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टर्निंग प्वाइंट: 8 घंटे में 35 रुपये कमाने वाला मजदूर बना वर्ल्ड चैंपियन गेंदबाज, सचिन ने दिया 'ऑफर'

टर्निंग प्वाइंट: 8 घंटे में 35 रुपये कमाने वाला मजदूर बना वर्ल्ड चैंपियन गेंदबाज, सचिन ने दिया 'ऑफर'

मुनाफ पटेल चला रहे हैं कोविड सेंटर!

मुनाफ पटेल चला रहे हैं कोविड सेंटर!

जिंदगी की स्क्रिप्ट भगवान कैसे लिखता है ये कोई नहीं जान सकता, जानिए कैसे पत्थर तोड़ने वाले मजदूर पर फिदा हो गए सचिन (Sachin Tendulkar) और उसने टीम इंडिया को वर्ल्ड कप भी जिता दिया

    नई दिल्ली. आज अगर आपका जीवन बेहद ही कठिनाइयों से भरा है. आप दाने-दाने को मोहताज हैं, आपको लग रहा है कि आपका जीवन व्यर्थ है तो निराश होने की जरूरत नहीं, क्योंकि आपके अंदर अगर टैलेंट है तो आप अगले ही पल कामयाब हो सकते हैं और दुनिया को अपने सजदे में झुका सकते हैं. टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज मुनाफ पटेल (Munaf Patel) की कहानी तो कुछ ऐसा ही हौंसला देती है. मुनाफ पटेल ने भारत के 13 टेस्ट, 70 वनडे और 3 टी20 मैच खेले. मैचों के आधार पर मुनाफ का करियर ज्यादा खास नहीं लग रहा है लेकिन ये खिलाड़ी भारत की दो वर्ल्ड कप जीत का हिस्सा रहा है. मुनाफ साल 2007 टी20 वर्ल्ड कप और 2011 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया का हिस्सा रह चुके हैं. साल 2011 वर्ल्ड कप में तो मुनाफ ने अपनी धारदार गेंदबाजी से भारत को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका भी अदा की थी.

    मुनाफ पटेल (Munaf Patel) के वर्ल्ड चैंपियन गेंदबाज बनने की कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं. आपको यकीन नहीं आएगा कि टीम इंडिया का ये पूर्व तेज गेंदबाज कभी पत्थर तोड़ने वाला मजदूर था और उसे 8 घंटे तक काम करने के महज 35 रुपये मिलते थे. तो फिर कैसे मुनाफ पटेल टीम इंडिया में आ गए? आखिर कैसे मुनाफ पटेल की जिंदगी बदल गई? क्या रहा मुनाफ पटेल के जीवन का टर्निंग प्वाइंट, आगे पढ़िए हमारी स्पेशल रिपोर्ट में.

    मुनाफ पटेल का शुरुआती जीवन
    मुनाफ मूसा पटेल (Munaf Patel) का जन्म 12 जुलाई, 1983 को गुजरात के इकहर में हुआ था. मुनाफ के पिता एक मार्बल फैक्ट्री में काम करते थे और वो खुद भी अपने परिवार का पेट पालने के लिए पत्थर तोड़ते थे. मुनाफ पटेल महज 35 रुपये के लिए 8 घंटे तक पत्थर तोड़ते थे. हालांकि मुनाफ पटेल अपने गांव और आसपास के इलाकों में काफी प्रसिद्ध थे, इसकी वजह थी उनकी गेंदबाजी की रफ्तार. उस पूरे इलाके में मुनाफ पटेल जैसी रफ्तार किसी भी गेंदबाज की गेंदों में नहीं थी. हालांकि मुनाफ का क्रिकेटर बनने का सपना दूर-दूर तक नहीं था. पिता ने तो मुनाफ को जाम्बिया भेजने की तैयारी कर ली थी. दरअसल मुनाफ के चाचा जांबिया में काम करते थे और परिवार को गरीबी से बाहर निकालने के लिए पिता ने उन्हें विदेश भेजने की पूरी तैयारी कर ली थी, हालांकि ऐसा हो नहीं पाया.

