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    Happy B'Day Rishabh Pant: गुरुद्वारे में गुजारी रातें, पिता के निधन के बाद जड़ा अर्धशतक, कुछ ऐसा रहा है संघर्ष

    4 अक्टूबर 1997 को उत्तराखंड में जन्मे ऋषभ पंत की कहानी काफी संघर्षपूर्ण रही है.
    4 अक्टूबर 1997 को उत्तराखंड में जन्मे ऋषभ पंत की कहानी काफी संघर्षपूर्ण रही है.

    भारतीय क्रिकेट टीम (Team India) के युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत (Rishabh Pant) आज अपना 23वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं. 4 अक्टूबर 1997 को उत्तराखंड में जन्मे ऋषभ पंत की कहानी काफी संघर्षपूर्ण रही है. उन्होंने फर्श से लेकर अर्श तक का सफर कई कठिनाइयों से गुजर कर पूरा किया है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 4, 2020, 11:48 AM IST
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    नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम (Team India) के युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत (Rishabh Pant) आज अपना 23वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं. 4 अक्टूबर 1997 को उत्तराखंड में जन्मे ऋषभ पंत की कहानी काफी संघर्षपूर्ण रही है. उन्होंने फर्श से लेकर अर्श तक का सफर कई कठिनाइयों से गुजर कर पूरा किया है. यह वह समय था, जब उत्तराखंड क्रिकेट का कोई भविष्य नहीं था. इस बात को समझते हुए ऋषभ ने दिल्ली में अपने करियर को आकार देना शुरू किया. दिल्ली में बिना किसी जान-पहचान के अपने सपनों को पूरा करने के लिए ऋषभ आए थे.

    दिल्ली में ऋषभ पंत कोई जान पहचान नहीं था. वह मोती बाग स्थित गुरुद्वारे में रहने लगे थे. ऋषभ पंत ने पिछले साल एक इंटरव्यू में बताया था कि क्रिकेटर बनने के अपने संघर्ष के दिनों में गुरुद्वारे में भी सो जाया करते थे. ऋषभ पंत ने बताया था कि मेरे पापा भी क्रिकेट खेला करते थे और वह भी चाहते थे कि उनका बेटा क्रिकेटर बने. मैं उत्तराखंड में पैदा हुआ था और रुढ़की में पढ़ाई करता था. उस समय जब मैं रुढ़की में खेला करता था तो मुझे सलाह दी गई थी कि मुझे दिल्ली जाना चाहिए. ऐसे में मैंने दिल्ली जाने का फैसला लिया.

    ऋषभ पंत ने गुरुद्वारे में गुजारी हैं कई रातें
    उन्होंने बताया था, ''मैं रुढ़की से दिल्ली अभ्यास करने आता था. रात को दो बजे की बस पकड़कर मैं दिल्ली आता था ताकि मैं यहां प्रैक्टिस कर सकूं. मैं करीब छह घंटे का सफर तय करता था. कभी मैं अपनी दीदी के घर चला जाता था तो कभी गुरुद्वारे में ही सो जाया करता था.''
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    पिता के निधन के दो दिन बाद मैदान पर लौटे थे ऋषभ पंत
    क्रिकेट के प्रति जुनून की एक झलक उस समय देखने को मिली, जब 2017 के आईपीएल के दौरान उनके पिता का निधन हो गया. पंत की उम्र उस समय महज 20 साल की थी. वह पिता के अंतिम संस्कार में गए और दो दिन बाद ही क्रिकेट मैदान पर वापस आकर उन्होंने अर्द्धशतक जड़ा. दिल्ली डेयरडेविल्स की तरफ से खेलते हुए पंत ने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ अर्धशतकीय पारी खेली थी. पंत ने 36 गेंदों में 57 रनों की जुझारू पारी खेली थी. पंत के इस साहस की उस वक्त कई दिग्गज खिलाड़ियों ने तारीफ की थी.

    2018 में इंग्लैंड के खिलाफ किया टेस्ट डेब्यू
    ऋषभ पंत ने 2018 में नॉटिंघम में इंग्लैंड के खिलाफ खेलकर टेस्ट डेब्यू किया था. पंत अब तक 13 टेस्ट में 38.76 की औसत से 814 रन बना चुके हैं. उनका अधिकतम स्कोर नाबाद 159 है. इंटरनेशनल क्रिकेट के अपने शुरुआती दौर में ही पंत कई रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं. उन्होंने 11 टेस्ट मैचों में 51 कैच और दो स्टंप लेकर धोनी को पीछे छोड़ दिया था. धोनी ने 15 टेस्ट में यह उपलब्धि हासिल की थी. इसके बाद से ही यह कहा जाने लगा कि ऋषभ पंत धोनी के सही उत्ताराधिकारी हैं.

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    2018 में वेस्टइंडीज के खिलाफ किया वनडे डेब्यू
    ऋषभ पंत ने 2018 में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे डेब्यू किया था. पंत अबतक 16 वनडे मैचों में 26.71 की औसत से 374 रन बना चुके हैं. वनडे में उनका अधिकतम स्कोर 71 रन रहा है. पंत ने टी-20 डेब्यू 2017 में किया था. टी-20 इंटरनेशन में पंत अबतक 28 मैचों में 20.50 की औसत से 410 रन बना चुके हैं. इस दौरान उनका अधिकतम स्कोर नाबाद 65 रन का रहा है.

    ऋषभ पंत आईपीएल में भी मचाते हैं धमाल
    2020 के आईपीएल से पहले तक वह 58 आईपीएल मैचों में 36.67 की औसत से 1870 रन बना चुके हैं. उनका स्ट्राइक रेट 160.52 का रहा है. आईपीएल 2020 में अबतक खेले गए चार मैचों में ऋषभ पंत ने 44.66 की औसत और 136.73 के स्ट्राइक रेट से 134 रन बनाए हैं.आईपीएल में अबतक पंत 167 चौके और 97 छक्के जड़े चुके हैं.



    बेशक ऋषभ पंत फिलहाल टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन पंत को सभी अनुभवी और दिग्गज क्रिकेटर उन्हें एक संभावनाशील क्रिकेटर के रूप में देख रहे हैं. सौरव गांगुली से लेकर सुनील गावस्कर तक ऋषभ पंत की तारीफ कर रहे हैं. आईपीएल 2020 में पंत के पास एक बार फिर यह मौका है कि वह अपनी आक्रामकता और संयमशीलता का प्रदर्शन करें और टीम इंडिया में अपने लिए दरवाजे खोलें.
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