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एक मैच पहले तक तूफानी बल्लेबाजी कर रहे ग्लेन मैक्सवेल कैसे हो गए मानसिक बीमार

रवि प्रताप दुबे | News18Hindi
Updated: November 2, 2019, 9:07 PM IST
एक मैच पहले तक तूफानी बल्लेबाजी कर रहे ग्लेन मैक्सवेल कैसे हो गए मानसिक बीमार
ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटर ग्लेन मैक्सवेल ने क्रिकेट से ब्रेक ले लिया है

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (Cricket Australia) ने ग्लेन मैक्सवेल (Glenn Maxewell) के डिप्रेशन के चलते क्रिकेट से ब्रेक लेने के फैसले में उनका साथ देना का वादा किया है

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  • Last Updated: November 2, 2019, 9:07 PM IST
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नई दिल्ली. श्रीलंका (Sri Lanka) के खिलाफ पहले मुकाबले में जब ग्लेन मैक्सवेल (Glen Maxewell) ने 28 गेंद ताबड़तोड़ 62 रन बनाए तो किसी ने ख्वाबों में भी नहीं सोचा होगा कि इस हार्ड हिटिंग बैट्समैन को मानसिक तौर किसी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा होगा. इस स्टार ऑलराउंडर ने मानसिक रूप से अस्वस्थ होने की वजह से क्रिकेट (Cricket) से अनिश्चितकाल के लिए ब्रेक लेने का फैसला किया है. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (Cricket Australia) ने भी मैक्सवेल (Glenn Maxewell) का साथ देते हुए उन्हें बोर्ड से पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया. मैक्सवेल (Glenn Maxewell) ने 7 टेस्ट में 339, 110 वनडे में 2877 और 61 टी-20 में 1576 रन बनाए. टेस्ट और वनडे में उनके नाम एक शतक है. टी-20 में तीन शतकों के साथ 1576 रन बना चुके मैक्सवेल  ने 7 टेस्ट में एक शतक के साथ 339 रन और 110 वनडे में एक शतक के साथ 2877 बनायें है.

कई बड़े खिलाड़ी हो चुके हैं डिप्रेशन का शिकार
दरअसल बीते 15 सालों में क्रिकेट बहुत तेज़ी से बदला है. लगातार बढ़ रहे टूर्नामेंट और अलग अलग T20 लीग की वजह से खिलाड़ियों की फ़िटनेस पर असर पड़ रहा है. आज के क्रिकेटर पहले के मुताबिक काफी संख्या में मैच खेल रहे है. इसमें खिलाड़ी जो एक शहर से दूसरे शहर या देश लगातार सफ़र करते है, परिवार कई कई हफ्ते साथ नहीं होता, दोस्तों से सीमित बातें हो पाती है और नया परिवार बन चुकी टीम में भी गलाकाट प्रतियोगिता होती है. ये ऐसी चीज़ें है जो मज़बूत से मज़बूत खिलाड़ी को भी तोड़ देती है.

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ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ग्लेन मैक्सवेल की गिनती दुनिया के विस्फोटक बल्लेबाजों में की जाती है. (फाइल फोटो)


यही कारण है कि मैक्सवेल से पहले भी कई और खिलाड़ियों ने भी मानसिक थकान और डिप्रेशन की वजह से क्रिकेट से ब्रेक ले लिया या क्रिकेट को बीच में ही छोड़ दिया. इसमें सबसे अहम् नाम दो अंग्रेज़ खिलाड़ियों के हैं. पहले है इंग्लैंड के सफलतम ओपनर्स में से एक रहे मार्कस ट्रेस्कोथिक. 2006 के लम्बे और थकाऊ भारत दौरे के दौरान ही ट्रेस्कोथिक मानसिक रूप से अस्वस्थ रहने लगे हैं. इसके बाद उसी साल ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी ट्रेस्कोथिक ने अचानक अपना नाम वापस ले लिया और बाद में मानसिक समस्या के चलते 2008 में उन्होंने इसी समस्या के कारण इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया. हालांकि ट्रेस्कोथिक काउंटी क्रिकेट खेलते रहे.

