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धोनी का 16वां वार, ऑस्ट्रेलिया के अश्वमेध को करेगा बेकार!

धोनी का 16वां वार, ऑस्ट्रेलिया के अश्वमेध को करेगा बेकार!

विश्व क्रिकेट में कई ऐसी टीमें रही जिन्हें हराना पूरी दुनिया के लिए नामुमकिन हो गया था। चाहे वो वेस्टइंडीज हो, साउथअफ्रीका हो या ऑस्ट्रेलिया, लेकिन सिर्फ एक ही टीम थी जिसने इन सब चैंपियन टीमों का गुरूर तोड़ा।

    नई दिल्ली। विश्व क्रिकेट में कई ऐसी टीमें रही जिन्हें हराना पूरी दुनिया के लिए नामुमकिन हो गया था। चाहे वो वेस्टइंडीज हो, साउथअफ्रीका हो या ऑस्ट्रेलिया, लेकिन सिर्फ एक ही टीम थी जिसने इन सब चैंपियन टीमों का गुरूर तोड़ा और वो टीम है टीम इंडिया और अब फिर से भारतीय टीम एक विश्व चैंपियन टीम का अश्वमेध रोकने को तैयार है।

    ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम, एक ऐसी टीम जिसे हराना दुनिया की किसी भी टीम के लिए पहाड़ चढ़ने से भी मुश्किल होता है। इस टीम ने दुनिया के हर एक कोने में जीत का जबरदस्त डंका बजाया है। क्रिकेट के जंगल के ये वो शेर हैं जो जब चाहे जहां चाहे किसी का भी शिकार करते हैं, और अब अपने घर में ये टीम इंडिया से भिड़ेंगे। उस टीम इंडिया से जिसे आदत है खुले शेर का शिकार करने की।

    इतिहास गवाह है कि जब-जब कोई टीम पूरी दुनिया में डंका बजाने के बाद अपने विजय रथ को लेकर टीम इंडिया की ओर बढ़ी तो हमने ही उन्हें हार का स्वाद चखाया और इस बार फिर से टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया के अश्वमेध को थामने के लिए उन्हीं के घर में पहुंच गई है । पिछले 14 महीनों से ऑस्ट्रेलियाई टीम अपने घर में खेले गए 16 मैचों में एक भी मैच नहीं हारी है। इस दौरान 16 वनडे मुकाबले में 14 में उन्हें जीत मिली और 2 मुकाबले बिना किसी नतीजे के खत्म हुए यानी कंगारुओं का पिछले 14 महीनों में अपने घर में जीत का औसत 87.5 प्रतिशत है।

    ऑस्ट्रेलिया अपने इस अजेय रिकॉर्ड पर चाहे तो इतरा सकता है, लेकिन उनकी ये खुशी बस चंद दिनों की ही है। क्योंकि जब 12 जनवरी 2016 को पर्थ के मैदान पर कंगारू टीम अपने घर में 16 मैचों से चले आ रहे अजेय रिकॉर्ड के साथ उतरेगी तो उनकी हार के पूरे-पूरे योग बन रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के नंबर 16 और अश्वमेध का भारतीय क्रिकेट से एक दिलचस्प और पूराना नाता है।

    2001 में गांगुली ने रोका अश्वमेध: ऑस्ट्रेलिया का सबसे पहला विजयरथ टीम इंडिया ने ही रोका था। 2001 में कोलकाता टेस्ट में टीम इंडिया ने स्टीव वॉ की सेना को औंधे मुंह गिराकर इतिहास रचा। 2001 में भी ऑस्टेलियाई टीम लगातार 16 टेस्ट जीत का रिकॉर्ड बना चुकी थी। लेकिन, टीम इंडिया ने इस पर रोक लगा दी।

     2008 में कुंबले ने रोका अश्वमेध: 2008 में दोबारा एक बार फिर से टीम इंडिया ने ही कंगारुओं के असाधारण जीत के सिलसिले पर ब्रेक लगाई। पर्थ टेस्ट में टीम इंडिया ने नंबर-1 ऑस्ट्रेलिया का विजयरथ रोका था। इस टेस्ट से पहले ऑस्ट्रेलिया की टीम लगातार 16 टेस्ट जीत चुकी थी। लेकिन अनिल कुंबले की सेना ऑस्ट्रेलिया के अश्वमेध को थाम दिया और ऐतिहासिक जीत दर्ज की। ऑस्ट्रेलिया को अपने गढ़ पर्थ में 31 साल बाद जिस टीम से हार मिली वो टीम इंडिया ही थी। यही नहीं इस हार के साथ कंगारुओं का घर में 25 टेस्ट से अजेय रहने का रिकॉर्ड भी भारतीय टीम ने ही तोड़ा।

     2011 में धोनी ने रोका अश्वमेध: 1996 से लगातार हर बार वन-डे वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम को 15 साल बाद फाइनल में पहुंचने से रोकने वाली टीम भी इत्तेफाक से टीम इंडिया ही रही। 2011 में अहमदाबाद में केले गए। क्वार्टफाइल में कंगारुओं को मात देकर टीम इंडिया ने इस टीम को लगातार चौथी बार वर्ल्ड कप जीतने के अरमान पर पानी फेर दिया।

    इतिहास गवाह है कि टीम इंडिया ने देश में ही नहीं विदेशी जमीं पर भी कंगारुओं की बादशाहत खत्म की और उनके अश्वमेध को रोककर अपना लोहा मनवाया और मुमकिन है कि धोनी एंड कंपनी एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया के अश्वमेध को रोकने में कामयाब हो।

    Tags: Anil Kumble, Australia, Cricket, Mahendra Singh Dhoni, Saurav ganguly

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