    ऐसे बदली मुनाफ पटेल की जिंदगी
    मुनाफ पटेल (Munaf Patel) जाम्बिया के पत्थर तोड़ने वाले मजदूर नहीं बन सके और इसकी थे यूसुफ भाई. ये वो शख्स है जिसके एक फैसले ने मुनाफ पटेल की जिंदगी ही बदल दी. यूसुफ नाम का ये शख्स मुनाफ पटेल के घर के पास ही रहता था, जो कि वहां के दूसरे लोगों से पढ़ा-लिखा था. मुनाफ ने पिता के कहने पर पत्थर तोड़ने का फैसला कर लिया था लेकिन यूसुफ ने उन्हें क्रिकेटर बनने के लिए मजबूर किया. मुनाफ पटेल को उन्होंने अपने साथ बड़ौदा चलने के लिए कहा. मुनाफ को बात सही लगी और उन्हों हामी भी भर दी. लेकिन घर पर बवाल हो गया. पिता बिफर गए लेकिन जैसे-तैसे मुनाफ की मां ने उन्हें मना ही लिया.

    मुनाफ का क्रिकेट सफर
    यूसुफ भाई के साथ मुनाफ पटेल (Munaf Patel) बड़ौदा आ गए और उन्होंने इस तेज गेंदबाज को किरण मोरे की एकेडमी में एडमिशन दिला दिया. यही नहीं यूसुफ ने मुनाफ को तेज गेंदबाज के जूते भी दिलाए, उस समय उसकी कीमत 400 रुपये थी. सोचिए 35 रुपये रोज कमाने वाले मजदूर को आप 400 रुपये के जूते खरीदवा देंगे तो उसे ऐसा लगेगा. मुनाफ पटेल ने यूसुफ के उस एहसान को अपने लिए आशीर्वाद मांगा और वो एकेडमी में ट्रेनिंग करने में लग गए. मुनाफ की तेजी ने एकेडमी के बल्लेबाजों के होश उड़ा दिये. कोई मुनाफ की गेंदों से डरकर भाग रहा था, तो कोई उनकी गेंदों को छू तक नहीं पा रहा था. एकेडमी के कोच और पूर्व भारतीय विकेटकीपर किरण मोरे ने जब मुनाफ को देखा तो समझ गए कि उनकी एकेडमी में एक हीरो आ चुका है जो टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनने लायक है.

    डेनिस लिली और स्टीव वॉ बने मुरीद
    20 साल के मुनाफ (Munaf Patel) को किरण मोरे ने चेन्नई स्थित MRF पेस फाउंडेशन भेजा, जिसने उनकी जिंदगी ही बदल डाली. दरअसल मुनाफ पटेल ने महान तेज गेंदबाज डेनिस लिली और स्टीव वॉ जैसे दिग्गजों को अपना मुरीद बना दिया. मुनाफ की रफ्तार के चर्चे अचानक अखबारों की सुर्खियां बन गए. दरअसल 2000 के शुरुआती दौर में टीम इंडिया के पास मुनाफ पटेल जितना तेज गेंदबाज नहीं था. मुनाफ पटेल 144 किमी./घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करते थे, जो कि उस वक्त काफी ज्यादा थी. गुजरात और बड़ौदा की रणजी टीमें मुनाफ पटेल को अपने से जोड़ना चाहती थीं लेकिन मुनाफ को फर्स्ट क्लास मैच खेलने से पहले ही इंडिया ए के लिए चुन लिया.

    सचिन ने दिया मुंबई के लिए खेलने का न्योता
    2003 में मुनाफ (Munaf Patel) ने राजकोट में अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू किया और उन्होंने वहां की पाटा पिच पर न्यूजीलैंड के 5 बल्लेबाजों को ढेर किया. मुनाफ के इस प्रदर्शन से सचिन तेंदुलकर भी प्रभावित हुए और उन्होंन मुनाफ को मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी खेलने का न्योता दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया. इसके बाद मुनाफ पटेल ने 9 मार्च को इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया और 3 अप्रैल को मुनाफ ने वनडे डेब्यू किया. इसके बाद मुनाफ के पास ना तो पैसे की कमी थी और ना ही इज्जत और शोहरत की.

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    Tags: Sachin tendulkar

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