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मप्र भले ही पहली बार बना रणजी चैंपियन, पहले मध्य भारत का रहा दबदबा, सीके नायडू से लेकर आदित्य श्रीवास्तव तक

Ranji Trophy Final 2022: मप्र की टीम पहली बार बनी चैंपियन.

Ranji Trophy Final 2022: मप्र की टीम पहली बार बनी चैंपियन.

Ranji Trophy Final 2022: मप्र की टीम रणजी ट्रॉफी की नई चैंपियन बन चुकी है. आदित्य श्रीवास्तव की कप्तानी मे टीम ने खिताबी मुकाबले में मुंबई को 6 विकेट से हराया.

नई दिल्ली. मप्र की टीम ने पहली बार रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) का खिताब जीत लिया है. बेंगलुरु में खेले गए फाइनल में टीम ने रविवार को 41 बार की चैंपियन टीम मुंबई को 6 विकेट से हराया. कप्तान आदित्य श्रीवास्तव थे. लेकिन बहुत कम लोगों को यह मालूम होगा कि मप्र से पहले होलकर की टीम 4  बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीत चुकी है. यानी मध्य भारत का रणजी में दबदबा रहा और सीके नायडू ने बतौर कप्तान 4 बार टीम को चैंपियन बनाया. 1954-55 में दोनों टीमों का विलय हो गया. इसका नाम मध्य भारत पड़ा. 2 साल बाद मप्र बनने पर इसका नाम मप्र हो गया. मप्र की टीम 1998-99 के बाद फर्स्ट क्लास टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची थी. आइए आपको टीम के इतिहास के बारे में बताते हैं:

रणजी ट्रॉफी के मुकाबले 1934-35 से शुरू हुए. राजा यशवंतराव हाेलकर द्वितीय ने होलकर की टीम बनाई और वह पहली बार 1941 में रणजी ट्रॉफी टूर्नामेंट में उतरी. टीम की ओर से सीके नायडू और मुश्ताक अली जैसे दिग्गज खिलाड़ी खेले. टीम ने 4 बार 1945-46, 1947-48, 1950-51 और 1952-53 में टूर्नामेंट का खिताब भी जीता. टीम 6 बार रनरअप रही. दूसरी ओर मप्र की टीम 1950-51 से रणजी ट्रॉफी में उतर रही है.

बड़ौदा को 56 रन से हराया

1945-46 के फाइनल में होलकर की टीम सीके नायडू के नेतृत्व में उतरी और फाइनल में बड़ौदा को 56 रन से हराया. सीके नायडू के 200 के दम पर होलकर की टीम ने पहली पारी में 342 रन बनाए. जवाब में बड़ौदा की टीम सिर्फ 198 रन ही बना सकी. इस टीम में हेमू अधिकारी और विजय हजारे जैसे दिग्गज खिलाड़ी थे. हजारे 87 रन पर नाबाद रहे. दूसरी पारी में होलकर की टीम 273 रन पर सिमट गई. सीके नायडू ने 50 रन बनाए. 418 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए बड़ौदा की टीम 361 रन ही बना सकी. विजय हजारे ने एक बार फिर 64 रन बनाए.

बॉम्बे और गुजरात को हराया, नायडू की हैट्रिक

1947-48 के फाइनल में होलकर ने बॉम्बे को 9 विकेट से हराया. बॉम्बे की पहली पारी में सिर्फ 191 रन बना सकी. जवाब में सीएस नायडू के 96 और मुश्ताक अली के 52 के सहारे होलकर ने 361 रन बनाए. कप्तान सीके नायडू ने 26 रन बनाए. जवाब में बॉम्बे की टीम दूसरी पारी में 261 रन ही बना सकी. टीम ने 92 रन के लक्ष्य को एक विकेट पर हासिल कर लिया. मुश्ताक अली 44 रन बनाकर नाबाद रहे. 1950-51 के फाइनल में होलकर ने गुजरात को 189 रन से हराया और सीके नायडू ने बतौर कप्तान ट्रॉफी की हैट्रिक लगाई.

चंदू सरवटे का दोहरा शतक

गुजरात के खिलाफ होलकर ने पहले खेलते हुए 429 रन बनाए. मुश्ताक अली ने 187 रन की बड़ी पारी खेली. जवाब में गुजरात की टीम 327 रन बनाकर आउट हो गई. होल्कर ने दूसरी पारी में 443 रन का स्कोर बनाया. चंदू सरवटे ने 234 रन की बेहतरीन पारी खेली. जवाब में गुजरात की टीम दूसरी पारी में 356 रन ही बना सकी. 11वें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे जसूभाई पटेल ने 152 रन बनाए. लेकिन वे टीम को जीत नहीं दिला सके.

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1952-53 के रणजी फाइनल में सीके नायडू की कप्तानी में होलकर की टीम बंगाल के खिलाफ पहली पारी में बढ़त के आधार पर चैंपियन बनी. बंगाल ने पहली पारी में 479 रन बनाए थे. जवाब में होलकर ने बीबी निंबालकर के 219 के दम पर होलकर ने पहली पारी में 496 रन बनाए. बंगाल ने दूसरी पारी में 5 विकेट पर 320 रन बनाकर घोषित कर दी. जवाब में होलकर की टीम ने खेल खत्म होने तक दूसरी पारी में 9 विकेट पर 177 रन बनाए थे. उसे 304 रन का लक्ष्य मिला था. सीके नायडू ने 207 फसर्ट क्लास मैच में 36 की औसत से 11825 रन बनाए. 26 शतक और 58 अर्धशतक लगाया. वे भारत की ओर से 7 टेस्ट खेले और 2 अर्धशतक के सहारे 350 रन भी बनाए. 81 रन की सबसे बड़ी पारी खेली.

Tags: BCCI, Mumbai, Prithvi Shaw, Ranji Trophy

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