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टीम इंडिया ने बदला भारतीय क्रिकेट का 86 साल का इतिहास, यूं लिखी सीरीज जीत की पटकथा

News18Hindi
Updated: October 22, 2019, 7:31 PM IST
टीम इंडिया ने बदला भारतीय क्रिकेट का 86 साल का इतिहास, यूं लिखी सीरीज जीत की पटकथा
साउथ अफ्रीका पर टीम इंडिया की सीरीज जीत में उसके तेज गेंदबाजों का प्रदर्शन बेहद अहम रहा है. (AP)

इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि घरेलू जमीन पर टीम इंडिया (Team India) की सीरीज जीत में हमेशा स्पिनरों ने बड़ा योगदान दिया है, लेकिन साउथ अफ्रीका (South Africa) के खिलाफ तेज गेंदबाजों के प्रदर्शन ने इस आंकड़े को भी बदलकर रख दिया.

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  • Last Updated: October 22, 2019, 7:31 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) ने अपने टेस्ट इतिहास का पहला मुकाबला साल 1932 में खेला था. तब सीके नायडू की कप्तानी में भारतीय टीम ने इंग्लैंड का दौरा (England Tour) किया था. हालांकि इस एकमात्र टेस्ट में टीम इंडिया (Team India) को 158 रन से हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद घरेलू जमीन पर भारतीय टीम ने साल 1933 में पहली बार टेस्ट सीरीज (Test Series) की मेजबानी की. दो टेस्ट की सीरीज खेलने के लिए तब इंग्लैंड ने ही भारत का दौरा किया था. इस सीरीज में भी मेजबान टीम को 0-2 से हार मिली, हालांकि इसके बाद हर बीतती टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया का प्रदर्शन बेहतर होता गया और इसमें सबसे अहम योगदान स्पिनरों का रहा.

भौगोलिक परिस्थितियों और बेहतरीन स्पिनरों की जमात के चलते भारतीय पिचों को स्पिनरों की ऐशगाह होने का तमगा मिल गया और यही वजह रही कि देश में होने वाले टेस्ट मैचों में दो लेकर चार स्पिनरों तक को प्लेइंग इलेवन में जगह मिली. इस दौरान तेज गेंदबाजों की भूमिका नई गेंद के शुरुआती 8-10 ओवरों तक ही सिमटकर रह गई. मगर अब विराट कोहली की टीम इंडिया ने भारतीय क्रिकेट के इस 86 साल के इतिहास को बदलकर रख दिया है. ऐसा संभवतः पहली बार है जब भारत में खेली गई तीन मैचों की सीरीज में विपक्षी टीम के गिरे 60 में से 26 विकेट भारतीय तेज गेंदबाजों के खाते में गए हैं. इनमें से 24 तो शमी और उमेश के नाम ही रहे हैं. आइए जानते हैं कि आखिर तेज गेंदबाजों के दम पर टीम इंडिया ने जीत की पटकथा कैसे लिखी.

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भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में 13 विकेट लिए हैं. (AP)


मोहम्मद शमी ने तीन मैचों में लिए 13 विकेट

साल 2018 के बाद से मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) ने 18 टेस्ट मैच खेले हैं, जिनमें उन्होंने 24.62 की औसत से 67 विकेट लिए हैं. मगर खास बात उनका दूसरी पारी में प्रदर्शन है, जिसमें उन्होंने 22.58 की औसत निकाली है. घरेलू जमीन पर ये औसत और बेहतर होकर 17.34 की हो जाती है. इस दौरान वह लगातार स्टंप पर निशाना लगाकर गेंदबाजी करते रहे, जिससे उन्होंने बोल्ड और एलबीडब्‍ल्यू के जरिये अधिकतर शिकार किए. शमी की 164 टेस्ट विकेट में से 30 प्रतिशत बोल्ड के जरिये आई हैं. शमी के टेस्ट डेब्यू करने के बाद से सौ विकेट लेने वाले 18 तेज गेंदबाजों में से केवल वेस्टइंडीज के शैनन गैब्रियल ही ऐसे अकेले गेंदबाज हैं, जिन्होंने शमी से अधिक 32 प्रतिशत शिकार बोल्ड आउट कर बनाए हैं. शमी ने अपने टेस्ट करियर में 49 बोल्ड और 23 एलबीडब्‍ल्यू आउट किए हैं. उन्होंने विकेट के पीछे 45 शिकार किए, जबकि अन्य खिलाड़ियों से 47 बार कैच कराया. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में उन्होंने तीन मैचों में 13 विकेट लिए.

