तो क्या आईपीएल ‌खिलाने के लिए बीसीसीआई ने दबा रखी थी पृथ्वी शॉ के डोप टेस्ट की बात?

पृथ्वी शॉ का डोप टेस्‍ट 22 फरवरी को हुआ और फिर वह फेल हो गए. नतीजा कब आया पता नहीं. 18 जुलाई को शॉ ने स्वीकार कर लिया और 30 जुलाई को उन पर बैन लगा दिया गया. उनका निलंबन शुरू होता है 16 मार्च से...

Shailesh Chaturvedi | News18Hindi
Updated: July 31, 2019, 3:44 PM IST
तो क्या आईपीएल ‌खिलाने के लिए बीसीसीआई ने दबा रखी थी पृथ्वी शॉ के डोप टेस्ट की बात?
पृथ्वी शॉ (फाइल फोटो)
Shailesh Chaturvedi | News18Hindi
Updated: July 31, 2019, 3:44 PM IST
दो घटनाएं हैं, इन्हें सिलसिलेवार जानना जरूरी है. 19 या 20 फरवरी को पृथ्वी शॉ को खांसी-जुकाम होता है. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए शॉ इंदौर में थे. मुंबई टीम का हिस्सा थे. टीम के साथ फिजियो या डॉक्टर होता है. लेकिन पृथ्वी शॉ अपने पिता से बात करते हैं. पिता कहते हैं कि केमिस्ट के पास जाओ, कोई दवा ले लो. पृथ्वी शॉ केमिस्ट के पास जाते हैं. कोई भी दवा मांगते हैं. उसकी रसीद नहीं लेते. दवा का नाम उन्हें याद नहीं. 22 फरवरी को उनका रूटीन डोप टेस्ट होता है. इसमें उन्हें एक फॉर्म पर बताना होता है कि पिछले सात दिनों में क्या कोई दवा ली? वो लिखते हैं – एंटीबायोटिक्स.

डोप टेस्ट में वो फेल हो जाते हैं. बीसीसीआई की प्रेस रिलीज यह नहीं बताती कि डोप टेस्ट का नतीजा कब आया होगा. लेकिन जाहिर तौर पर 16 जुलाई से पहले ही आया होगा, जब पृथ्वी शॉ को बीसीसीआई ने कारण बताओ नोटिस भेजा. 18 जुलाई को पृथ्वी शॉ अपनी गलती मान लेते हैं. इस गलती को बीसीसीआई के एंटी डोपिंग मैनेजर स्वीकार करते हैं. जिस गलती की सजा दो साल हो सकती थी, उसे आठ महीने में तब्दील कर दिया जाता है. इन आठ महीनों की शुरुआत भी 16 मार्च से की जाती है. इस तारीख को चुनने की भी कोई वजह बीसीसीआई नहीं बताती है.

अब दूसरी घटना. 16 मार्च 2017 का दिन था. यूसुफ पठान ने एक सिरप लिया. दो-दो चम्मच सिरप वो 13 मार्च की शाम से ले रहे थे. वो दिल्ली में थे, जहां विजय हजारे ट्रॉफी के मैच खेले जा रहे थे. 16 मार्च को ही उनका डोप टेस्ट हुआ. वो डोप टेस्ट में फेल हो गए. ए सैंपल की रिपोर्ट 12 अप्रैल को आ गई. उसी रोज पता चल गया कि यूसुफ पठान के सैंपल में टरब्यूटलाइन है. यह पदार्थ वाडा की तरफ से बैन है.



यहां तक सब ठीक है. इसके बाद बीसीसीआई ने 27 अक्टूबर तक इंतजार किया. यहां से उन पर कार्रवाई शुरू की गई. उन्हें औपचारिक नोटिस भेजा गया. कार्रवाई पूरी होने तक उन पर किसी भी तरह की क्रिकेट में हिस्सा लेने से रोक लगा दी गई. 8 जनवरी को फैसला किया गया. फैसला यह किया गया कि यूसुफ पठान पर पांच महीने का प्रतिबंध लगा. पांच महीने 15 अगस्त से शुरू हुए. इसकी कोई जानकारी नहीं है कि 15 अगस्त यानी देश को आजादी मिलने की तारीख क्यों चुनी गई. लेकिन इससे एक फायदा जरूर हुआ है. फायदा यह है कि सस्पेंशन या निलंबन 14 जनवरी की आधी रात को खत्म हो गया, जिसके बाद यूसुफ पठान पर आईपीएल में हिस्सा लेने पर कोई रोक नहीं थी.

