पिता ने करगिल युद्ध में पाकिस्तान को सिखाया सबक, बेटा है धोनी जैसा विकेटकीपर और मैच फिनिशर!

पिता ने जीता करगिल युद्ध, बेटा है अगला धोनी!

ध्रुव जुरेल (Dhruv jurel) अंडर 19 यूथ एशिया कप में भारतीय टीम की कप्तानी करेंगे, उनके पिता नेम सिंह जुरेल 1999 में करिगल युद्ध (Kargil War) लड़े थे

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    एक फौजी जिसने करगिल युद्ध (Kargil War) में हिंदुस्तान के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी. एक फौजी जिसके हौसले के आगे पाकिस्तान को घुटने टेकने पड़े आज देश के उसी शूरवीर का बेटा भारतीय क्रिकेट का उभरता सितारा बन रहा है. हम बात कर रहे हैं ध्रुव जुरेल (Dhruv jurel) की जो अंडर 19 यूथ एशिया कप में भारतीय टीम की कप्तानी करने वाले हैं. ध्रुव जुरेल को अगले महीने वाले कोलंबो में होने वाले अंडर 19 यूथ एशिया कप में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया गया है. बता दें जुरेल के पिता नेम सिंह जुरेन 1999 में करगिल युद्ध लड़ चुके हैं.

    जुरेल हैं धोनी की तरह विकेटकीपर-बल्लेबाज
    ध्रुव जुरेल (Dhruv jurel) महज 18 साल के हैं और उनके अंदर धोनी (MS Dhoni) जैसी ही खासियत हैं. मसलन ध्रुव जुरेल भी धोनी की ही तरह एक विकेटकीपर हैं. वो भी धोनी की तरह मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करते हैं, यही नहीं मुश्किल हालात में कैसे मैच फिनिश करना है ये भी उन्हें बखूबी आता है. हाल ही में इंग्लैंड में खेली गई अंडर 19 ट्राएंगुलर सीरीज में ध्रुव जुरेल ने फाइनल में नाबाद अर्धशतक लगाकर भारत को चैंपियन बनाया था. होव के मैदान पर खेले गए मैच में टीम इंडिया को 262 रनों का लक्ष्य मिला था. भारतीय टीम ने लक्ष्य का पीछा करते हुए दो विकेट जल्दी-जल्दी गंवा दिए थे लेकिन फिर ध्रुव ने नाबाद 59 रन बनाकर टीम को मैच जिताया.

    जुरेल यूथ एशिया कप में भारत की कप्तानी करेंगे


    आगरा में रहने वाले ध्रुव जुरेल (Dhruv jurel) को उनकी विकेटकीपिंग के लिए भी जाना जाता है. वो विकेट के पीछे काफी फुर्तीले हैं साथ ही बल्ले से उनका प्रदर्शन कई क्रिकेट एक्सपर्ट्स को भा चुका है. उनकी छवि मुश्किल हालात में धैर्य से बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी की है.

    ध्रुव के पिता चाहते थे कि वो फौजी बनें


    ध्रुव को फौजी बनाना चाहते थे पिता
    बता दें ध्रुव के पिता नेम सिंह जुरेल उन्हें एक फौजी बनाना चाहते थे. पिता चाहते थे कि बेटा स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) ज्वाइन करे लेकिन ध्रुव ने क्रिकेट को चुना. हालांकि उनके पिता ध्रुव के फैसले से निराश नहीं हैं. अपने बेटे पर पिता नेम सिंह का मानना है कि उन्होंने फौज में रहकर देश की सेवा की और बेटा क्रिकेट खेलकर देश का मान बढ़ाएगा. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए नेम सिंह ने कहा, 'देश के लिए योगदान देना ही सबकुछ है. मैंने करगिल युद्ध में आर्मी की सेवा की और मेरा बेटा भी क्रिकेटर के तौर पर देश की सेवा कर रहा है. ये फील्ड अलग है लेकिन इसका उद्देश्य एक ही है.'

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