महेंद्र सिंह धोनी से बेहतर कप्तान क्यों है सौरव गांगुली, पार्थिव पटेल ने बताई वजह

महेंद्र सिंह धोनी से बेहतर कप्तान क्यों है सौरव गांगुली, पार्थिव पटेल ने बताई वजह
सौरव गांगुली ने दिया था धोनी को भारतीय टीम में मौका

पार्थिव पटेल (Parthiv Patel) ने सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) के कप्तान रहते भारतीय टीम में डेब्यू किया था

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नई दिल्ली. भारतीय टीम में बेहद कम उम्र में डेब्यू करने वाले पार्थिव पटेल (Parthiv Patel) ने अपने करियर में कई कप्तानों के साथ क्रिकेट खेला. उन्होंने सौरव गांगुली की कप्तानी में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था और उनका मानना है कि गांगली पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से ज्यादा प्रभावशाली कप्तान हैं.

मुश्किल समय में गांगुली ने टीम को संभाला

स्टार स्पोर्ट्स के शो 'क्रिकेट कनेक्टड' में पार्थिव से जब सवाल पूछा गया धोनी या सौरव गांगुली कौन सबसे प्रभावी भारतीय कप्तान है तो उन्होंने गांगुली को चुना. उन्होंने कहा, ''इन दोनों कप्तानों के बीच कंपीटिशन सही है. एक कप्तान ने बहुत सारे खिताब जीते हैं, जबकि दूसरे कप्तान ने टीम बनाई है. जब सौरव गांगुली कप्तान बने, उसके बाद 2000 में भारतीय क्रिकेट टीम काफी मुश्किल समय से गुजर रही थी ऐसे में वह गांगुली ही थे, जिन्होंने मैच फिक्सिंग स्कैंडल के बाद टीम को बाहर निकाला और नई टीम का निर्माण किया.



गांगुली को बताया ज्यादा प्रभावशाली
पार्थिव ने आगे कहा, 'सौरव गांगुली ने ऐसी टीम बनाई, जिसने विदेशों में सफलता हासिल की. ऐसा नहीं है कि हम पहले नहीं जीत रहे थे, लेकिन हमने ऑस्ट्रेलिया में हेडिंग्ले में जीत हासिल की, इसके बाद टीम पाकिस्तान गई और वहां भी टेस्ट सीरीज में जीत हासिल की. हमने विदेशों में बड़े टेस्ट मैच जीते. 'अगर दक्षिण अफ्रीका में 2003 के विश्व कप की बात करें तो कोई भी यह नहीं सोच रहा था कि भारतीय टीम फाइनल में पहुंचेगी. लेकिन ऐसा हुआ.'

पार्थिव ने गांगुली के चुनते हुए कहा, 'अगर आप धोनी की बात करते हैं तो उन्होंने कई सारी खिताब जीते हैं. वह इकलौते ऐसे कप्तान हैं, जिन्होंने इतनी सारी आईसीसी ट्रॉफी जीती हैं. मेरे लिए दादा बेहतर कप्तान हैं क्योंकि उन्होंने जीरो से शुरू किया और एकदम नई टीम बनाई.'

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हर खिलाड़ी को भरोसा दिलाते थे सौरव गांगुली
पार्थिव ने बताया कि गांगुली हर खिलाड़ी से जुड़े हुए थे. उन्होंने कहा,  'वह हमें अपने कमरे में बुलाते थे और खिलाड़ियों के प्रति अपना विश्वास दिखाते थे. वह हमेशा कहते थे कि चाहे जो हो वह हमारे साथ हैं और डरने की जरूरत नहीं है. मैं जब ब्रिस्बेन में नई गेंद के खिलाफ खेल रहा था, उन्होंने शतक लगाया था. मैं जेसन गिलेस्पी के खिलाफ खेल रहा था और हर गेंद के बाद वो मेरे पास आते और मेरी बल्लेबाजी की तारीफ करते थे. ऐसा करने से काफी फर्क पड़ता है और वो यह मेरे साथ नहीं, बल्कि सभी खिलाड़ियों के साथ करते थे.'
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