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BCCI ने 13 साल से रणजी चैंपियन टीम की इनामी राशि नहीं बढ़ाई, जानें MP की टीम को कितने करोड़ मिले

Ranji trophy final: मध्य प्रदेश की टीम मुंबई को हराकर पहली बार चैम्पियन बनी. जानिए उसे कितनी प्राइज मनी मिली. (PTI)

Ranji trophy final: मध्य प्रदेश की टीम मुंबई को हराकर पहली बार चैम्पियन बनी. जानिए उसे कितनी प्राइज मनी मिली. (PTI)

Ranji Trophy prize money: मध्य प्रदेश ने रणजी ट्रॉफी के फाइनल में मुंबई को हराकर पहली बार खिताब अपने नाम किया. चैम्पियन बनने पर एमपी की टीम को प्राइज मनी के तौर पर आईपीएल की तुलना में काफी कम पैसे मिले हैं. आईपीएल और रणजी ट्रॉफी दोनों का आयोजन बीसीसीआई ही करती हैं. पिछले 10 सालों में आईपीएल खेलने वाले खिलाड़ियों पर पैसों की बरसात हुई. वहीं, बीसीसीआई ने 13 साल से रणजी ट्रॉफी चैंपियन टीम की इनामी राशि में बढोत्तरी नहीं की है.

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नई दिल्ली. रणजी ट्रॉफी को उसका नया चैम्पियन मिल गया. मध्य प्रदेश ने बैंगलुरू के उसी चिन्नास्वामी स्टेडियम में खिताब जीतकर इतिहास रचा, जिसमें 23 साल पहले टीम चैम्पियन बनते-बनते रह गई थी. टीम के वर्तमान कोच चंद्रकांत पंडित, तब टीम के कप्तान थे. उनके मन में ही उस हार की कसक अब तक बनी हुई थी. तभी मध्य प्रदेश के पहली बार रणजी ट्रॉफी चैम्पियन बनते ही उनकी आंखों से भी आंसू बह निकले. मध्य प्रदेश को फाइनल में 108 रन का टारगेट मिला था, जिसे उसने 4 विकेट खोकर हासिल कर लिया. रणजी ट्रॉफी का चैम्पियन बनने पर मध्य प्रदेश को प्राइज मनी के तौर पर बीसीसीआई की तरफ से 2 करोड़ रुपये मिले जबकि रनर-अप रही मुंबई की टीम भी मालामाल हो गई, उसे भी इनाम के तौर पर 1 करोड़ रुपये मिले हैं.

मध्य प्रदेश के लिए फाइनल में शानदार पारी खेलने वाले शुभम शर्मा प्लेयर ऑफ द मैच रहे. उन्होंने फाइनल की पहली पारी में 116 रन बनाए थे तो दूसरी में 30 रन की अहम पारी खेली. उन्हें बतौर इनाम 25 हजार रुपये मिले. वहीं, पूरे सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले मुंबई के बल्लेबाज सरफराज खान प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे और उन्हें इनाम के तौर पर 1 लाख रुपये मिले.

मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने भी पहली बार रणजी ट्रॉफी जीतने वाली टीम को 2 करोड़ रुपये इनाम देने की घोषणा की है. यानी एमपी टीम को कुल 4 करोड़ रुपये इनाम के तौर पर मिलेंगे. यह तो हो गई टीमों को मिलने वाली प्राइज मनी की बात. रणजी ट्रॉफी खेल रहे खिलाड़ियों को मैच फीस मिलती है.

मोटे तौर पर मैच खेलने की संख्या के आधार पर खिलाड़ियों की मैच फीस तय होती है. इसके लिए तीन अलग-अलग स्लैब होते हैं. 20 मैच से कम, 21 से 40 और 40 से अधिक मैच खेलने वाले खिलाड़ी. इस आधार पर रणजी ट्रॉफी में हर दिन की फीस तय होती है. अगर किसी खिलाड़ी ने 20 मैच से कम खेले हैं और वो प्लेइंग-XI का हिस्सा बना है तो उसे प्रति दिन मैच फीस के रूप में 25 हजार रुपये मिलेंगे. इस हिसाब से सेमीफाइनल और फाइनल खेलने वाले खिलाड़ी को 1.25 लाख रुपये मैच फीस के रूप में मिलेंगे. इसमें डीए की राशि जोड़ दी जाए तो यह रकम बढ़ जाती है. 20 मैच खेलने वाला खिलाड़ी अगर प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं होता है तो उसे मैच फीस के रूप में 20 हजार रुपये प्रति दिन मिलते हैं.