ऑस्ट्रेलिया का दौरा बीच में छोड़ चले आए थे जोनाथन ट्रोट
दूसरा अहम् नाम है दक्षिण अफ्रीकी मूल के खिलाड़ी जोनाथन ट्रोट का जिन्होंने इंग्लैंड की तरफ से शानदार खेल दिखाया लेकिन कुछ वक़्त के लिए फॉर्म उनसे क्या रूठी कि वो परेशान रहने लगे और 2013 में ऑस्ट्रेलिया दौरा बीच में ही छोड़ कर वापस आ गये.
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इस श्रृंखला में और भी नाम हैं जैसे इंग्लैण्ड के ही माइकल यार्डी या ऑस्ट्रेलिया के शॉन टेट . इसी साल पाकिस्तान के हारिस सोहेल ने दक्षिण अफ्रीका दौरे को बीच में छोड़ दिया और अपने घर सियालकोट वापस चले आये. हारिस ने यह दौरा छोड़ने से पहले टीम प्रबंधक को बताया कि वह काले जादू की गिरफ्त में हैं.

ग्लेन मैक्सवेल ऑस्ट्रेलिया के धाकड़ टी20 बल्लेबाज हैं


खिलाड़ियों के स्टारडम में छुप जाती है उनकी परेशानियां
यूं तो क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि बोर्ड मैक्सवेल की घरेलू टीम विक्टोरिया के साथ मिलकर मैक्सवेल के मानसिक स्वास्थ्य पर काम करेगा क्योंकि वो एक स्पेशल टैलेंट हैं. दरअसल अगर आप किसी देश के लिए खेल रहे होते है या किसी बड़ी लीग के सुपरस्टार होते है तो दर्शकों को लगता है कि इस खिलाड़ी की लाइफ रॉकस्टार जैसी है लेकिन उस रॉकस्टार की दिक्कतें हम नहीं देख पाते.

वह कितनी मुश्किल ट्रेनिंग कर रहा है, परिवार से कितने दिनों से दूर है, टीम में उसकी किससे बन रही है किससे अनबन है, लगातार सफ़र पर रहने की वजह से वो कितना थक गया है, मीडिया का कितना प्रेशर है, सोशल मीडिया पर क्या कहा जा रहा है, फैमिली बैकग्राउंड क्या है, ये तमाम चीज़े है जो खिलाड़ी के जेहन में लगातार रहती हैं. ऐसे में खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रखना खिलाड़ी के लिए बहुत बड़ी चुनौती रहती है.

क्रिकेट बोर्ड्स को रखना होगा खिलाड़ियों की मानसिक तबियत का ख्याल
आज की जरुरत है कि क्रिकेट बोर्ड्स भी मैन मैनेजमेंट पर ज्यादा ध्यान दें. भारतीय कप्तान विराट कोहली लगातार समय समय पर ब्रेक लेते रहते हैं क्योंकि चाहे वो कितने बड़े प्लेयर हों लेकिन हैं तो आखिर इंसान ही. इसीलिए क्रिकेट बोर्ड्स अहम् खिलाड़ियों को न केवल ब्रेक दे बल्कि सभी खिलाड़ियो के लिए उनके मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रख कर कैम्प्स भी लगाये.

साथ ही इसके अलावा एक चीज़ और मायने रखती है कि खिलाड़ी किस तरह तैयार हुआ है. भारत में आला मकाम पर पहुंचा खिलाड़ी कम उम्र में ज़िन्दगी के बहुत सारे संघर्ष देख कर आगे आता है जबकि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में ज़िंदगी अपेक्षाकृत बेहतर सहूलियत के साथ होती है. इसीलिए चुनौतियों से लड़ने की क्षमता भी अलग अलग होती है.

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First published: November 2, 2019, 8:51 PM IST
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