राहुल द्रविड़ का अंधविश्वास: बेडरूम में करते थे बैटिंग प्रैक्टिस, सीधे पांव पर पहनते थे ये चीज

राहुल द्रविड़ का अंधविश्वास: बेडरूम में करते थे बैटिंग प्रैक्टिस, सीधे पांव पर पहनते थे ये चीज
राहुल द्रविड़ भी थे अंधविश्वासी

राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) ने भारत के लिए 164 टेस्ट और 344 वनडे मैच खेले, उन्होंने वनडे और टेस्ट फॉर्मेट में 10 हजार से ज्यादा रन बनाए

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नई दिल्ली. ये बल्लेबाज जब क्रीज पर कदम रखता था तो एक विश्वास जागता था, एक ऐसा विश्वास जो विरोधी खेमे की उम्मीदों को तोड़कर रख दे. गेंदबाज कोई भी हो, वो कितनी भी तेज गेंद फेंके, स्पिनर कितनी भी टर्न कराए लेकिन ये बल्लेबाज विकेट पर अंगद के पैर की तरह जम जाता था. हम बात कर रहे हैं क्रिकेट की दीवार राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) की जिन्होंने अपने इंटरनेशनल करियर में कई ऐसी पारियां खेली जिसपर आज हर हिंदुस्तानी क्रिकेट फैन को नाज है. क्रिकेट के असर जेंटलमैन कहे जाने वाले राहुल द्रविड़ ने भारत के लिए 164 टेस्ट मैच खेले, उन्होंने 344 वनडे मैचों में भी हिस्सा लिया और उनके रिकॉर्ड ऐसे थे कि अच्छे-अच्छे बल्लेबाजों के पसीने छूट जाएं.

बेजोड़ तकनीक और संयम
आपने कई ऐसे क्रिकेटर देखे होंगे जो कि बेहद टैलेंटेड होते हैं. वो पल भर में विरोधी टीमों को तबाह कर देते हैं लेकिन उनके अंदर संयम की कमी होती है. लेकिन राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) संयम और बेजोड़ तकनीक के मालिक थे. विरोधी पर कब आक्रमण करना है और कब उसका सम्मान करना है ये शायद राहुल द्रविड़ से ज्यादा अच्छे तरीके से कोई नहीं जानता था. यही वजह है कि द्रविड़ ने 36 टेस्ट शतक लगाए और वनडे में उनके बल्ले से 12 शतक निकले. द्रविड़ ने 52.32 के बेहतरीन औसत से 13288 टेस्ट रन बनाए और वनडे में उन्होंने 39.16 की औसत से 10889 रन जोड़े.

राहुल द्रविड़ की मेहनत और टोटके



जाहिर सी बात है राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) ने इन बेमिसाल आंकड़ों तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत की. दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने खेल के हर पहलू पर ध्यान दिया. उन्होंने घंटों नेट्स पर प्रैक्टिस की लेकिन अपनी सफलता के लिए वो कुछ टोटके भी करते थे. आप लोगों को यकीन नहीं होगा कि राहुल द्रविड़ जैसा क्रिकेटर भी अंधविश्वासी था. वो मैच में अच्छे रन बनाने के लिए कई अजीब चीजें टोटके करते थे.



नया कपड़ा पहनते थे द्रविड़
राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) हर टेस्ट में एक ना एक नया कपड़ा पहनकर उतरते थे. मतलब उनके पास कुछ ना कुछ नई चीज होती थी. यही नहीं राहुल द्रविड़ जब ग्राउंड के अंदर बल्लेबाजी करने आते थे तो वो हमेशा अपना दांया पांव पहले अंदर रखते थे. बल्लेबाजी के लिए तैयार होते वक्त राहुल द्रविड़ सबसे पहले सीधे पांव पर थाई पैड पहनते थे. यही नहीं वो नई सीरीज की शुरुआत में कभी भी नए बल्ले का इस्तेमाल नहीं करते थे.

रात में उठकर प्रैक्टिस करते थे द्रविड़
आमतौर पर बल्लेबाज मैच से पहले नेट्स में बल्लेबाजी का अभ्यास करते हैं लेकिन राहुल द्रविड़ होटल के कमरे या फिर अपने बेडरूम में भी प्रैक्टिस करते थे. द्रविड़ ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब उन्हें नींद नहीं आती थी तो वो अपने बल्ले को उठाते थे और शीशे के सामने शैडो प्रैक्टिस करते थे. कई बार बैट को होटल के फर्श पर मारने से आवाज होती थी और उनके साथी खिलाड़ी उन्हें चिढ़ाते थे. द्रविड़ ने ये भी बताया कि जब उनकी शादी हुई थी तो उनकी पत्नी विजेता को लगता था कि उन्हें नींद में क्रिकेट खेलने की बीमारी है. क्योंकि राहुल द्रविड़ आधी रात को भी उठकर बल्ला उठाकर अपने स्टांस पर काम करने लगते थे.

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