IPL 2021: ऋषभ पंत की 5 खूबियां जो उन्हें कप्तान के तौर पर बना सकती हैं सफल

ऋषभ पंत (Rishabh Pant) को 23 साल की उम्र में दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी का मौका मिला है. पिछले सीजन में श्रेयस अय्यर की कप्तानी में दिल्ली फाइनल खेली थी. ऐसे में टीम को उनसे यही सफलता दोहराने की उम्मीद होगी. (Delhi capitals/Twitter)

ऋषभ पंत (Rishabh Pant) को 23 साल की उम्र में दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी का मौका मिला है. पिछले सीजन में श्रेयस अय्यर की कप्तानी में दिल्ली फाइनल खेली थी. ऐसे में टीम को उनसे यही सफलता दोहराने की उम्मीद होगी. (Delhi capitals/Twitter)

आईपीएल के आगामी सीजन में श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer Injured) के चोटिल होने के बाद दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी ऋषभ पंत (Rishabh Pant) को सौंपी गई है. उन्हें अजिंक्य रहाणे, स्टीव स्मिथ, शिखर धवन और रविचंद्नन अश्विन जैसे खिलाड़ियों पर तरजीह देते हुए यह जिम्मेदारी मिली.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 31, 2021, 2:54 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट में इस वक्त अगर किसी खिलाड़ी का सितारा बुलंदी पर है, तो वह ऋषभ पंत (Rishabh Pant) हैं. पिछले कुछ महीनों में उन्होंने अपने खेल से सबको प्रभावित किया है. जब भी टीम को जरूरत पड़ी, यह खिलाड़ी काम आया. यही वजह है कि दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) ने भी रेगुलर कप्तान श्रेयस अय्यर के चोट के कारण आईपीएल से बाहर होने के बाद पंत को ही टीम की कमान सौंपी. वह भी तब जब टीम में अजिंक्य रहाणे (Ajinkya Rahane), स्टीव स्मिथ (Steve Smith), शिखर धवन (Shikhar Dhawan) और रविचंद्नन अश्विन ( Ravichandran Ashwin) जैसे खिलाड़ी मौजूद हैं.

इनमें से कई तो आईपीएल के अलावा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी अपनी टीम की कप्तानी कर चुके हैं. ऐसे में पंत को इन खिलाड़ियों पर तरजीह देने का मतलब है कि उनमें फ्रेंचाइजी को कुछ खास नजर आता है. उनके हालिया प्रदर्शन को देखें तो ये बात सच भी नजर आती है. नजर डालते हैं पंत की 5 खूबियों पर जो उन्हें बनाती हैं खास.

दबाव झेलने की काबिलियत

ऋषभ पंत भी श्रेयस की तरह ही 23 साल की उम्र में ही दिल्ली के कप्तान बने हैं. उनकी उम्र भले ही कम हो, लेकिन दबाव झेलने की काबिलियत उन्हें बड़ा बनाती है. एक कप्तान के तौर पर उनकी ये खूबी इस साल आईपीएल में टीम के काफी काम आ सकती है. पिछले ऑस्ट्रेलिया दौरे से लेकर इंग्लैंड सीरीज तक पंत ने कई मौकों पर इसे साबित भी किया. ऑस्ट्रेलिया दौरे पर ब्रिस्बेन में हुए सीरीज के आखिरी टेस्ट में पंत ने जो नाबाद 89 रन की पारी खेली. वो इस बात का सबूत है कि ये खिलाड़ी दबाव झेलना जानता है. भारत को इस मैच की चौथी पारी में जीत के लिए 329 रन का लक्ष्य हासिल करना था. एक वक्त 265 रन पर भारत के पांच विकेट गिर चुके थे लेकिन पंत ने वॉशिंगटन सुंदर के साथ मिलकर टीम को जीत दिला दी. टीम केवल मैच ही नहीं जीती, बल्कि 2-1 से सीरीज पर भी कब्जा जमाया.
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पंत ने सिडनी में हुए सीरीज के तीसरे टेस्ट को ड्रॉ कराने में भी अहम रोल निभाया. इस टेस्ट की चौथी पारी में भारत को ऑस्ट्रेलिया ने 407 रन का टारगेट दिया था. पंत ने भारत के लिए सबसे ज्यादा 97 रन की पारी खेलकर मैच ड्रॉ करा दिया. इंग्लैंड के खिलाफ हाल ही में खत्म हुई 4 टेस्ट की सीरीज में पंत ने फिर साबित किया कि वह दबाव में बिखरते नहीं, बल्कि बेहतर हो जाते हैं. उन्होंने इस सीरीज में 54 की औसत से 270 रन बनाए थे. वह रोहित के बाद सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दूसरे भारतीय थे.

