेबियाई बोर्ड की प्राथमिकता टेसल्ट क्रिकेट ना होकर टी20 फॉर्मेंट है. और आखिर हो भी क्यों ना क्योंकि वो दुनिया में 2 बार वर्ल्ड कप जीतने वाली इकलौती टीम है. और उनके खिलाड़ियों की मांग भी दुनिया की तमाम टी20 लीग में बहुत ज़्यादा है.

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कप्तान भी टी20 के लिए हो सकता है अलग
धोनी के रिटायरमेंट के बाद कोहली पर तीनों फॉर्मेंट में कप्तानी का दबाव बढ़ता जाएगा. ये बात सही है कि धोनी ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि भारत में अलग अलग फॉर्मेंट के लिए अलग-अलग कप्तान का फॉर्मूला नहीं फिट बैठता है लेकिन हो सकता है कि कोहली इससे अलग तर्क रखें. मुंबई इंडियंस को तीन बार आईपीएल ट्रॉफी जिताने वाले रोहित की कप्तानी का दावा भी अब कमज़ोर नहीं है. टेस्ट क्रिकेट को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताने वाले कोहली हो सकता है चयनकर्ताओं के साथ मिलकर ये फैसला ले कि टी20 फॉर्मेंट का कप्तान और टीम अलग बने.

Tags: Champions Trophy 2017, Cricket, India, Indian premier league, Ipl 10, IPL 2017, Mahendra Singh Dhoni, Ravichandran ashwin, Ravindra jadeja, Virat Kohli

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