जहां हुआ महात्मा गांधी का जन्म, वहां पैदा हुए इस क्रिकेटर ने बनाया सौराष्ट्र को रणजी चैंपियन

सौराष्ट्र को रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनाने में जयदेव उनादकट का अहम योगदान रहा.

सौराष्ट्र (Saurashtra) ने पहली पारी की बढ़त के आधार पर बंगाल (Bengal) को मात देकर पहली बार रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) अपने नाम की.

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    नई दिल्ली. गुजरात के पाेरबंदर में जन्में जयदेव उनादकट (Jaydev Unadkat) ने सौराष्ट्र को पहली बार रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) का खिताब दिलाकर इतिहास में अपना नाम दर्ज करवा लिया. पोरबंदर वही जगह है, जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म हुआ था. 18 अक्टूबर 1991 को पोरबंदर में उनादकट का क्रिकेट करियर काफी उतार चढ़ाव भरा रहा. आईपीएल (IPL) में मोटी रकम में बिकने के बावजूद नेशनल टीम में अपनी स्‍थायी जगह नहीं बना पाए. इसके बावजूद उन्होंने अपनी काबिलियत से सौराष्ट्र काे चैंपियन बनाकर यह साबित कर दिया कि कुछ मैच उनका भविष्य तय नहीं कर सकते.

    सौराष्ट्र ने बंगाल को पहली पारी के आधार पर मात देकर पहली बार खिताब अपने नाम कर लिया. जिसमें सबसे बड़ा हाथ कप्तान उनादकट का रहा. सौराष्ट्र को रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) चैंपियन बनाने वाले पहले कप्तान की कहानी सिर्फ इतनी नहीं है कि मोटी रकम में आईपीएल में बिकने के बावजूद वह टीम इंडिया के दरवाजे नहीं खोल पाए. बल्कि उनकी जिंदगी से जुड़े कई ऐसे पहलू हैं, जिससे ज्यादातर लोग अनजान हैं.

    टीम में वापसी का इंतजार
    2010 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच से इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखने वाले जयदेव उनादकट दो सालों से टीम से बाहर हैं. उन्होंने टीम इंडिया की ओर से एक टेस्ट, 7 वनडे और 10 टी20 मैच खेले हैं. जयदेव उनादकट ने आखिरी बार साल 2018 में बांग्लादेश के खिलाफ टी20 मैच खेला था. खराब प्रदर्शन की वजह से उनादकट टीम से बाहर हो गए और अबतक वो वापसी नहीं कर पाए हैं.

    क्रिकेटर बनाने में बहन का  हाथ
    जयदेव ने आठ साल की उम्र में क्रिकेटर बनने का सपना देखा था  और उनके इस सपने को पूरा करने में उनकी बहन ने साथ दिया. दरअसल वो क्रिकेट में जितने अच्छे थे, उतने ही अच्छे पढ़ाई में भी थे. उस समय जयदेव की फैमिली चाहती थी कि वह पूरा ध्यान सिर्फ पढ़ाई पर लगाए. मगर दोनों चीजों के बीच संतुलन बैठाना उनके लिए मुश्किल हो रहा था. जिसके बाद उनकी बहन में मदद की. वो अपने क्रिकेट पर पूरा ध्यान लगाते और उनकी बहन एग्जाम की तैयारियों में उनकी मदद करती.  इसके बाद उनका चयन अंडर 19 वर्ल्ड कप की टीम में हुआ. जहां से उन्हें एक अलग पहचान मिली.

    उतरा चढ़ाव भरा रहा करियर
    2010  में ही उनादकट टीम इंडिया के साथ साउथ अफ्रीका दौरे पर चले गए और एक टेस्ट मैच भी खेल लिया. यह उनके करियर का पीक समय माना जा रहा था. मगर अपने पहले मैच में नाकाम होने के बाद उनके लिए दरवाजे बंद हो गए और फिर 2013 में वनडे क्रिकेट से उन्होंने वापसी की. 2013 के बाद उन्होंने वनडे टीम से भी बाहर कर दिया गया. 2016 में उनादकट ने टी20 से टीम इंडिया में फिर वापसी की और 2018 तक टीम का हिस्सा रहे.

    गेंदबाजी में वसीम अकरम ने की मदद
    उनादकट ने एक इंटरव्यू में  कहा कि जब वो कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम में थे, तब उन्होंने टीम के बॉलिंग कोच रहे वसीम अकरम से ही बॉलिंग की टेक्निक्स सीखी. उन्होंने वसीम से ही बॉल को स्विंग करना सीखा था. वसीम अकरम जैसे दिग्गज तक ने सराहा.

    आईपीएल  में लगी रिकॉर्ड बोली
    आईपीएल (IPL) के छठें सीजन के लिए रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने उनादकट को करीब तीन करोड़ रुपये में  खरीदा था. इसके बाद 2014 आईपीएल के लिए दिल्ली डेयरडेविल्स ने 2.8 करोड़ में उन्हें अपने साथ जोड़ा. 2016 में कोलकाता नाइट राइडर्स ने इस खिलाड़ी को 1.6 करोड़ रुपये में अपने साथ जोड़ा. 2017 में राइजिंग पुणे सुपरजायंट्स ने उन्हें 30 लाख रुपये की कीमत में खरीदा. यहां पर उनकी कीमत काफी गिर गई थी. मगर 2018 आईपीएल की बोली में उन्होंने तहलका मचा दिया. राजस्‍थान रॉयल्स ने उन्हें 11.5 करोड़ रुपये में खरीदा. हालांकि वो कुछ खास नहीं कर सके लेकिन इसके बावजूद वो साल 2019 में 8.40 करोड़ की बड़ी कीमत पर बिके. उनादकट एक बार फिर नाकाम रहे. अब इस साल होने वाले आईपीएल में उनादकट को 3 करोड़ रुपये में राजस्थान रॉयल्स ने फिर अपनी टीम में शामिल किया है.

    जयदेव उनादकट का करियर
    एकमात्र इंटरनेशनल टेस्ट मैच में उनादकट ने सिर्फ दो रन बनाए और विकेट नहीं ले पाए थे. सात वनडे मैच में 8 और 10 टी20 मैच में 14 विकेट लिए. वहीं 89 फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनके नाम 327 विकेट है. 94 लिस्ट ए क्रिकेट में 133 विकेट है.

    जयदेव की जिंदगी के दिलचस्प पहलू
    - दसवीं और बारहवीं क्लास में स्कूल टॉपर
    - बाएं हाथ के गेंदबाज, लेकिन बल्लेबाजी दाएं हाथ से करते हैं
    -आईपीएल में 25 रन देकर 6 विकेट लेना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

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