रिस्क लेना पंत की सबसे बड़ी ताकत



पंत बेखौफ बल्लेबाजी करते हैं. उन्हें इस बात का फर्क नहीं पड़ता कि टीम किस स्थिति में. वह किस फॉर्मेट में खेल रहे हैं. उनकी बल्लेबाजी का अंदाज नहीं बदलता. बल्लेबाजी के दौरान रिस्क लेने की उनकी क्षमता उनकी बड़ी ताकत है. इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी दो वनडे में वह खतरा मोल लेने की अपनी काबिलियत साबित कर चुके हैं. तीसरे वनडे में 160 रन के भीतर भारत के चार विकेट गिरने के बावजूद उन्होंने अपने खेलने का तरीका नहीं बदला और ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए 62 गेंद पर 78 रन बनाए थे. दूसरे वनडे में भी पंत ने इसी तरह खेलते हुए 40 गेंद पर 77 रन बनाए थे. उनकी ये खूबी इस साल आईपीएल में दिल्ली टीम के बहुत काम आ सकती है. क्योंकि अगर बेखौफ अंदाज में खेलने में सफल होते हैं, तो फिर टीम को पहला आईपीएल खिताब जीतने से कोई नहीं रोक सकता.

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विकेट के पीछे से लगातार गेंदबाजों का हौसला बढ़ाना

पंत सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि विकेटकीपिंग के जरिए भी विरोधी टीम की नाक में दम करके रखते हैं. वो लगातार विकेट के पीछे से गेंदबाजों और फील्डर्स की हौसला अफजाई करते हैं. इतना ही नहीं, वो विपक्षी बल्लेबाज के साथ माइंड गेम खेलना भी बखूबी जानते हैं. इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट में उन्होंने इंग्लिश ओपनर जैक क्राउली को ऐसे ही छेड़कर आउट करवाया था. दरअसल, अक्षर पटेल गेंदबाजी कर रहे थे और क्राउली क्रीज पर जमने की कोशिश कर रहे थे. पंत बार-बार विकेट के पीछे से क्राउली को हवाई शॉट खेलने के लिए उकसा रहे थे. अक्षर के इस ओवर में पंत को विकेट के पीछे से ये बोलते सुना गया कि किसी को गुस्सा आ रहा है, यहीं डालता रह बापू. इसके बाद क्राउली अपना आपा खो बैठे और हवा में शॉट खेलने के चक्कर में कैच आउट हो गए. टी20 जैसे फॉर्मेट में जहां बल्लेबाजों के पास ज्यादा वक्त नहीं होता है. वहां पंत विकेट के पीछे बल्लेबाजों को ऐसे ही परेशान कर उन्हें आउट होने पर मजबूर कर सकते हैं.

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मैदान पर हमेशा तनाव से दूर

पंत मैदान पर कभी तनाव में नजर नहीं आते हैं. फिर चाहें टीम मैच जीत या हार रही हो. उनकी ये खूबी पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से मेल खाती है. आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में जहां हर गेंद पर मैच का पासा पलट सकता है. बतौर कप्तान उनकी ये खूबी टीम को एकजुट और दबाव रहित खेल दिखाने में मददगार साबित हो सकती है.

मैच विनर हैं पंत

इसके अलावा एक बल्लेबाज के तौर पर पंत मैच विनर खिलाड़ी हैं. वह चंद गेंदों में पूरा मैच पलट सकते हैं. इससे पहले, आईपीएल में ही वह कई मौकों पर ऐसा कर चुके हैं. लीग में उनके आंकड़े इसे साबित करते हैं. लीग के इतिहास में सबसे बेहतर स्ट्राइक रेट वाले 10 बल्लेबाजों में वह शामिल हैं. पंत नौवें स्थान पर हैं. वहीं, आईपीएल में सबसे बड़े व्यक्तिगत स्कोर की बात करें, तो नाबाद 128 रन की पारी खेलने वाला यह बल्लेबाज इस लिस्ट में पांचवें स्थान पर है. वह लीग में 100 से ज्यादा छक्के भी लगा चुके हैं.
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