बीसीसीआई ने 400 मैच अधिकारियों को अबतक नहीं दिया पैसा, जानिए चौंकाने वाला सच

बोर्ड ने रणजी ट्रॉफी क्रिकेटरों को उनका मुआवजा भी अब तक नहीं दिया है.  (File Photo)

बोर्ड ने रणजी ट्रॉफी क्रिकेटरों को उनका मुआवजा भी अब तक नहीं दिया है. (File Photo)

अंपायर्स और मैच अधिकारियों को अक्सर टूर्नामेंट खत्म होने के बाद 15 दिनों के अंदर ही पैसों का भुगतान हो जाता था. हालांकि इस बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी को खत्म हुए दो महीने गुजर गए लेकिन अब तक कोई पैसा नहीं मिला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 31, 2021, 8:46 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) छह महीने के अंदर दूसरी बारी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) कराने के लिए तैयार है. हालांकि इस बीच एक बड़ी खबर आई है कि 400 से ज्यादा अंपायर्स, मैच ऑफिशिएल्स, स्कोरर्स और वीडियो एनालिस्ट का पैसा बीसीसीआई के पास बकाया है. इनमें कई मैच अधिकारी ऐसे हैं जिन्हें बीते एक साल से बीसीसीआई ने भुगतान नहीं किया है. इसके अलावा बीसीसीआई ने घरेलू क्रिकेटरों को भी तनख्वाह का भुगतान नहीं किया है.

कोरोना महामारी के चलते बीसीसीआई ने कहा था कि रणजी ट्रॉफी क्रिकेटरों को मुआवजा दिया जाएगा. भारत के घरेलू क्रिकेट सीजन की शुरुआत इस साल जनवरी में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी से हुई थी. इसके बाद विजय हजारे ट्रॉफी और महिलाओं का वनडे टूर्नामेंट खेला गया था. हालांकि अब तक रणजी क्रिकेटरों को उनका मुआवजा नहीं मिला है. न्यू इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार,  बीसीसीआई ने अंपायर्स और टूर्नामेंट के अधिकारियों को बिल जमा करने को कहा था, जो 3 दिन से ज्यादा के नहीं थे. इस मामले में एक अंपायर ने बताया कि अक्सर टूर्नामेंट के खत्म होने के बाद 15 दिनों में ही पैसों का भुगतान हो जाता था लेकिन इस बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी को खत्म हुए दो महीने बीत चुके हैं लेकिन अब तक कोई पैसा नहीं मिला है.

समझा जाता है कि यह देरी इसलिए हुई क्योंकि बीसीसीआई के पास क्रिकेट संचालन जनरल मैनेजर नहीं है. पिछले साल सबा करीम ने बीसीसीआई क्रिकेट ऑपरेशंस पद से इस्तीफा दे दिया था और यह पद अभी तक खाली है. यहां तक कि एक अन्य महाप्रबंधक केवीपी राव जो अंपायर्स और दूसरे मैच अधिकारियों के मामलों को देखते थे, उन्हें भी पिछले दिसंबर में अपने पद से हटने के लिए कहा गया था. भुगतान नहीं होने का असर सबसे ज्यादा उन मैच अधिकारियों पर हो रहा है जो सिर्फ बीसीसीआई से होने वाली कमाई पर ही निर्भर हैं. इनमें से कईयों को पिछले मार्च से ही पैसा नहीं मिला है.

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बीसीसीआई की आम सालाना बैठक पिछले साल दिसंबर में हुई थी जिसमें इस बात पर सहमति बनीं थी कि अधिकारियों का एक वर्किंग ग्रुप बनेगा जो खिलाड़ियों, मैच ऑफिशिएल्स और क्रिकेट से जुड़ी दूसरी चीजों पर फैसला करेगा. एजीएम को खत्म हुए तीन महीने से ज्यादा हो गए हैं लेकिन वर्किंग ग्रुप की कोई चर्चा तक नहीं है. आईपीएल के पिछले सीजन से बीसीसीआई को 4000 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. इसके बावजूद घरेलू मैच अधिकारियों के पैसों का भुगतान नहीं किया.
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