पैगंबर मोहम्मद कार्टून मामले में कूदे शोएब अख्तर, ‘बायकॉट फ्रेंच प्रॉडक्ट’ की अपील की

शोएब अख्तर के नाम 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करने का रिकॉर्ड है.
शोएब अख्तर के नाम 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करने का रिकॉर्ड है.

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर (Shoaib Akhtar) ने पैगंबर मोहम्मद के कार्टून (Prophet Cartoon) मामले में फ्रांस की निंदा की है. उन्होंने ट्वीट कर फ्रांसीसी राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) पर निशाना साधा और फ्रांसीसी सामानों के बहिष्कार (boycott French products) की अपील भी की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 11:01 AM IST
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नई दिल्ली. पैगंबर मोहम्मद के कार्टून (Prophet Cartoon) और फ्रांसीसी सामानों के बहिष्कार की अपील मामले में शोएब अख्तर (Shoaib Akhtar) भी कूद पड़े हैं. पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर ने इस पूरे मामले में फ्रांस की निंदा की है. उन्होंने ट्वीट कर फ्रांसीसी राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) पर निशाना साधा है. फ्रांस में यह विवाद तब गहरा गया जब पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाने वाले टीचर की हत्या कर दी गई थी.

फ्रांस में हाल ही में एक टीचर की नृशंस हत्या (Murder) कर दी गई थी क्योंकि उसने अपने स्टूडेंट्स को पैगंबर मोहम्मद के कार्टून दिखाए थे. इसके बाद हत्यारे को पुलिस ने गोली मार दी. फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने टीचर सैमुएल पैटी की हत्या को 'इस्लामी आतंकवाद' (Islamic Terrorism) करार दिया. उन्होंने कहा कि 'इस्लाम हमारा भविष्य हथियाने का इरादा रखता है, जो कभी नहीं होगा.'

इन घटनाओं के बाद से फ्रांस और मुस्लिम वर्ल्ड (France vs Muslim World) टकरा रहे हैं. मैक्रों ने कहा कि वह कार्टून बनाने या दिखाने के अधिकार का समर्थन करता है. इसलिए मोहम्मद के कार्टूनों को बैन नहीं किया जाएगा.



इसी मामले में शोएब अख्तर भी कूद पड़े हैं. उन्होंने ट्वीट किया,
‘फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों कहते हैं- फ्रांस कॉर्टून बनाने के अधिकार को खत्म नहीं कर सकता है.
वही मैक्रों यह भी कहते हैं- मुस्लिम देशों को बायकॉट फ्रेंच गुड्स की अपील छोड़ देनी चाहिए.
अब यदि आपको नफरत करने की आजादी है, तो हमें भी आपकी नफरत को नकारने की आजादी है.’


शोएब अख्तर को इस ट्वीट पर समर्थन के साथ-साथ विरोध भी झेलना पड़ा. कुछ लोगों ने अख्तर के ट्वीट के जवाब में लिखा कि फ्रांस के सामान का बहिष्कार सही है.



वहीं, कुछ यूजर्स ने लिखा कि पाकिस्तान की औकात नहीं कि फ्रांस के सामान खरीद सके, इसलिए बहिष्कार ही सही रास्ता है. एक अन्य यूजर ने लिखा कि पाकिस्तानियों के पास इतने पैसे ही नहीं है कि वे फ्रांंस के महंगे सामान खरीद सकें.
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