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रवि शास्‍त्री का खुलासा, ऑडी हासिल करने के लिए इस पाकिस्‍तानी दिग्‍गज ने अपनाया हर हथकंडा

1985 विश्‍व चैंपियनशिप में रवि शास्‍त्री प्‍लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे थे (फाइल फोटो)

1985 विश्‍व चैंपियनशिप में रवि शास्‍त्री प्‍लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे थे (फाइल फोटो)

रवि शास्‍त्री (Ravi Shastri) ने बताया कि फाइनल में उनका ध्‍यान भटकाने के लिए इस पाकिस्‍तानी खिलाड़ी ने काफी कोशिश भी की थी

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    नई दिल्‍ली. भारतीय टीम के कोच रवि शास्‍त्री  (Ravi Shastri)  ने हाल ही में एक इंटरव्‍यू में उस पाकिस्‍तान क्रिकेटर के नाम का खुलासा किया, जिसने 1985 में विश्‍व चैंपियनशिप में ऑडी कार हासिल करने के लिए पूरा दम लगा दिया था. हालांकि चैंपियनशिप में बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर रवि शास्‍त्री ने ऑडी हासिल कर ली थी. शास्‍त्री के दम पर भारतीय टीम इस टूर्नामेंट को अपने नाम करने में सफल रही थी. वे इस टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्‍ठ खिलाड़ी चुने गए थे और इनाम स्‍वरूप उन्‍हें ऑडी कार मिली थी.
    सोनी टेन पिट स्‍टॉप कार्यक्रम में बात करते हुए शास्‍त्री ने बताया कि प्‍लेयर ऑफ द टूर्नामेंट की दौड़ में जावेद मियांदाद भी खुद को मुकाबले में मान रहे थे. इस टूर्नामेंट के फाइनल में भारत ने शास्‍त्री और श्रीकांत के अर्धशतक के दम पर पाकिस्‍तान को हरा दिया था. शास्‍त्री ने कहा कि जावेद मियांदाद के पास ऑडी जीतने का मौका नहीं था, मगर फिर भी वो उनका ध्‍यान भटकाने की कोशिश कर रहे थे. शास्‍त्री ने कहा कि फाइनल में अक्‍सर उन दोनों के बीच बातचीत हो रही थी.

    ऑडी से जुड़ा एक ये भी किस्‍सा

    शास्त्री (Ravi Shastri) ने 1985 में पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले फाइनल से पहले की टीम बैठक का किस्सा भी साझा भी किया. उन्होंने कहा, 'कपिल ने कहा कि अगर मैं कार जीतता हूं तो मैं 25 प्रतिशत (कार बेचने के बाद मिलने वाली राशि का) रखूंगा और बाकी साझा करना होगा. इसके बाद जिम्मी (मोहिंदर अमरनाथ) ने कहा, ‘यार जिसको मिला, मिला’. जब मेरी बारी आयी तो मैंने कहा, अगर मैं जीता तो मैं कार अपने पास रखूंगा. मैं केवल स्टेपनी ही साझा कर सकता हूं.

    रवि शास्‍त्री ने 1985 में एकदिवसीय मैचों में खेलने वाली भारतीय टीम को मौजूदा टीम इंडिया से काफी मजबूत बताया. शास्‍त्री के अनुसार वो टीम इतनी मजबूत थी कि वह विराट कोहली की अगुआई वाली वर्तमान टीम को भी परेशानी में डाल सकती थी. शास्‍त्री ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं. 1985 की टीम सीमित ओवरों की किसी भी भारतीय टीम को कड़ी चुनौती पेश करेगी. वह 1985 की टीम वर्तमान टीम को भी परेशानी में डाल देगी. ' शास्त्री का इसके साथ ही मानना है कि 1985 की टीम 1983 में विश्व कप जीतने वाली टीम से बेहतर थी, क्योंकि उसमें युवा और अनुभव का अच्छा मिश्रण था.

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