ये है भारतीय क्रिकेट का नया 'वंडर बॉय'

समय समय पर भारतीय क्रिकेट में उभरने वाली किशोर प्रतिभाएं क्रिकेट से जुड़े लोगों को ख़ास रोमांच प्रदान करती रही हैं, जिसमें मुंबई क्रिकेट का बहुत बड़ा योगदान रहा है.

Ajay Raj | News18Hindi
Updated: January 13, 2018, 9:42 AM IST
ये है भारतीय क्रिकेट का नया 'वंडर बॉय'
पृथ्वी पंकज शॉ
Ajay Raj | News18Hindi
Updated: January 13, 2018, 9:42 AM IST
भारतीय क्रिकेट में समय समय पर उभरने वाली किशोर प्रतिभाएं क्रिकेट से जुड़े लोगों को ख़ास रोमांच प्रदान करती रही हैं और इसमें मुंबई क्रिकेट का बहुत बड़ा योगदान रहा है. 1985 में मुंबई के सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली की जोड़ी ने 'हैरिस शील्ड' में 600 प्लस की साझेदारी निभाकर सबको चौंकाया था, तो इसके करीब 25 वर्ष बाद मुंबई के ही सरफराज़ खान ने स्कूली क्रिकेट में 439 रन का निजी स्कोर बनाकर एक नया कीर्तिमान रच दिया. जबकि 2010-11 सीजन में मुंबई के ही एक अन्य स्कूली छात्र अरमान जाफर ने 498 रन की पारी खेलकर एक नया रिकॉर्ड बना डाला.

लेकिन वर्ष 2014 में हैरिस शील्ड टूर्नामेंट में मुंबई के एक 14 वर्षीय किशोर ने बल्ले से कुछ ऐसा पराक्रम दिखाया जो बड़े-बड़े विशेषज्ञों की निगाह में भी कल्पनातीत था. सिर्फ 330 गेंदों में रिजवी स्प्रिंग फील्ड स्कूल की ओर से खेलने उतरे इस लड़के ने 85 चौकों और पांच छक्कों सहित 546 रन ठोक दिये थे, जो कि माइनर क्रिकेट में आज तक की तारीख में बना वर्ल्ड का सर्वाधिक निजी स्कोर था. सेंट फ्रांसिस स्कूल टीम के विरुद्ध यह वर्ल्ड रिकॉर्ड वाली पारी खेलने वाले बल्लेबाज़ का नाम है पृथ्वी पंकज शॉ.

स्कूली क्रिकेट में बड़े बड़े धमाके करने वाले कई किशोर वक्त की आंधी में गुम होते देखे गये हैं, लेकिन पृथ्वी शॉ ने हैरिस शील्ड से शुरू हुए अपने कामयाबी के सफर को अंडर-19 अंतर्राष्ट्रीय मैचों के बरास्ते सीनियर प्रथम श्रेणी के टूर्नामेंटों रणजी और दिलीप ट्रॉफी के स्तर तक बाकायदा पहुंचा कर यह साबित कर दिया है कि स्कूली स्तर पर उन्होंने जो चौंकाने वाली बल्लेबाज़ी की थी, वह कोई तीर या तुक्का नहीं था. पृथ्वी ने अपने बल्ले से जो स्थायित्वपूर्ण प्रदर्शन किया है, उसकी बिना पर उन्हें भारतीय क्रिकेट के नये 'वंडर बॉय' की उपमा दे दी गई है.

पहले ही मैच में बने हीरो

लेकिन 9 नवंबर,1999 को थाने, महाराष्ट्र में जन्मे इस युवा ने मैच की पहली पारी में चार रन पर आउट होने के बाद दूसरी पारी में शानदार शतक (120) जमाकर साबित कर दिया कि उनकी उम्र भले ही कम हो, पर सीनियर क्रिकेट के लिहाज से उनकी काबिलियत में कोई कमी नहीं है. इस पारी में पृथ्वी ने 232 मिनट में 175 बॉल खेलकर 13 चौके व एक छक्के की मदद से 120 रन का मैच विनिंग प्रदर्शन किया और उन्हें ही 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया.

इसके बाद रणजी फाइनल में गुजरात के खिलाफ दो पारियों में 71 और 44 के स्कोर बनाकर पृथ्वी ने एक बार फिर दिखाया कि 17 वर्ष की उम्र में वे दिमागी रूप से पूरी तरह मजबूत और मेच्योर्ड हैं.  सितंबर, 2017 में इंडिया 'रेड' की ओर से दिलीप ट्रॉफी फाइनल में इंडिया ब्लू के खिलाफ खेलते हुए पृथ्वी ने 154 रन की बेहतरीन पारी खेली. इसके साथ ही उन्होंने अपना नाम उन चुनिंदा बल्लेबाजों में लिखा लिया जिनके नाम रणजी तथा दिलीप ट्रॉफी दोनों ही टूर्नामेंटों में डेब्यू मैच में शतक का रिकॉर्ड है.

इंगलैंड की अंडर-19 टीम के विरुद्ध वन-डे सीरीज के पहले दो मैचों में क्रमश: 9 तथा 12 के स्कोर पर आउट होने के बाद पृथ्वी अपने छोटे से कॅरियर में संभवत: पहली बार आलोचना के घेरे में आये थे. लेकिन इस नाजुक मोड़ पर टीम के कोच राहुल द्रविड़ उनके बचाव में मजबूती से खड़े दिखे. तीसरे मैच में ड्रॉप होने के बाद जब सीरीज़ के चौथे मैच में वे टीम में वापस लौटे तो उन्होंने सिर्फ 89 गेंदों पर 105 रन की पारी खेल डाली.

फिलहाल पृथ्वी ने सिर्फ नौ प्रथम श्रेणी मैच खेले हैं और इनमें वे पांच शतक जमा चुके हैं. पृथ्वी की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि उन्होंने अभी तक कामयाबी को अपने दिमाग पर हावी नहीं होने दिया है. जब एक पत्रकार ने उनकी तुलना सचिन तेंदुलकर से की तो पृथ्वी ने उसे बड़ी परिपक्वता से जवाब दिया, 'सचिन सर मेरे आदर्श हैं, उनके साथ मेरी क्या बराबरी, उनके स्तर तक पहुंचने के लिये तो मुझे कई जन्म लेने पड़ेंगे.'

जबकि अंडर-19 आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप की जीत उन्हें भारतीय क्रिकेट में स्थापित करने का जरिया बन सकती है.

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