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पिता को लगता था बेटा बनेगा चपरासी, लेकिन टीम इंडिया में बनाई जगह और ठोके 12 शतक

17 साल की उम्र में घर छोड़कर चला गया था ये भारतीय क्रिकेटर

17 साल की उम्र में घर छोड़कर चला गया था ये भारतीय क्रिकेटर

टीम इंडिया (Team India) का ये ओपनर 17 साल की उम्र में घर छोड़कर चला गया था, उसने पार्क में रात बिताई

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    नई दिल्ली. 61 टेस्ट मैच, 3982 रन. 12 शतक और 15 अर्धशतक. ये टीम इंडिया के उस बल्लेबाज के आंकड़े हैं, जिसने मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भारत के लिए ओपनिंग की और उसे मैच भी जिताए. हम बात कर रहे हैं मुरली विजय की, जिन्होंने काफी समय तक भारत की ओपनिंग का जिम्मा संभाला. 36 साल का ये क्रिकेटर आज टीम इंडिया से बाहर जरूर है लेकिन उन्होंने अपने दौर में वो काम कर दिखाया जिसके बारे में उनके परिवार ने सोचा भी नहीं था. क्योंकि उनके पिता को तो लगता था कि उनका बेटा एक चपरासी बनेगा. आइए आपको बताते हैं क्या है मुरली विजय (Murali Vijay) की जिंदगी का दर्द.

    मुरली विजय की कहानी
    1 अप्रैल, 1984 को चेन्नई में जन्मे मुरली विजय (Murali Vijay)  मिडिल क्लास परिवार में जन्मे थे. परिवार आर्थिक तौर पर कमजोर नहीं था लेकिन मुरली विजय जरूर पढ़ाई में कमजोर थे. उनका पढ़ने-लिखने में बिलकुल मन नहीं लगता था और 12वीं क्लास में वो फेल भी हो गए. बोर्ड एग्जाम में फेल होने के बाद मुरली विजय ने अपना घर छोड़ दिया. उनके परिवार को लगा कि फेल होने की वजह से मुरली विजय परेशान हो गए हैं और कहीं वो कुछ गलत कदम ना उठा लें लेकिन मुरली विजय का ये लक्ष्य नहीं था. मुरली विजय ने अपने माता-पिता को भरोसा दिलाते हुए कहा, 'घबराइए नहीं मैं आत्महत्या नहीं करूंगा. मैं अपने मुताबिक रहना चाहता हूं और खुद को पहचानना चाहता हूं.'



    मैदान में सोते थे मुरली विजय
    घर छोड़ने के बाद मुरली विजय (Murali Vijay) दोस्तों के घर गए. कई बार वो चेन्नई YMCA और IIT क्रिकेट ग्राउंड में भी सोए. मुरली विजय क्रिकेट खेलते थे और इसके साथ-साथ वो खर्च चलाने के लिए स्नूकर पार्लर में काम करते थे. मुरली विजय के टैलेंट को टीम इंडिया के मौजूदा गेंदबाजी कोच भरत अरुण ने पहचाना. अरुण ने मुरली विजय को चेन्नई क्रिकेट लीग खेलने का न्योता दिया, जहां उन्होंने सभी को प्रभावित किया. 21 साल की उम्र तक वो तमिलनाडु रणजी टीम में चुनने के लिए तैयार हो गए. लेकिन उनका सेलेक्शन नहीं हुआ, क्योंकि उनके बाल लंबे थे.

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    मुरली विजय (Murali Vijay) ने इसके बावजूद आस नहीं खोई और 2006 में उन्होंने टेस्ट डेब्यू कर दिल्ली के खिलाफ पहली पारी में 59 रनों की अहम पारी खेली. इसके बाद मुरली विजय ने कभी पीछे नहीं देखा. मुरली विजय वनडे क्रिकेट में इतने सफल नहीं हो सके लेकिन आईपीएल में उनके नाम दो शतक हैं.

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