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सौरव गांगुली का बड़ा बयान, कहा-कोई भी पूर्व क्रिकेटर इस काम के लिए आगे नहीं आना चाहता

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Updated: December 2, 2019, 1:28 PM IST
सौरव गांगुली का बड़ा बयान, कहा-कोई भी पूर्व क्रिकेटर इस काम के लिए आगे नहीं आना चाहता
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का बीसीसीआई अध्यक्ष के तौर पर कार्यकाल साल 2024 तक बढ़ सकता है. (पीटीआई)

बीसीसीआई अध्यक्ष (BCCI President) सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने बोर्ड की एजीएम (AGM) में कई अहम फैसले लिए हैं.

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  • Last Updated: December 2, 2019, 1:28 PM IST
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मुंबई. टीम इंडिया (Team India) के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) को बीसीसीआई अध्यक्ष (BCCI President) बने हुए एक महीने से ज्यादा का वक्त हो चुका है. इस दौरान उन्होंने भारत का पहला डे-नाइट टेस्ट (Day Night Test) आयोजित करने में अहम भूमिका निभाई. अब रविवार को हुई बीसीसीआई की एजीएम में भी गांगुली ने कई अहम फैसलों पर मोहर लगा दी है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सौरव गांगुली ने यह भी माना है कि बीसीसीआई संविधान के क्लॉज 38 के चलते देश का कोई भी पूर्व क्रिकेटर बोर्ड में मानद आधार पर सेवाएं नहीं देना चाहता.

बदलना ही चाहिए हितों का टकराव संबंधी नियम
दरअसल, जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने साल 2015-16 में सबसे पहले बीसीसीआई (BCCI) से जुड़े इस मामले की सुनवाई शुरू की थी, तो सबसे बड़ी चिंता यही थी कि पूर्व क्रिकेटर क्रिकेट प्रशासन का हिस्सा नहीं हैं. मगर गांगुली (Sourav Ganguly) की अगुआई वाली बीसीसीआई का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित प्रशासकों की समिति द्वारा शामिल किया गया क्लॉज पूर्व क्रिकेटरों को प्रशासन में शामिल करने के विचार के बिल्कुल विपरीत है. गांगुली के अनुसार, 'हितों के टकराव (Conflict Of Interest) संबंधी नियम का कोई मतलब नहीं है. इसे बदलना ही चाहिए. मैंने पहले भी ऐसा कहा है.'

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बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा है कि क्रिकेट सलाहकार समिति के गठन को लेकर प्रकिया जारी है. (पीटीआई)


कोई पूर्व क्रिकेटर आगे नहीं आ रहा
उदाहरण के तौर पर, 'मान ली‌जिए कि राष्ट्रीय चयनकर्ता का भतीजा टीम इंडिया (Team India) के लिए खेल रहा है तो चयनकर्ता को हितों के टकराव के दायरे में माना जाएगा. लेकिन अगर चयनकर्ता के दोस्त का बेटा जो चयनकर्ता के अपने भतीजे से ज्यादा करीब हो, वो टीम इंडिया के लिए खेल रहा हो तब क्या होगा? ऐसे में कौन ये अनुमान लगा सकता है कि ये हितों के टकराव (Conflict Of Interest) का मामला नहीं है.' हितों के टकराव संबंधी नियम के चलते ही बीसीसीआई (BCCI) क्रिकेट सलाहकार समिति (Cricket Advisory Committee) का गठन नहीं कर पा रही है. कोई भी पूर्व क्रिकेटर इस समिति का हिस्सा बनने के लिए आगे नहीं आ रहा है, क्योंकि चयनकर्ताओं की नियुक्ति के बाद अगले दो साल तक उसके पास करने के लिए कुछ काम नहीं होगा.

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बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली के प्रयासों के चलते ही भारतीय टीम कोलकाता में अपना पहला डे-नाइट टेस्ट मैच खेल सकी थी. (फाइल फोटो)

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हितों के टकराव पर रुख स्पष्ट करना चाहते हैं
क्रिकेट सलाहकार समिति (Cricket Advisory Committee) के बारे में सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने कहा, 'सीएसी (CAC) के पास ज्यादा काम नहीं है. हम लगातार इसके बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन सीएसी का काम चयनकर्ता और कोच की नियुक्ति करने का है. ऐसे में जब आप चयन समिति (Selection Panel) नियुक्त कर देते हैं तो ये चार साल तक चलती है. कोच (Coach) नियुक्त होने के बाद तीन साल का कार्यकाल होता है. ऐसे में फुल टाइम सीएसी की क्या जरूरत है. कुछ दिन इंतजार करते हैं. हम सीएसी बनाएंगे. मैं हितों के टकराव मामले पर एथिक्स ऑफिसर (Ethics Officer) डीके जैन (DK Jain) से मिल चुका हूं. हम किसी व्यक्ति को नियुक्त नहीं करना चाहते जिसकी नियुक्ति खारिज कर दी जाए. हम पहले डीके जैन से बिल्कुल स्पष्ट रुख हासिल करना चाहते हैं कि क्या हितों का टकराव है और क्या नहीं.'

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First published: December 2, 2019, 1:28 PM IST
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