जिस टीम को खुद पर ही नहीं था भरोसा, वह कैसे बनी वर्ल्ड चैंपियन, 1983 की जीत की अनसुनी कहानियां...

जिस टीम को खुद पर ही नहीं था भरोसा, वह कैसे बनी वर्ल्ड चैंपियन, 1983 की जीत की अनसुनी कहानियां...
कपिल देव की अगुआई में ही भारत ने 1983 का वर्ल्ड कप अपने नाम किया था. (फाइल फोटो)

भारत (India) ने इंग्लैंड (England) में हुए 1983 के वर्ल्ड कप में दो बार की वर्ल्ड चैंपियन वेस्टइंडीज (West Indies) को मात दी थी, जिस पर अब फिल्म बनाई जा रही है

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 18, 2020, 9:00 PM IST
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भारत (India) में आज क्रिकेट को एक धर्म माना जाता है. लोगों में इस खेल के लिए अलग तरह का जुनून है. यह खेल खिलाड़ियों को सिर्फ पहचान ही नहीं देता, बल्कि ग्लैमर और पैसा भी भरपूर देता है. हालांकि देश में क्रिकेट की स्थिति हमेशा से ऐसी नहीं थी. भारत में क्रिकेट के उत्थान की शुरुआत 1983 में वर्ल्ड कप (1983 World Cup) की जीत के साथ हुई थी. एक ऐसी टीम, जिससे किसी को उम्मीदें नहीं थींं. उसने दो बार की चैंपियन वेस्टइंडीज (West Indies) को मात देकर खिताब अपने नाम किया था. टीम की अविश्वसनीय जीत पर ही डायरेक्ट कबीर खान (Kabir Khan) फिल्म बनाने जा रहे हैं. इस फिल्म में कप्तान कपिल देव (Kapil Dev) का किरदार अभिनेता रणवीर सिंह (Ranveer Singh) निभा रहे हैं. इस फिल्म में टीम की जीत की कहानी को दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा. हालांकि हम आपको इस वर्ल्ड कप से जुड़ी कुछ ऐसी कहानियां बताने वाले हैं जो आपने पहले कभी नहीं सुनी होगींं.

टीम को खुद नहीं था जीत का भरोसा
भारतीय टीम (Indian Team) जब वर्ल्ड कप (ICC World Cup 2020)  खेलने लंदन (London) जा रही थी, तब वह खुद इस बात की उम्मीद नहीं कर रही थी कि कप उनके हाथ में होगा. 1983 से पहले भारत (India) ने दो वर्ल्डकप खेले थे और दोनों टूर्नामेंट में वह केवल एक ही मैच जीत पाई थी. साल 1975 में हुए वर्ल्ड कप में भारत ने ईस्ट अफ्रीका (East Africa) को मात दी थी. 11 जून 1975 को खेले गए इस मैच में भारत ने 10 विकेट से जीत हासिल की थी.

यह भी एक कारण था कि भारतीय टीम के खिलाड़ियों को अपनी जीत का भरोसा नहीं था. यही कारण था कि खिलाड़ियों ने वर्ल्ड कप (ICC World Cup) के बाद का प्लान पहले से तैयार किया हुआ था. सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) ने बताया था कि मुंबई (Mumbai) से निकलते हुए खिलाड़ियों का प्लान था कि हमें न्यूयॉर्क (New York) जाना है और रास्ते में वर्ल्ड कप (World Cup) खेलने के लिए लंदन में रुकना है. गावस्कर के इस प्लान में श्रीकांत भी उनके साथ शामिल थे. हालांकि उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया, जिसका उन्हें कोई दुख नहीं था. भारतीय टीम ने वनडे फॉर्मेट क्रिकेट को तब गंभीरता से लेना शुरू किया जब वह 1980 में ऑस्ट्रेलिया गए और वहां 10 वनडे मुकाबले खेले.



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कपिल देव और फिल्म में उनका किरदार निभाने वाले रणवीर सिंह




टीम के साथ नहीं था कोई कोच, डॉक्टर या फिजियो
भारतीय टीम जब आज वर्ल्ड कप खेलने जाती है तो उसके साथ एक पूरा कोचिंग स्टाफ होता है, जिसमें बल्लेबाजी कोच, गेंदबाजी कोच, फील्डिंग कोच के अलावा हेड कोच शामिल होता है. कोचिंग स्टाफ के अलावा एक पूरी मैनेजमेंट टीम भी खिलाड़ियों के साथ जाती है. वहीं मेडिकल स्टाफ होता है जिसमें डॉक्टर, फिजियो और मेंटल कंडीशंस कोच होते हैं. हालांकि आपको जानकर हैरानी होगी कि जब भारतीय टीम 1983 में वर्ल्ड कप खेलने गई थी तब ना तो उनके साथ कोई डॉक्टर था, नो कोई फिजियो और यहां तक की कोई कोच भी नहीं था. टीम के साथ आधिकारी के नाम पर एक शख्स मौजूद था, जिनका नाम था पीआर मान. पीआर मान टीम के मैनेजर के तौर पर वहां गए थे. कोच की गैरमौजूदगी में मोहिंदर अमरनाथ ने यह जिम्मेदारी ली थी, जो कि कपिल देव के साथ मिलकर टीम के बैटिंग और बॉलिंग ऑर्डर और टॉस का फैसला करते थे.