कर्टनी वॉल्‍श के बाद दूसरे तेज गेंदबाज बने उमेश यादव
उमेश यादव (Umesh Yadav) को इस सीरीज में जसप्रीत बुमराह के चोटिल होने के बाद जगह मिली थी. यादव ने इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए 12.18 की औसत से सीरीज में 11 विकेट लिए. ये औसत मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) के सीरीज के औसत 14.77 से भी बेहतर है. हालिया समय में उमेश यादव ने घरेलू जमीन पर असाधारण प्रदर्शन किया है. उमेश अब वेस्टइंडीज के महान गेंदबाज कर्टनी वॉल्‍श के बाद भारतीय जमीन पर लगातार पांच टेस्ट पारियों में तीन या उससे अधिक विकेट लेने वाले दूसरे तेज गेंदबाज बन गए हैं. रांची टेस्ट में तो उमेश यादव ने दोनों पारियों में नई गेंद से अपने पहले ही ओवर में विकेट हासिल किए.
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उमेश यादव को सीरीज के दो मैचों में खिलाया गया, जिनमें उन्होंने 11 विकेट हासिल कर टीम इंडिया की जीत में योगदान दिया. (फाइल फोटो)


अश्विन और जडेजा से बेहतर शमी और उमेश
दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज में भारतीय तेज गेंदबाजी के दबदबे का आलम ये है कि मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) और उमेश यादव (Umesh Yadav) का औसत रविचंद्रन अश्विन (Ravichandran Ashwin) और रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) से भी बेहतर रहा है. अश्विन ने इस सीरीज में 25.26 का औसत निकाला, जबकि जडेजा का औसत 30.69 रहा जो घरेलू जमीन पर उनके करियर औसत से काफी कम है. वहीं उमेश यादव ने 12.18 व शमी ने 14.76 का औसत निकाला.

भारतीय पेसरों ने लिए 26 विकेट, दक्षिण अफ्रीका ने महज 10
इस सीरीज की खास बात ये भी रही कि तेज गेंदबाजी के लिए मशहूर दक्षिण अफ्रीका (South Africa) की ओर से उसके पेसरों ने तीन मैचों में महज दस विकेट हासिल किए, वहीं भारतीय तेज गेंदबाजों ने 26 विकेट चटकाकर अपना दम दिखाया. इस दौरान भारतीय तेज गेंदबाजों ने महज 17.50 की औसत से ये विकेट हासिल किए तो दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाजों का औसत बेहद खराब 70.20 रहा.

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दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रांची टेस्ट में जीत के बाद टीम इंडिया ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में 240 अंक हासिल कर लिए हैं. (AP)


टीम इंडिया ने लिए 60 विकेट, दक्षिण अफ्रीका के हाथ लगे महज 25
सीरीज में जहां भारतीय टीम (Indian Team) ने हर बार दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के दस विकेट लिए तो मेहमान टीम एक बार भी विराट एंड कंपनी को ऑलआउट नहीं कर सकी. भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका के 60 खिलाड़ियों को आउट किया, वहीं दक्षिण अफ्रीकी टीम तीन टेस्ट में भारतीय टीम के 25 विकेट ही हासिल कर सकी.

बुमराह और भुवनेश्वर के महज बैकअप नहीं हैं शमी और उमेश
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में अपने प्रदर्शन से मोहम्मद शमी और उमेश यादव ने दिखा दिया है कि वे सिर्फ जसप्रीत बुमराह और भुवनेश्वर कुमार के बैकअप मात्र नहीं हैं, बल्कि उनमें अपने दम पर टीम को मैच जिताने की क्षमता है. वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा तक ये बात कह चुके हैं कि मौजूदा समय में भारतीय टीम का तेज गेंदबाजी आक्रमण वैसा ही है, जैसा कि 1980 और 90 के दशक में वेस्टइंडीज का हुआ करता था.

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First published: October 22, 2019, 6:16 PM IST
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