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सरकारी नौकरी का लेटर फाड़कर क्रिकेट खेलने गया ये भारतीय खिलाड़ी और बदल गई जिंदगी

क्रुणाल पंड्या ने सरकारी नौकरी नहीं क्रिकेट को चुना

क्रुणाल पंड्या ने सरकारी नौकरी नहीं क्रिकेट को चुना

एक खास इंटरव्यू में टीम इंडिया के ऑलराउंडर क्रुणाल पंड्या (Krunal Pandya) ने अपने क्रिकेटर बनने की कहानी बताई

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    नई दिल्ली. क्रुणाल पंड्या (Krunal Pandya) टीम इंडिया के ऑलराउंडर हैं और हार्दिक पंड्या के बड़े भाई भी. इन दोनों क्रिकेटरों की कहानी बेहद ही प्रेरणादायी है. क्रुणाल और हार्दिक पंड्या ने फर्श से अर्श तक का सफर काफी मेहनत करने के बाद तय किया है. एक खास इंटरव्यू में क्रुणाल पंड्या ने खुलासा किया कि उन्हें क्रिकेट में संघर्ष के दौरान सरकारी नौकरी का ऑफर भी मिला था जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया और आज इसी वजह से उनकी जिंदगी बदल गई है.

    जब क्रुणाल ने सरकारी नौकरी का ऑफर ठुकराया
    क्रुणाल पंड्या (Krunal Pandya) ने क्रिकबज के शो स्पाइसी पिच पर कहा, 'उस वक्त स्पीड पोस्ट में सरकारी नौकरी निकली थी. मुझे याद है कि ट्रायल के लिए मुझे लेटर आया. पापा ने कहा कि 25-30 हजार की नौकरी मिल जाएगी. उसी दिन मेरे ट्रायल मैच भी थे सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए. मैंने सोचा कि पिछले दो-ढाई साल में मैंने मेहनत की है लेकिन इस स्पीड पोस्ट की नौकरी के लिए नहीं. मैंने अच्छा क्रिकेट खेलने के लिए मेहनत की. मैंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के ट्रायल मैच खेलने का फैसला किया और मैंने स्पीड पोस्ट की सरकारी नौकरी का लेटर फाड़ दिया. मैंने ट्रायल मैच में अच्छा प्रदर्शन किया और मैं बड़ौदा की टीम में आ गया. हार्दिक उस टीम में पहले से ही था.'

    पंड्या ने आगे कहा, ' सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान हम दोनों भाई जॉन राइट की नजर में आए और उन्होंने देखा कि हम दोनों भाई कितने प्रतिभाशाली क्रिकेटर्स हैं. उन्होंने देखा कि हम दोनों बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों कर सकते हैं. इसके बाद उनकी नजर हम पर रहने लगी और वहीं से हमारी जिंदगी बदल गई.' क्रुणाल ने कहा, 'मुझे लगता है कि उस लेटर को फाड़ना मेरे लिए काफी अच्छा रहा. अगर मैं ट्रायल मैच में नहीं जाता तो आज मेरी जिंदगी दूसरी होती.'

    'एक अच्छा इंसान बनने की वजह से अच्छा क्रिकेटर'
    क्रुणाल पंड्या (Krunal Pandya) ने खुलासा किया कि वो पहले अच्छे इंसान बने, उन्होंने अपनी सोच सही की, जिससे की उनके खेल में भी सुधार हुआ. पंड्या ने कहा, 'जब मैं 22-23 साल का था तो मैं रणजी भी नहीं खेल रहा था और मैं बड़ौदा की टीम में भी नहीं था. आमतौर पर 19 साल की उम्र तक आप अच्छी स्तर पर क्रिकेट खेलने लग जाते हो. हालांकि जब मैं 23 साल का था तो मैं अंडर 25 मैच खेल रहा था कर्नाटक के खिलाफ, जिसमें हमें मैच बचाना था. आखिरी दिन था तो मैं दूसरी ही गेंद पर बोल्ड हो गया. मैं घर पर जाकर बहुत रोया, मुझे लगा कि मैं अच्छा इंसान ही नहीं हूं. मैंने सोचा कि मुझे अच्छा क्रिकेटर नहीं बनना है, मुझे अच्छा इंसान बनना है. मेरी इस सोच ने मेरे खेल में बहुत सुधार किया.'

    सफलता में पिता का अहम योगदान
    क्रुणाल ने (Krunal Pandya) खुलासा किया कि उनकी सफलता में उनके पिता का बहुत बड़ा योगदान है. उन्होंने कहा, 'सिर्फ 6 साल की उम्र में मेरे पिता ने मेरा टैलेंट पहचाना, हम सूरत में रहते थे और पिता ने वडोदरा शिफ्ट होने का फैसला किया. ऐसा शायद ही आपने कहीं सुना हो. अगर मैं अच्छे लेवल पर क्रिकेट खेल रहा होता तब पिताजी ये फैसला लेते तो अलग बात थी लेकिन सिर्फ 6 साल की उम्र में पिता ने मुझे पहचाना तो अपने आप में ही कमाल की बात है.'

    क्रुणाल ने आगे कहा, 'मैं जब 13 साल का था तो मेरे पिता मुझे बाइक पर मैच के लिए लेकर जाते थे. जब मैं 13 साल का हुआ तो मेरे खेल का स्तर नीचे गिर गया. एक समय ऐसा था कि मैं बड़ौदा की टीम में भी नहीं था, हालांकि मेरे माता-पिता ने कभी नहीं कहा कि तुम ऐसा क्यों कर रहे हो? मुझपर कभी दबाव नहीं बनाया.'

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