टेस्ट डेब्यू में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ठोक दिया था शतक, आज है भाड़े का मजदूर

टेस्ट डेब्यू में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ठोक दिया था शतक, आज है भाड़े का मजदूर
लुऊ विंसेंट कैसे बन गए क्रिकेटर से मजदूर?

Lou Vincent Story: एक ऐसा बल्लेबाज जिसने अपने पहले टेस्ट मैच में ही मैक्ग्रा, ब्रेट ली और शेन वॉर्न जैसे गेंदबाजों की धुनाई कर शतक ठोक दिया था, वो आज मजदूरी करता है.

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नई दिल्ली. दाएं हाथ का ये बल्लेबाज जब ओपनिंग पर उतरता था तो गेंदबाजों पर जैसे टूट पड़ता था. फिर चाहे वो गेंदबाज मैक्ग्रा हो, ब्रेट ली हो या फिर कोई और, उसे फर्क नहीं पड़ता था, बस क्रीज पर उतरकर धुनाई शुरू. बात हो रही है न्यूजीलैंड के पूर्व ओपनर लुऊ विंसेंट की, जिन्होंने न्यूजीलैंड के लिए 23 टेस्ट मैच, 9 टी20 और 102 वनडे खेले. लुऊ विंसेंट (Lou Vincent) ने अपने इंटरनेशनल करियर में 6 शतक लगाए. दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने अपने पहले ही टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ की आग उगलती पिच पर शतक ठोक दिया था. यही नहीं साल 2005 में विंसेंट ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 172 रनों की तूफानी पारी खेली, जिसमें से 118 रन तो उन्होंने छक्के-चौके से ही बना डाले थे. ये बल्लेबाज इतना विस्फोटक था लेकिन इसके बावजूद ये खिलाड़ी आज मजदूरी करता है. आइए जानते हैं कि आखिर कैसे न्यूजीलैंड का ये ओपनर क्रिकेटर से मजदूर बन गया.

लु विंसेंट की कहानी
लुऊ विंसेंट (Lou Vincent) का जन्म न्यूजीलैंड के वार्कवर्थ में हुआ. वो मशहूर स्पोर्ट्स पत्रकार माइक विंसेंट के बेटे थे. अपने पिता को क्रिकेट की कवरेज देखकर ही विंसेंट का रुझान क्रिकेट की ओर गया. विंसेंट जब 15 साल के थे तो उनके माता-पिता का तलाक हो गया और वो एडिलेड चले गये. वहां उन्होंने क्रिकेट खेला लेकिन उन्हें सही मौके नहीं मिले और उन्होंने 18 साल की उम्र में दोबारा न्यूजीलैंड लौटने का फैसला किया. न्यूजीलैंड लौटते ही उन्हें 1998 में न्यूजीलैंड के लिए अंडर 19 वर्ल्ड कप खेलने का मौका मिला. यही नहीं उन्हें ऑकलैंड की टीम में भी एंट्री मिल गई, जहां उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेला. अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर विंसेंट ने साल 2001 में न्यूजीलैंड की टीम में अपनी जगह पक्की की और उन्होंने कई अहम पारियां खेल टीम को जीत भी दिलाई. विंसेंट न्यूजीलैंड के अलावा इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट भी खेले, जहां उन्होंने लैंकशर, नॉर्थैम्पटनशर, ससेक्स और वूस्टरशर जैसी काउंटी टीमों के साथ खेलने का मौका मिला.


ऐसे अर्श से फर्श पर आ गए विंसेंट


लुऊ विंसेंट (Lou Vincent) की जिंदगी बिलकुल सही चल रही थी लेकिन साल 2008 से उनसे बहुत बड़ी गलती हो गई. साल 2008 में लुऊ विंसेंट ने काउंटी क्रिकेट में फिक्सिंग की और उसके बाद फिक्सिंग करना उनकी आदत बन गई. विंसेंट ने 2011, 2012 काउंटी सीजन के साथ-साथ इंडियन क्रिकेट लीग में भी फिक्सिंग की. साल 2014 में लुऊ विंसेंट ने पूरी दुनिया के सामने खुद को चीटर मान लिया और उन्होंने फिक्सिंग का दोष कबूल कर लिया. इसके बाद लुऊ विंसेंट पर लाइफ बैन लगा दिया गया और वो इंग्लैंड से वापस न्यूजीलैंड आ गए.

लुऊ विंसेंट करने लगे मजदूरी
लुऊ विंसेंट (Lou Vincent) पर लगे बैन के मुताबिक वो ना क्रिकेट खेल सकते हैं और ना ही किसी भी तरह वो क्रिकेट से पैसे कमा सकते हैं. विंसेंट पर कोचिंग और यहां तक कि स्टेडियम में घुसने पर भी बैन है. पूरी जिंदगी क्रिकेट खेलने वाले लुऊ विंसेंट के पास जीवन चलाने के लिए कोई विकल्प नहीं बचा और न्यूजीलैंड हेराल्ड की खबर के मुताबिक वो एक बिल्डिंग कंपनी के लिए मजदूरी करने लगे. लुऊ विंसेंट बिल्डिंग में रिपेयरिंग का काम करते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक वो प्लैटिनम होम्स कंपनी के साथ जुड़े हुए थे. विंसेंट को घंटे के हिसाब से पैसे मिलते हैं. साफ है करोड़ों रुपये कमाने वाला खिलाड़ी अपनी गलत हरकतों की वजह से पैसों का मोहताज हो गया है.

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