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टीम इंडिया में पहली बार मिला मौका, भावुक हुआ भारतीय खिलाड़ी, बोले- याद आ रहे...

बिहार के गोपालगंज के क्रिकेटर मुकेश कुमार अब बंगाल से खेलते हैं. (Twitter)

बिहार के गोपालगंज के क्रिकेटर मुकेश कुमार अब बंगाल से खेलते हैं. (Twitter)

Mukesh Kumar got selected in Team India: रणजी फाइनल्स से पहले ही मुकेश के पिता का ‘ब्रेन स्ट्रोक’ से निधन हो गया. मुकेश ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

रणजी फाइनल्स से पहले ही मुकेश के पिता का ‘ब्रेन स्ट्रोक’ से निधन हो गया.
मुकेश सुबह ट्रेनिंग करते और अस्पताल में अपने पिता के बिस्तर के पास समय बिताते.
मुकेश ने कहा, मेरे सेलेक्ट होने पर मां की आंखों में आंसू थे. घर में हर कोई रो रहा रहा था.

नयी दिल्ली. बंगाल से खेलने वाले तेज गेंदबाज मुकेश कुमार को टीम इंडिया में सेलेक्शन के बारे में तब तक पता नहीं चला था, जब तक उन्हें भारतीय टीम के आधिकारिक वाट्सएप ग्रुप में शामिल नहीं किया गया. मुकेश ने राजकोट से एजेंसी से बातचीत में कहा, ‘‘मैं बहुत भावुक हो गया. सब धुंधला सा लग रहा था. मुझे सिर्फ अपने दिवंगत पिता काशीनाथ सिंह का चेहरा याद आ रहा था. जब तक मैं बंगाल के लिये रणजी ट्राफी में नहीं खेला, तब तक मेरे पिता को नहीं लगा कि मैं पेशेवर तौर पर खेलने के लिये अच्छा हूं. उनको शक था कि मैं काबिल हूं भी या नहीं.’’

बता दें कि रणजी फाइनल्स से पहले ही उनके पिता का ‘ब्रेन स्ट्रोक’ से निधन हो गया. मुकेश सुबह ट्रेनिंग करते और अस्पताल में अपने पिता के बिस्तर के पास समय बिताते. बिहार के गोपालगंज जिले के मुकेश ने कहा, ‘‘आज मेरी मां की आंखों में आंसू थे. वह भी बहुत भावुक हो गयी थीं. घर पर हर किसी ने रोना शुरू कर दिया.’’

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पिता चाहते थे सरकारी नौकरी करूं: मुकेश कुमार
मुकेश तीन बार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) परीक्षा में बैठ चुके हैं, क्योंकि उनके पिता चाहते थे कि वह सरकारी नौकरी करे. सीआरपीएफ तो नहीं लेकिन, मुकेश प्रथम श्रेणी क्रिकेटर के तौर पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय (CAG) के साथ कार्यरत हैं. वह नयी गेंद से बंगाल के सबसे निरंतर गेंदबाज हैं, लेकिन न्यूजीलैंड ए के खिलाफ पहले टेस्ट में पांच विकेट और ईरानी कप के पहले दिन चार विकेट ने उनकी भारतीय टीम में जगह बनाने में अहम भूमिका निभाई.

हुनर भगवान , लेकिन उनके आशीर्वाद पर मेहनत करना जरूरी: मुकेश कुमार
गेंद दोनों तरीकों से स्विंग कराने की उनकी काबिलियत पर इस 28 साल के खिलाड़ी ने कहा, ‘‘आपके हाथों की कलाकारी भगवान की देन है, लेकिन उनके दिए हुए आशीर्वाद पर मेहनत नहीं करोगे तो कुछ नहीं होगा.’’ भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में जाना उनके लिये ज्यादा से ज्यादा सीखने का मौका होगा.

उन्होंने कहा, ‘‘जीवन का मतलब ही सीखते रहना है, जो कभी खत्म नहीं होता. मेरी कोशिश यह सुनिश्चित करने की होगी कि मैं जब तक क्रिकेट खेलूंगा तब तक सीखना जारी रहेगा.’’

Tags: Indian Cricket Team, Shikhar dhawan, Team india

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