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पूर्व भारतीय कोच से समझिए मिडास टच वाले चंद्रकांत पंडित की खूबियां, इसलिए दिया जा रहा है यह खास नाम

Ranji Trophy Final 2022: चंद्रकांत पंडित बतौर कोच विदर्भ और मुंबई को भी चैंपियन बना चुके हैं. (BCCI Twitter)

Ranji Trophy Final 2022: चंद्रकांत पंडित बतौर कोच विदर्भ और मुंबई को भी चैंपियन बना चुके हैं. (BCCI Twitter)

Ranji Trophy Final 2022: मप्र की टीम फर्स्ट क्लास टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी की नई चैंपियन बन चुकी है. टीम ने फाइनल में भारी-भरकम नामों वाली और 41 बार खिताब पर कब्जा कर चुकी मुंबई टीम को करारी शिकस्त दी.  

नई दिल्ली. चंद्रकांत पंडित ने अपनी कोचिंग में मप्र को रणजी ट्राॅफी का नया चैंपियन बनाया. टीम ने फाइनल में 41 बार की चैंपियन टीम मुंबई को हराया. पहली पारी में मप्र की ओर से यश दुबे, शुभम शर्मा और रजत पाटीदार ने शतक लगाया. वहीं गेंदबाजी में बाएं हाथ के स्पिनर कुमार कार्तिकेय ने अच्छा प्रदर्शन किया. इससे पहले मप्र की टीम नॉकआउट राउंड में पहुंचती रही है, लेकिन फाइनल से दूर रह जाती थी. लेकिन मिडास टच वाले चंद्रकांत पंडित ने मप्र को बतौर कोच अपने पहले ही सीजन में चैंपियन बना दिया. यहां मिडास टच के बारे में यह बात जानना जरूरी है कि अब तक यह सिर्फ एमएस धोनी के लिए प्रयोग किया जाता रहा है. कहा जाता है कि वे जिस खिलाड़ी पर भी हाथ रख देते थे, वह अच्छा प्रदर्शन करता था. फिर इसमें चंद्रकांत पंडित कहां से आ गए. वजह ये है कि उन्होंने बतौर कोच नई टीम विदर्भ के बाद मप्र को भी रणजी का चैंपियन बना दिया है.

टीम इंडिया के पूर्व कोच लालचंद ने News18 Hindi से एक्सक्लूसिव बात करते हुए कहा कि मप्र की टीम अच्छी रही है. चंद्रकांत ने खिलाड़ियों को बताया कि फाइनल में कैसे खेलना है और जीत कैसे हासिल करनी है. वे खुद भी बतौर कप्तान जीत चुके हैं. उन्हें इसका पूरा तरीका पता. उन्होंने बताया कि पहले से ही खिलाड़ियों को प्रैक्टिस कराते समय इन सब बातों के बारे में बताया जाता है. हर कोच एक लक्ष्य के साथ उतरता है. वे मप्र से खेल चुके थे. इस कारण उन्हें सबकुछ पता था और मैनेजमेंट का भी उन्हें पूरा सपोर्ट मिला.

लालचंद राजपूत ने कहा कि आप बतौर कोच अच्छा प्रदर्शन कराने के लिए खिलाड़ियों से अधिक मेहनत कराते हैं. मेंटल स्टेटस को मजबूत बनाते हैं. उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट से पहले ही उन्होंने बताया दिया होगा कि मुझे 2 से 3 ऐसे बल्लेबाज चाहिए, जो लगातार शतक जड़ सकें. वहीं 2 गेंदबाज ऐसे चाहिए, जो 50 विकेट तक पहुंच सकें. चैंपियन टीमें ऐसे ही तैयारी की जाती हैं. मप्र के खिलाड़ियों ने उन्हें अच्छा रिस्पांस दिया, जो रिजल्ट में साफ दिख रहा है.

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पूर्व भारतीय क्रिकेटर लालचंद राजपूत ने कहा कि मप्र के कई खिलाड़ी सालों से खेल रहे थे. ऐसे में उनमें बॉन्डिंग अच्छी थी. इस कारण आवेश खान और वेंकटेश अय्यर जैसे इंटरनेशनल खिलाड़ियों के नहीं रहने पर भी वे रणजी ट्रॉफी जीतने में सफल रहे. उन्होंने कहा कि फाइनल में हर टीम पर दबाव होता है. लेकिन मप्र के खिलाड़ियों ने इसे अच्छे से हैंडल किया. आने वाले समय इस जीत का फायदा यहां के खिलाड़ियों को जरूर मिलेगा.

Tags: BCCI, Lalchand Rajput, Mumbai, Ranji Trophy

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