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BCCI अध्यक्ष सौरव गांगुली ने किया ये काम तो आ जाएगी बड़ी आफत!

भाषा
Updated: November 12, 2019, 2:45 PM IST
BCCI अध्यक्ष सौरव गांगुली ने किया ये काम तो आ जाएगी बड़ी आफत!
बीसीसीआई को गोपाल शंकरनारायणन की 'चेतावनी'

लोढ़ा समिति के सचिव गोपाल शंकरनारायणन (Gopal Sankaranarayanan) ने इशारों ही इशारों में बीसीसीआई (BCCI) को संशोधित संविधान ना बदलने की चेतावनी दी

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नई दिल्ली. बीसीसीआई (BCCI) का नया संविधान तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वाले लोढ़ा समिति के सचिव गोपाल शंकरनारायणन (Gopal Sankaranarayanan) ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर किये गये सुधारों में बदलाव करने की बोर्ड की योजना देश की सर्वोच्च न्यायिक सत्ता का मजाक उड़ाना होगा. शंकरनारायणन का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की अब भी इस मामले में केंद्रीय भूमिका है और उसे उचित कदम उठाने चाहिए नहीं तो बीसीसीआई (BCCI) के प्रशासनिक ढांचे में सुधार करने के उसके सारे प्रयास बेकार चले जाएंगे.

BCCI संशोधित संविधान को बदलने के मूड में!
गोपाल शंकरनारायणन (Gopal Sankaranarayanan) ने कहा, 'अगर ऐसा करने की अनुमति दी जाती है और अगर अदालत में इसे चुनौती नहीं दी जाती और न्यायालय इस पर संज्ञान नहीं लेता है तो इसका मतलब न्यायालय और पिछले वर्षों में किये गए कार्यों का उपहास करना होगा.' संशोधित संविधान में बदलाव का प्रस्ताव शनिवार को सामने आया जब बीसीसीआई के नए सचिव जय शाह ने बोर्ड की एक दिसंबर को मुंबई में होने वाली वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के लिए एजेंडा तैयार किया.

शंकरनारायणन लोढ़ा समिति के सचिव थे


कूलिंग ऑफ पीरियड से जुड़े नियम बदले जाएंगे?
सबसे प्रमुख संशोधनों में पदाधिकारियों के लिए विश्राम की अवधि (कूलिंग ऑफ पीरियड) से जुड़े नियमों को बदलना, अयोग्यता से जुड़े विभिन्न मानदंडों को शिथिल करना और संविधान में बदलाव करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी लेने की जरूरत को समाप्त करना शामिल हैं. शंकरनारायणन (Gopal Sankaranarayanan) ने कहा, 'इसका मतलब होगा कि जहां तक क्रिकेट प्रशासन और सुधारों की बात है तो फिर से पुराने ढर्रे पर लौट जाना. अधिकतर महत्वपूर्ण बदलावों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा.'

1 दिसंबर को मुंबई में होगी बीसीसीआई की एजीएम

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शंकरनारायणन (Gopal Sankaranarayanan) लोढ़ा समिति के सचिव थे जिसे सुप्रीम कोर्ट ने देश के क्रिकेट प्रशासन में सुधार करने के लिए 2015 में नियुक्त किया था. पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर. एम. लोढ़ा इस समिति के अध्यक्ष थे जिसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आर. वी. रवींद्रन और अशोक भान भी शामिल थे. शंकरनारायणन ने कहा कि अगर बदलावों को अपनाया जाता है तो उन्हें अदालत में चुनौती दी जा सकती है. उन्होंने कहा, 'वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि जब वो (बीसीसीआई) (संविधान में) बदलाव करेगा तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट की अनुमति की जरूरत नहीं होगी.'

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First published: November 12, 2019, 2:20 PM IST
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