बीसीसीआई की जांच के साथ है आईपीएल कनेक्शन

यूसुफ पठान के मामले में ए सैंपल की रिपोर्ट 12 अप्रैल को आ गई थी. बीसीसीआई ने छह महीने तक इंतजार किया. 27 अक्टूबर तक इंतजार करके नोटिस भेजा गया. इस दौरान यूसुफ पठान आजाद रहे. उन्होंने रणजी ट्रॉफी में भी हिस्सा लिया. उसके बाद 27 अक्टूबर को नोटिस भेजे जाने का फैसला हुआ. 28 अक्टूबर से उन पर रोक लगा दी गई. पठान ने भी केमिस्ट से दवा मंगवा ली थी. बिल या रसीद नहीं ली थी. दवा का नाम याद नहीं. बैन किया गया, लेकिन बैक डेट से. सस्पेंशन ऐसे दिन खत्म हुआ, जिससे उनका आईपीएल में खेलना तय हो गया.
Loading...

पृथ्वी शॉ के मामले में भी ऐसा ही है. उनका टेस्ट 22 फरवरी को हुआ. आमतौर पर टर्ब्युटलिन के लिए टेस्ट का नतीजा 15 दिन में आ जाता है. चूंकि बीसीसीआई ने जिक्र नहीं किया, इसलिए हम दावे से नहीं कह सकते कि एनडीटीएल ने रिपोर्ट कब दी. अगर उन्होंने अपनी सामान्य प्रक्रिया में रिपोर्ट दी, तो माना जा सकता है कि मार्च में किसी वक्त रिपोर्ट आ गई होगी. उसके बाद नोटिस भेजने के लिए 16 जुलाई का इंतजार क्यों किया गया. ध्यान रखिए, पृथ्वी शॉ आईपीएल में दिल्ली टीम का हिस्सा थे. उन्होंने आखिरी मैच 10 मई को खेला. संभव है कि एनडीटीएल ने ही रिपोर्ट देने में देर की हो, लेकिन यह बात बीसीसीआई को बतानी चाहिए.

इस तरह के और मामलों में क्या हुआ था

ध्यान दीजिए, इसी तरह के दो मामले भारतीय खेलों में और हुए हैं. एक मामला अपर्णा पोपट का था. उन्होंने डी कोल्ड टोटल ली थी. उन्होंने यह स्वीकार भी किया था. 13 से 20 फरवरी 2000 के बीच उनका सैंपल लिया गया. मार्च में फैसला आया और 13 मार्च से उन पर तीन महीने का प्रतिबंध लगा दिया गया. उसमें भी यही पाया गया था कि अपर्णा पोपट ने गलती से दवा ले ली थी. फुटबॉलर सुब्रत पॉल को इसी प्रतिबंधित पदार्थ को लेने का दोषी पाया गया था. तब भी कार्रवाई तेजी से हुई थी. उसके बाद प्रोविजनल सस्पेंशन हटाया भी गया था.

अपर्णा पोपट (फाइल फोटो)


टर्ब्युटलिन के लिए आमतौर पर दो साल तक का प्रतिबंध लगाया जा सकता है. बाकी इस पर निर्भर है कि मामले में आरोपी खिलाड़ी ने किस तरह की दलील दीं. सुब्रत पॉल के मामले में यह साबित हुआ था कि दरअसल, टीम डॉक्टर से पूछ कर दवा ली गई थी. यह साबित होने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया था.

कमजोर हैं शॉ की दलीलें

अभी के मामले में पृथ्वी शॉ की दलीलें बहुत कमजोर हैं. खिलाड़ियों को सबसे पहले इस तरह की जानकारी दी जाती है कि वो कौन-सी दवा लें, कौन-सी नहीं. उन्हें यह भी बताया जाता है कि किसी भी दवा को लेने से पहले टीम डॉक्टर से सलाह लें. पृथ्वी शॉ मुंबई टीम के साथ थे. एक बड़े टूर्नामेंट में खेलने की तैयारी कर रहे थे. इसके बावजूद उन्होंने डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी नहीं समझा. टेस्ट के दौरान फॉर्म पर उन्होंने दवा का नाम भी लिखना जरूरी नहीं समझा. जबकि अगर, कोई सिरप दो दिन पहले खरीदा गया है, तो यकीनन बॉटल उनके कमरे में होगी, जिसे देखकर वो फॉर्म में नाम भरवा सकते थे.

यह सही है कि क्रिकेट में टर्ब्युटलिन का कोई खास असर नहीं होता. लेकिन अगर कोई चीज प्रतिबंधित है और उसके लिए नियम हैं, तो जाहिर तौर पर उनका पालन होना चाहिए. अब बीसीसीआई ने तो अपना फैसला कर दिया है. लेकिन क्या इस फैसले के खिलाफ आईसीसी अपील करेगा? ऐसा लगता तो नहीं. दूसरा सवाल है कि क्या वाडा इस मामले पर ध्यान देगा? अगर वाडा ने मुद्दा उठाया, तो अब भी पृथ्वी शॉ के लिए मुश्किलें सामने आ सकती हैं.

यह भी पढ़ें- चार साल पहले ही आर्चर ने शॉ को कह दिया था 'अनलकी', उसकी है ये सच्‍चाई

कोच चुनने से पहले ही विवादों में फंसी कपिल देव की अध्यक्षता वाली कमेटी
First published: July 31, 2019, 3:40 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...