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CSK vs KKR: धोनी जब आए तब जीत रही थी चेन्नई, फिर बिगड़ गई बात; हार के 5 कारण

धोनी
धोनी

कोलकाता नाइटराइडर्स (Kolkata Knight Riders) ने चेन्नई सुपरकिंग्स (Chennai Super Kings) को 10 रन से हराया. यह आईपीएल 2020 (IPL 2020) में केकेआर की तीसरी जीत और चेन्नई की चौथी हार है. चेन्नई की हार की वजह एमएस धोनी और केदार जाधव की धीमी बल्लेबाजी भी रही. दोनों ने कुल मिलाकर 24 गेंदें खेलीं और इन पर सिर्फ 18 रन बनाए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 8, 2020, 6:54 AM IST
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नई दिल्ली. महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) को दुनिया बेस्ट फिनिशर के रूप में जानती है. यदि टॉप-ऑर्डर अच्छा खेल दिखाए और आखिरी के ओवरों में धोनी क्रीज पर हों, तो जीत की गारंटी मानी जाती है. लेकिन लगता है आईपीएल 2020 में वक्त धोनी (Dhoni) से रूठा हुआ है. कोलकाता नाइटराइडर्स (Kolkata Knight Riders) के खिलाफ बुधवार को चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings) के पास वो सब माकूल स्थितियां थीं, जो जीत के लिए जरूरी होती हैं और क्रीज पर धोनी भी थे. लेकिन जीत मिली कोलकाता नाइटराइडर्स (KKR) के. कोलकाता की कप्तानी दिनेश कार्तिक (Dinesh Karthik) करते हैं, जिनका इंटरनेशनल क्रिकेट करियर धोनी (MS Dhoni) से लंबा है. इस बार कार्तिक का यही अनुभव शायद धोनी पर भारी पड़ गया.

कोलकाता नाइटराइडर्स यानी केकेआर ने बुधवार को चेन्नई सुपरकिंग्स को 10 रन से हराया. केकेआर ने पहले बैटिंग करते हुए 20 ओवर में अपने सभी विकेट गंवाकर 167 रन बनाए. यह इतना बड़ा स्कोर नहीं था कि धोनी की टीम सीएसके (CSK) दबाव में आ जाती. साथ ही, यह इतना छोटा स्कोर भी नहीं था कि केकेआर के गेंदबाज शुरुआत में ही समर्पण कर बैठें. लिहाजा मुकाबला शानदार हुआ. चेन्नई सुपरकिंग्स की हार की 5 मुख्य वजह ये रहीं.
चेन्नई सुपरकिंग्स 12 ओवर तक जीत की ओर बढ़ रही थी. 13वें ओवर की पहली गेंद पर अंबाती रायडू आउट हुए. उनकी जगह एमएस धोनी ने ली. वे 12 गेंद पर 11 रन ही बना सके. रनरेट कम हो गया और टीम दबाव में आ गई. धोनी जब बैटिंग के लिए आए तब चेन्नई को जीत के लिए 47 गेंद पर 69 रन की जरूरत थी और उसके 8 विकेट बाकी थे. वे जब आउट हुए तो चेन्नई लक्ष्य से 39 रन दूर था और उसके पास 21 गेंदें ही रह गई थीं. विकेट भी 6 ही बचे थे. धोनी के क्रीज पर रहते हुए 26 गेंद फेंकी गईं, जिन पर सिर्फ 30 रन बने.
कप्तान धोनी की ही तरह केदार जाधव ने भी बेहद धीमी बैटिंग की. वे 12 गेंद पर 7 रन ही बना सके और नाबाद पैवेलियन लौटे. जाधव जब बैटिंग के लिए आए तब चेन्नई को जीत के लिए 21 गेंद पर 39 रन की जरूरत थी और उसके 6 विकेट बाकी थे. जाधव ने इनमें से आधी से ज्यादा गेंद खेलीं और सिर्फ 7 रन बनाए. ऐसे में बाकी बल्लेबाजों पर बोझ बढ़ गया. रवींद्र जडेजा (8 गेंद पर 21 रन) की तेज पार भी काम नहीं आई.
चेन्नई सुपरकिंग्स ने 12 ओवर के बाद एक विकेट पर 99 रन बना लिए थे. तब यानी अगली 48 गेंदों पर 69 रन बनाने थे और उसके 9 विकेट भी बाकी थे. इसे अच्छी गेंदबाजी कहिए या खराब बल्लेबाजी, लेकिन हकीकत यह है कि चेन्नई की पारी की आखिरी 48 गेंदों में से 20 डॉट रहीं. यानी, इन पर कोई रन नहीं बना. सबसे ज्यादा डॉट बॉल केदार जाधव ने खेलीं. उन्होंने 12 गेंदों का सामना किया और इनमें से सिर्फ 4 गेंदों पर स्कोरिंग शॉट खेले. बाकी आठ गेंदें डॉट रहीं.
यह भी कह सकते हैं कि सीएसके के कप्तान एमएस धोनी अपने विरोधी कप्तान दिनेश कार्तिक की जाल में उलझ गए. दिनेश कार्तिक ने अपने ट्रंप कार्ड और स्टार स्पिनर सुनील नरेन को आखिरी के ओवरों के लिए बचाकर रखा था. यह दांव खासकर धोनी के लिए था, जो बीच के ओवरों में बड़े शॉट नहीं लगाते. नरेन ने इसका फायदा उठाया और किफायती गेंदबाजी कर सीएसके पर दबाव बना दिया. धोनी चाहते तो खुद बैटिंग करने आने की बजाय सैम करेन या ड्वेन ब्रावो को प्रमोट कर नरेन पर पलटवार कर सकते थे, लेकिन वे चूक गए.
कोलकाता की जीत में सिर्फ चेन्नई की गलितयां निकालना ठीक नहीं होगा. सबसे बड़ी हकीकत यह है कि कोलकाता ने ना सिर्फ अपनी रणनीति से चेन्नई को चौंकाया, बल्कि उसके खिलाड़ियों ने प्लान को सलीके के साथ मैदान पर उतारा भी. खासकर, सुनील नरेन और आंद्र रसेल ने गेंदबाजी के लिए मददगार पिच पर योजना के मुताबिक बॉलिंग की और बल्लेबाजों को शॉट खेलने से रोका. इससे चेन्नई के बल्लेबाज दबाव में आते गए और कोलकाता की जीत की राह आसान हो गई.
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