इसी तरह 21 से 40 फर्स्ट क्लास मैच खेलने वाले खिलाड़ी को प्लेइंग इलेवन में शामिल होने पर 50 हजार और रिजर्व में रहने पर 40 हजार रुपये प्रति दिन फीस के रूप में मिलते हैं. 40 प्लस मैच खेलने वाले को 60 हजार एक दिन के मैच फीस के रूप में मिलते हैं. यानी अगर 40 से अधिक मैच खेलने वाला कोई खिलाड़ी फाइनल खेल रहा है तो उसे पांच दिन के हिसाब से 3 लाख रुपये मैच फीस के रूप में मिलेंगे और डीए अलग.

बीसीसीआई ने रणजी ट्रॉफी के इस सीजन के लिए जो नियम तय किए थे. उसके तहत प्लेइंग इलेवन में शामिल खिलाड़ियों को पूरी फीस, जबकि बाकी बचे 9 खिलाड़ियों को 50 फीसदी मैच फीस मिलना तय हुआ था.

आईपीएल रनर अप को रणजी चैम्पियन से ज्यादा पैसा मिला
घरेलू क्रिकेट का सबसे बड़ा टूर्नामेंट होने के बावजूद रणजी ट्रॉफी की चैम्पियन टीम मध्य प्रदेश को इनाम के तौर पर 2 करोड़ रुपये मिले जबकि इस साल आईपीएल जीतने वाली गुजरात टाइटंस को प्राइज मनी के तौर पर इससे 10 गुना अधिक राशि यानी 20 करोड़ रुपये मिले थे. वहीं, रनर-अप रही राजस्थान रॉयल्स को भी 13 करोड़ रुपये मिले थे, जो मध्य प्रदेश की इनामी राशि से 6 गुना से अधिक है.

वैसे रणजी ट्रॉफी और आईपीएल की तुलना नहीं की जा सकती है, क्योंकि दोनों ही टूर्नामेंट का फॉर्मेट अलग है. लेकिन, बीसीसीआई ही इन दोनों टूर्नामेंट का संचालन करती है और रणजी ट्रॉफी में खेलने वाले कई खिलाड़ी आईपीएल में भी खेलते हैं और वहां उनको मोटा पैसा मिल जाता है. इसलिए यह बहस का मुद्दा तो है ही.

आईपीएल में बेस प्राइस तय होती है
आईपीएल में जहां खिलाड़ियों की नीलामी होती है, एक बेस प्राइस पहले से तय होता है. यानी पहले से ही एक न्यूनतम कीमत तय रहती है जबकि रणजी ट्रॉफी खेलने वाले खिलाड़ियों को मैच फीस मिलती है.

13 साल पहले रणजी ट्रॉफी की इनामी राशि बढ़ी थी
ईएसपीएनक्रिकइंफो की 2009 में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीसीआई की वर्किंग कमेटी ने 2009 में रणजी ट्रॉफी की चैम्पियन टीम की प्राइज मनी बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की थी. वहीं, रनर-अप को मिलने वाली इनामी राशि भी 1 करोड़ रुपये की गई थी. पहले रणजी ट्रॉफी के रनर-अप को 30 लाख रुपये मिलते थे जबकि चैम्पियन टीम को 60 लाख रुपये इनाम के तौर पर मिलते थे.

वहीं, सेमीफाइनल खेलने वाली टीमों को 50 लाख की इनामी राशि मिलती थी. यानी 13 साल पहले इनामी राशि बढ़ाई गई थी. इसके बाद से बीसीसीआई ने आईपीएल, टी20, वनडे विश्व कप के आयोजन से हजारों करोड़ रुपये कमाए. लेकिन, घरेलू क्रिकेट में खिलाड़ियों की मैच फीस या इनामी राशि में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया.

Tags: Gujarat Titans, IPL, Madhya pradesh news, Ranji Trophy

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