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कभी सोचा नहीं था बीसीसीआई का हिस्सा होगी कोई महिला क्रिकेटर - शांता रंगास्वामी

News18Hindi
Updated: October 11, 2019, 3:13 PM IST
कभी सोचा नहीं था बीसीसीआई का हिस्सा होगी कोई महिला क्रिकेटर - शांता रंगास्वामी
शांता रंगास्वामी भारतीय महिला टीम की पहली कप्तान हैं

शांता रंगास्वामी (Shantha Rangaswamy) उस दौर में क्रिकेट खेलती थी जब महिला क्रिकेट उपेक्षित था और बीसीसीआई (BCCI) से मान्यता नहीं मिली थी.

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बीसीसीआई (BCCI) की नौ सदस्यीय शीर्ष परिषद का हिस्सा बनने जा रही भारत की पूर्व कप्तान शांता रंगास्वामी (Shantha Rangaswamy) ने कहा कि उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि कोई महिला क्रिकेटर पुरुषप्रधान भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) का हिस्सा बनेगी.

रंगास्वामी का भारतीय क्रिकेटर्स संघ (ICA) चुनाव में निर्विरोध चुना जाना तय है. वह बीसीसीआई (BCCI) की शीर्ष परिषद में उसकी महिला प्रतिनिधि होगी.

पुरुषों के गढ़ में रंगास्वामी ने बनाई जगह
पैसठ बरस की रंगास्वामी ने प्रेस ट्रस्ट से कहा ,‘मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि बोर्ड का हिस्सा बनूंगी. मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि कोई पुरुष क्रिकेटर भी इसमें होगा, हमें तो छोड़ दीजिए कुछ लोग लोढा सिफारिशों की आलोचना कर रहे होंगे लेकिन उसी की वजह से बोर्ड में हमें प्रतिनिधित्व मिला है. यह पुरुषों के गढ़ में जगह बनाने जैसा है.’

रंगास्वामी उस दौर में क्रिकेट खेलती थी जब महिला क्रिकेट उपेक्षित था और बीसीसीआई से मान्यता नहीं मिली थी. उन्होंने कहा कि बीसीसीआई में महिला का प्रतिनिधित्व बहुत बड़ा बदलाव है.

पेंशन को लेकर रंगास्वामी का बयान
उन्होंने कहा कि रिटायर हो चुकी अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेटरों को भी रणजी ट्रॉफी क्रिकेटरों के समान पेंशन मिलनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि घरेलू क्रिकेटरों को बीसीसीआई पेंशन मिलनी चाहिये और उनकी मैच फीस में बढोतरी होनी चाहिए.
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रंगास्वामी ने कहा ,‘मैं यह नहीं कहती कि रणजी क्रिकेटरों को पेंशन नहीं मिलनी चाहिये. मेरा सिर्फ इतना कहना है कि महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को उनके समान पेंशन मिलनी चाहिये. घरेलू क्रिकेटरों को अंडर 19 लड़कों के समान मैच फीस मिलना भी सही नहीं है.’ उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 15 साल में महिला क्रिकेट में कोचिंग को बढावा देने के लिये कुछ खास नहीं किया गया.

उन्होंने कहा ,‘कई लेवल दो की महिला कोच लेवल तीन तक नहीं पहुंच सकीं. वे पेशेवर कोचिंग में नहीं जा सकी. मैं यह नहीं कहती कि महिला टीम का कोच पुरूष नहीं हो सकता लेकिन महिलाओं को सहयोगी स्टाफ का हिस्सा होना चाहिये.’

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First published: October 11, 2019, 3:13 PM IST
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