कपिल देव की पत्नी बीच मैच में चली गई थी स्टेडियम से बाहर
कपिल देव ने साल 1980 में रोमी भाटिया से शादी की थी. 1983 वर्ल्ड कप के दौरान वह लंदन में ही थीं. रोमी फाइनल मुकाबला देखने गईं थी. हालांकि भारतीय टीम की बल्लेबाजी के बाद वह काफी निराश थीं. भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करते हुए केवल 183 रन बनाए थे. मैच के दौरान स्टेडियम में वेस्टइंडीज के फैंस भरे हुए थे.

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कपिल देव औऱ उनकी पत्नी रोमी भाटिया


जैसे ही वेस्टइंडीज के बल्लेबाज चौके लगाते फैंस जोर-जोर से चिल्लाने लगते. रोमी इस सबसे काफी परेशान हो गईं थी और उन्हें काफी रोना आया. कुछ देर बाद वह अपना पास किसी और को देकर स्टेडियम से बाहर आ गईं. उस के कुछ समय बाद ही भारतीय बल्लेबाजों ने विकेट लेने शुरू किए. जैसे ही रोमी को इस बारे में पता चला उन्होंने वापस अंदर जाने की कोशिश की. हालांकि बिना पास के उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई.  रोमी ने यह बात कपिल देव को तब नहीं बताई. जब कपिल ने होटल आकर उनसे मैच की बात करने लगे तो वह ऐसा जताती कि उन्होंने पूरा मैच देखा है. एक साल बाद कपिल को सच्चाई पता चली थी.

रिकॉर्ड नहीं हुई थी कपिल देव की ऐतिहासिक पारी
भारत को लीग राउंड में पहली बार वर्ल्ड कप खेल रही जिम्बाब्वे से भिड़ने था. भारत के लिए यह मैच काफी निराशाजनक  रहा. पहले बल्लेबाजी करते हुए जिम्बाब्वे ने 235 रन बनाए थे. हालांकि भारत की शुरुआत बेहद खराब रही. सुनील गावस्कर और के श्रीकांत बिना खाता खोले वापस चले गए. टीम ने 9 रन पर चार विकेट खो दिए थे.

कपिल देव ने जिम्बाब्वे के खिलाफ बनाए थे नाबाद 175 रन


इसके बाद रवि शास्त्री, रोजर बिनी ने कपिल देव का साथ देने की कोशिश की. कपिल देव इस मैच के हीरो रहे, जिन्होंने अकेले दम पर भारत को यह मैच जिताया. भारत ने 138 गेंदों में 175 रन बनाए, जिसमें 16 चौके शामिल थे. यह उस समय का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर था. हालांकि इस मैच की कोई भी विडियो फोटेज मौजूद नहीं है. बीबीसी इस मुकाबले का ऑफिशियल ब्रॉडकास्टर था, लेकिन मैच के दिन वह हड़ताल पर थे जिसके कारण मैच और यह यादगार पारी रिकॉर्ड नहीं हो पाई.

लता मंगेशकर ने रखा था खास कॉन्सर्ट
भारतीय टीम की इस वर्ल्ड कप जीत के बाद भारतीय क्रिकेट में बहुत कुछ बदला. वर्ल्ड कप  से पहले भारतीय खिलाड़ियों को हर एक मैच खेलने के लिए 12,500 रुपए दिए जाते थे. वहीं बीसीसीआई ने जीत के बाद पूरी टीम के लिए दो लाख रुपए का ऐलान किया था. इसके अलावा प्रत्येक खिलाड़ी को एक लाख रुपए दिए गए और यह पैसे कहां से आए यह भी दिसचस्प है. दरअसल लता मंगेशकर को जब भारत की जीत के बारे में पता चला तो उन्होंने भारतीय टीम के लिए एक कॉन्सर्ट का आयोजन किया था. इस दौरान दर्शकों की भरमार थी. इस कॉन्सर्ट से उन्हें जो पैसा मिला वह उन्होंने विश्व विजेता टीम में बांट दिया था, जिससे हर किसी खिलाड़ी को एक-एक लाख रुपए मिले थे.

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First published: January 18, 2020, 9:00 PM IST
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