क्रिकेट के आलावा अब दूसरे खेलों में भी सुपरस्टार हैं: राज्यवर्धन सिंह

राजवर्धन सिंह ने बताया कि सर्कार जल्द एक टैलेंट हंट शुरू कर रही है जिसमें 1000 बच्चों को चुना जाएगा और उन्हें हर साल, आठ साल तक पांच लाख रुपए दिए जाएंगे.

Ankit Francis | News18Hindi
Updated: December 8, 2018, 12:41 PM IST
क्रिकेट के आलावा अब दूसरे खेलों में भी सुपरस्टार हैं: राज्यवर्धन सिंह
राजवर्धन सिंह ने बताया कि सर्कार जल्द एक टैलेंट हंट शुरू कर रही है जिसमें 1000 बच्चों को चुना जाएगा और उन्हें हर साल, आठ साल तक पांच लाख रुपए दिए जाएंगे.
Ankit Francis | News18Hindi
Updated: December 8, 2018, 12:41 PM IST
जागरण फोरम के दूसरे दिन खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि हमने 'खेलो इंडिया' के जरिए खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने का काम किया है और आने वाले वक़्त में एक टैलेंट हंट भी शुरू करने वाले हैं. हम इस टैलेंट हंट से 1000 बच्चों को चुनेंगे और उन्हें हर साल आठ साल तक पांच लाख रुपए देंगे जिससे देश में अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभाएं पैदा हो सके. हमने हिंदुस्तानी कोच और सपोर्ट स्टाफ की सैलेरी पर लगी हुई सीलिंग को हटा दिया अब वो अपने देश में भी ट्रेनिंग देकर अच्छे पैसे कमा सकते हैं.

राज्यवर्धन ने कहा कि खेल को सिर्फ जीत और उत्कृष्टता तक ही सीमित नहीं किया जा सकता, खेल व्यक्तित्व और समाज के निर्माण में भी सहायक होते हैं. हार कर जीत के लिए फिर से खड़े होने वाली जो भावना हा वो क्लासरूम में नहीं मिलती ये सिर्फ खेलों की ही देन है. अब खेलोगे-कूदोगे तो बनोगे नवाब वाला वक़्त दूर नहीं रह गया है.

उन्होंने कहा कि हमें खेलों के प्रति देश के लोगों की जो मानसिकता है उसमें बदलाव लाना होगा. हम स्पोर्ट्स को बाहर से खरीद कर नहीं ला सकते उसके लिए हमें खेलना ही होगा. परिवारों, माता-पिता, स्कूल-कॉलेज और सरकारों को इस पर ध्यान देना चाहिए तभी ऐसे देश का निर्माण होगा जिसमे फिट नौजवान रहेंगे.

राज्यवर्धन ने बताया कि खेल राज्यों का विषय है और वो ही इस पर कानून भी बना सकते हैं. साल 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी ने ओलंपिक टास्क फ़ोर्स बनाई थी और आज देश में ऐसी कोई सरकारी संस्था नहीं है जो ओलंपिक पोडियम समिति में मौजूद हो. 'खेलो इंडिया' अपने आप में में एक क्रांतिकार मॉडल है जो स्कूलों में बढ़िया परफोर्मेंस कर रहे एथलीटों को स्टेट तक लेकर जाता है.

राज्यवर्धन ने कहा कि स्कूल में खिलाड़ियों को फिर भी लोग देखने आते हैं लेकिन रीजनल और स्टेट देखने कोई क्यों नहीं आता. हमने प्रतिभाशाली बच्चो को इसके जरिए प्लेटफ़ॉर्म दिया है और रचना बर्मन जैसी खिलाड़ियों को भी हम ही सामने लेकर आए हैं. हमने 10वीं में पढ़ रहे दो खिलाड़ियों को कॉमनवेल्थ गेम्स में खेलने भेजा और उनके बोर्ड एग्जाम के लिए भी सुविधाएं मुहैया कराई.
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